स्टडी: कोरोना के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकती है ये एंटीबॉडी कॉकटेल

एक स्टडी के मुताबिक रेजेन-कोव एंटीबॉडी कॉकटेल के इस्तेमाल से कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से और मौत से बचाया जा सकता है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Aug 31, 2021Updated at: Sep 01, 2021
स्टडी: कोरोना के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकती है ये एंटीबॉडी कॉकटेल

कोरोनावायरस (Coronavirus) के कहर को खत्म करने के लिए दुनियाभर में टीकाकरण अभियान चल रहे हैं लेकिन इसके अलावा इस संक्रमण से होने वाली मौत को कम करने के लिए और इसे फैलने से रोकने के लिए तमाम दवा और इलाज की खोज वैज्ञानिक कर रहे हैं। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबॉडी कॉकटेल (Antibody Cocktail) को कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए काफी असरदार माना जा रहा है। कुछ महीने पहले ही कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए एंटीबॉडी कॉकटेल का इस्तेमाल होना शुरू हुआ था। एक स्टडी के मुताबिक इस एंटीबॉडी कॉकटेल का असर मरीजों पर बहुत प्रभावी ढंग से दिख रहा है। स्टडी के मुताबिक एंटीबॉडी कॉकटेल कोरोना से संक्रमित गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकती है। गौरतलब हो कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति को भी इस एंटीबॉडी कॉकटेल की डोज दी गयी थी।

कोरोना के इलाज में कारगर है ये एंटीबॉडी कॉकटेल

दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ राजेश चावला के मुताबिक, "एंटीबॉडी कॉकटेल में दो से अधिक बायोलॉजिकल ड्रग्स एंटीबॉडी कॉकटेल केसिरिविमैब और इम्डेविमैब का मिश्रण है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में एंटीबॉडी के निर्माण का काम करती है। कोरोनावायरस संक्रमण से लड़ने के लिए यह दवा शरीर की मदद करती है जिस प्रकार से कोरोना से संक्रमित होने पर खुद से बनी एंटीबॉडी कोविड से लड़ने का काम करती हैं।" डॉ राजेश ने कहा, "ये दोनों एंटीबॉडी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करती है। ये दवा वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोकने में भी उपयोगी मानी जाती है। एंटीबॉडी कॉकटेल कोरोना के मरीजों को गंभीर अवस्था में जाने से बचाने का भी काम करती है। भारत में जिन मरीजों को एंटीबॉडी कॉकटेल का डोज दिया गया था उनके परिणाम अच्छे आये हैं।"

रेजेन-कोव- दो एंटीबॉडीज की एक कॉकटेल की डोज अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी गयी थी। अब हाल ही में लांसेट के ई-क्लीनिकल मेडिसिन जर्नल छपी एक स्टडी के मुताबिक ये एंटीबॉडी कॉकटेल कोरोना के इलाज में बहुत उपयोगी साबित हो रही हैं और इसका डोज लेने के बाद मरीजों की कठिनाइयों को कम करने में बहुत फायदेमंद है। स्टडी के मुताबिक इस एंटीबॉडी कॉकटेल को लेकर कोरोना से संक्रमित 1,400 मरीजों का अध्ययन किया गया है जिसमें ये बात सामने आई है। यह मोनोक्लोनल एंटीबाडी कॉकटेल केसिरिविमैब और इमडेविमैब का मिश्रण है। इसे अमेरिका की दवा नियामक संस्था एफडीए द्वारा आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी भी मिली हुई है। 

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(image source - cdc.gov)

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संक्रमित मरीजों के अस्पताल में भर्ती और मौत के जोखिम को 70 प्रतिशत तक कम करने में प्रभावी 

इस स्टडी में दावा किया गया है कि यह मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल कोरोना से संक्रमित मरीजों में मौत के जोखिम और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को लगभग 70 प्रतिशत तक कम करने में प्रभावी है। REGEN-COV एंटीबॉडी कॉकटेल को अमेरिका स्थित बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Regeneron Pharmaceuticals द्वारा बनाया गया है जो कोरोना से संक्रमित ऐसे मरीजों को दी जाती है जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती है। इस अध्ययन में कहा गया है कि एंटीबॉडी कॉकटेल देने के बाद मरीजों का 14, 21 और 28 दिन बाद मूल्यांकन किया गया है। जिसके बाद यह परिणाम सामने आया है। इस एंटीबॉडी कॉकटेल की डोज लेने के बाद केवल 1.3 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी थी। इसके अलावा मरीजों की कोरोना से होने वाली मौत के दर में भी सुधार हुआ है।

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क्या है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी? 

एंटीबॉडी कॉकटेल, इसे बनाने के लिए उन दो एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया गया जो वायरस पर एक जैसा असर डालती हैं। ये दवा संक्रमण को मानवीय कोशिकाओं तक पहुंचने नहीं देती, जिससे वायरस न्यूट्रिशन नहीं प्राप्त कर पाता। ऐसे में ये दवा वायरस के प्रभाव को कम कर देती है। REGEN-COV एंटीबॉडी कॉकटेल केसिरिविमैब और इम्डेविमैब का मिश्रण है। ये शरीर के इम्यून सिस्टम को कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए बेहतर बनाते हैं। ये एंटीबॉडीज शरीर में खास एंटीजन को टारगेट करते हैं जो प्रोटीन इम्यून रेस्पॉन्स बनाने में मदद करता है। यह दवा अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ के कई देशों में पहले से ही उपयोग में लाई जा रही है। ऐसे में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन यानी सीडीएससीओ ने भी एंटीबॉडी कॉकटेल को इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन के तहत मंजूरी दे दी है। बता दें कि यह दोनों एंटीबॉडी SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन पर भी कारगर है। भारत में भी एंटीबॉडी कॉकटेल कोरोना के मरीजों को दिया जा रहा है। 

इन मरीजों पर किया जा सकता है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का इस्तेमाल 

इस दवा का इस्तेमाल 12 साल और उससे अधिक वर्षों के बच्चों के साथ-साथ बड़े उम्र के लोगों पर भी किया जा सकता है। कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज जिनमें हल्के और मध्यम लक्षण हैं उन्हें ये एंटीबॉडी कॉकटेल दिया जा सकता है। कोरोना से संक्रमित ऐसे मरीज जो गंभीर लक्षण वाले हैं या जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता हो रही हैं उन पर इस एंटीबॉडी कॉकटेल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस दवा का इस्तेमाल करने के लिए मरीज का न्यूनतम वजन 40 किलोग्राम होना जरूरी है।

(main image source - cdc.gov)

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