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ऑटिज्म क्या है? जानें इस बीमारी के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के उपाय

ऑट‍िज्‍म एक व‍िकास संबंध‍ित बीमारी है ज‍िसमें पीड़‍ित व्‍यक्‍त‍ि के द‍िमाग का व‍िकास सामान्‍य से अलग होता है, इसके बारे में जानते हैं व‍िस्‍तार से 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Feb 15, 2022 11:19 IST
ऑटिज्म क्या है? जानें इस बीमारी के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के उपाय

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द‍िमाग के बीच संपर्क बनाने वाले जीन और सैल्‍स के बीच गड़बड़ी के कारण ऑट‍िज्‍म की बीमारी होती है। अगर द‍िमाग को बनाने वाले जीन में क‍िसी तरह की कोई परेशानी है तो भी ये बीमारी हो सकती है। एक्‍सपर्ट्स के मुताब‍िक अनुवांश‍िक कारणों से भी ऑट‍िज्‍म हो सकता है। कई कारण ऐसे भी हैं जो जन्‍म से पहले बच्‍चे के द‍िमाग के व‍िकास को बाध‍ित कर सकते हैं। बच्‍चे में ऑट‍िज्‍म के लक्षणों को पहचानने के ल‍िए आपको बच्‍चे के व्‍यवहार को करीब से नोट‍िस करना होगा और उनके व‍िकास पर गौर करना होगा। अगर बच्‍चे को देखने, सुनने, बोलने में परेशानी होती है तो आपको डॉक्‍टर के पास जाना चाह‍िए। इस लेख में हम ऑट‍िज्‍म के लक्षण, उपाय, बचाव के ट‍िप्‍स आद‍ि पर चर्चा करेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

autism meaning

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ऑटिज्म क्‍या होता है? (Autism meaning in Hindi)

ऑट‍िज्‍म का मतलब (autism meaning in Hindi) जानेंगे तो ये एक व‍िकास से जुड़ी बीमारी है ज‍िसमें व्‍यक्‍त‍ि का द‍िमाग अन्‍य की तुलना में ठीक से काम नहीं करता ज‍िसके कारण इनका व्‍यवहार, सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से अलग होती है। ऑट‍िज्‍म मुख्‍य रूप से 3 प्रकार का होता है। अस्‍पेर्गेर स‍िंड्रोम, ऑटिज्‍म का सबसे हल्‍का रूप माना जाता है। इसमें व्‍यक्‍ति को व्‍यवहार से जुड़ी समस्‍या नहीं होती केवल व्‍यवहार अलग होता है। पर्वेस‍िव डेवलपमेंट के अलावा क्‍लॉस‍िक ऑट‍िज्‍म सबसे आम प्रकार है ज‍िसमें सामाज‍िक और मानसिक तौर पर व्‍यक्‍त‍ि के व्‍यवहार में बदलाव होता है।

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ऑट‍िज्‍म से पीड़ित लोगों का व्‍यवहार कैसा होता है? 

ऑट‍िज्‍म से पीड़‍ित लोगों का व्‍यवहार गुस्‍सैल, बेचैन, अशांत हो सकता है, ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं को नहीं समझ पाते। ऑट‍िज्‍म के लक्षण अगर शुरूआत में ही पता चल जाएं तो जल्‍द से जल्‍द इलाज शुरू क‍िया जा सकता है। ज‍िन बच्‍चों को ऑट‍िज्‍म की बीमारी होती है वो खेल-कूद या अन्‍य एक्‍ट‍िव‍िटी में द‍िलचस्‍पी नहीं द‍िखाते, वहीं ऐसे बच्‍चे अकेले या चुपचाप बैठे रहते हैं। ऐसे बच्‍चों की स्‍पीच में भी फर्क होता है, उनके बात करने का तरीका अलग होता है, ऐसे बच्‍चे दूसरे व्‍यक्‍त‍ि के शब्‍दों को दोहराते हैं। 

ऑटिज्म के लक्षण (Symptoms of autism)

autism symptoms

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ऑट‍िज्‍म के लक्षण जन्‍म के 12 से 18 हफ्ते बाद द‍िखना शुरू होते हैं वहीं कुछ में ये लक्षण पहले भी नजर आ सकते हैं। ऑट‍िज्‍म की बीमारी पूरे जीवनकाल तक रह सकती है। अगर आपका बच्‍चा ऑट‍िज्‍म का श‍िकार हो तो उसमें ये लक्षण नजर आ सकते हैं- 

  • ज‍िन बच्‍चों को ऑट‍िज्‍म होता है वो आंखों में आंखें म‍िलाकर बात नहीं करते।
  • अगर बच्‍चे को ऑट‍िज्‍म है तो वो हाथों के बल चलकर इधर-उधर जाएगा।
  • शब्‍द बोलते समय बड़बड़ाना या कम बोलना भी ऑट‍िज्‍म के लक्षण हो सकते हैं।
  • अगर बच्‍चा अकेले रहना चाहता है या ज्‍यादा घुलना-मि‍लना पसंद नहीं करता है तो भी ये ऑट‍िज्‍म के लक्षण (symptoms of autism) हो सकते हैं।

ऑटिज्म के कारण (Causes of autism)

  • अनुवांश‍िक कारणों के चलते बच्‍चे को ऑट‍िज्‍म की बीमारी (autism meaning in Hindi) हो सकती है।
  • अगर लेट प्रेगनेंसी प्‍लान की है तो होने वाले बच्‍चे को ऑट‍िज्‍म जैसी बीमारी हो सकती है।
  • वहीं जो बच्‍चे समय से पहले जन्‍म ले लेते हैं यानी प्रीमेच्‍योर ड‍िलीवरी के जर‍िए होते हैं उनमें भी ये बीमारी हो सकती है।
  • जो बच्‍चे लो बर्थ वेट के साथ जन्‍म लेते हैं उनमें भी ये समस्‍या आ सकती है।
  • ट्यूबरस स्केलेरोसिस से पीड़‍ित बच्‍चों को भी ऑटिज्‍म की बीमारी हो सकती है।

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ऑटिज्म का इलाज (Treatment of autism)

ऑट‍िज्‍म जैसी बीमारी का क्‍लीन‍िकल उपचार नहीं है पर लक्षणों को कंट्रोल करने के ल‍िए डॉक्‍टर एंटीसायकोट‍िक या एंटी-एंग्‍जायटी दवाओं को लेने की सलाह देते हैं पर सब केस में दवा नहीं दी जाती। वहीं थैरेपी और स्‍क‍िल्‍स सीखकर ही ऐसे लोग सामान्‍य जीवन जी सकते हैं ज‍िसमें एजुकेशनल प्रोग्राम और ब‍िहेव‍ियरल थैरेपी की मदद ली जा सकती है। ऑट‍िज्‍म का हर केस दूसरे से अलग होता है इसल‍िए आपको लक्षणों के मुताब‍िक ही उपचार करवाना होता है।

ऑटिज्म से कैसे बचा जा सकता है? (How to prevent autism)

  • ऑट‍िज्‍म का पता लगाने के ल‍िए कोई व‍िशेष टेस्‍ट मौजूद नहीं है इसल‍िए लक्षण नजर आने पर भी बीमारी का पता चलता है।
  • ऑट‍िज्‍म की बीमारी से बचने के ल‍िए आपको बेबी प्‍लान करने से पहले ही डॉक्‍टर से जरूरी टेस्‍ट और फैम‍िली ह‍िस्‍ट्री को लेकर चर्चा करनी चाह‍िए।
  • इसके साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान सही डाइट लेना, मां का हेल्‍दी होना और पोषक तत्‍वों का सेवन करना जरूरी है तभी होने वाले बच्‍चे के दिमाग का व‍िकास सही तरह से होगा।

ऑट‍िज्‍म की बीमारी अगर एक बार हो गई तो वो व्‍यक्‍ति के साथ जीवनभर रहेगी पर अगर आप सही इलाज दें तो लक्षण काबू में रह सकते हैं और काफी हद तक ऐसे लोग सामान्‍य जीवन जी सकते हैं।

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