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ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस दोनों हैं हड्डियों से संबंधित समस्या, जानें दोनों के बीच का अंतर

ऑस्टियोपोरोसिस और ओस्टियोपीनिया में क्या है अंतर? इसके बारे में लोगों को पता होना जरूरी है। जानतें है जोखिम और बचाव भी...

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Oct 18, 2021 17:52 IST
ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस दोनों हैं हड्डियों से संबंधित समस्या, जानें दोनों के बीच का अंतर

पहले समय में ओस्टियोपोरोसिस की समस्या मुख्यतौर पर 45 के बाद वाली उम्र के लोगों को प्रभावित करती थी। लेकिन अब जिस प्रकार की लोग जीवन शैली जी रहे हैं और जिस प्रकार की डाइट फोलो कर रहे हैं ऐसे में कम उम्र के लोग भी हड्डी से संबंधित समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। बता दें कि हड्डियों से संबंधित समस्याएं हैं ओस्टियोपोरोसिस और ओस्टियोपीनिया यह दोनों एक दूसरे से बेहद अलग हैं। और इन दोनों स्थितियों में हड्डियों की ताकत और उसके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इन दोनों के बीच का अंतर पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि ओस्टियोपोरोसिस और ओस्टियोपीनिया के बीच क्या अंतर है। साथ ही दोनों के जोखिम के बारे में भी जानेंगे। इसके लिए हमने जॉव्इंट केयर फिजियोथेरेपी एंड रेहाब सेंटर ग्रेटर नोएडा के डॉक्टर अंकुर नागर (Physiotherapist Dr. Ankur Naagar) से बात की है। पढ़ते हैं आगे...

ओस्टियोपीनिया और ओस्टयोपोरोसिस में अंतर

बता दें कि ओस्टियोपीनिया को ओस्टियोपोरोसिस का पहला चरण मानते हैं। अर्थात हड्डी की शुरुआती क्षति ओस्टियोपीनिया कहलाती है। हालांकि यह समस्या ओस्टियोपोरोसिस समस्या की तरह गंभीर नहीं होती है। ध्यान दें कि ओस्टियोपीनिया के कोई लक्षण नहीं होते हैं। जबकि ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त व्यक्ति कई लक्षणों का शिकार हो सकता है। अगर आंकड़ों के अनुसार दोनों के बीच का अंतर समझें तो जिन लोगों की बोन डेंसिटी - 1 और -2.5 की बीच है उन्हें ओस्टियोपीनिया होता है। जबकि जिन लोगों की बोन डेंसिटी -2.5 से कम है उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या है।

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किन लोगों को ओस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस का रहता है जोखिम?

1 - जो व्यक्ति धूम्रपान का सेवन करते हैं।

2 - जो व्यक्ति शराब का सेवन करते हैं।

3 - जिन व्यक्ति के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं।

4 - जो व्यक्ति स्टेरॉयड ऐसी दवाओं का सेवन करते हैं।

5 - जो लोग थायराइड जैसी समस्या का शिकार हो जाते हैं।

6 - मेनोपॉज के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है।

7 - ऐसी लाइफ़स्टाइल जिनमें शारीरिक गतिविधियां नहीं है, उनमें इस तरीके की समस्या हो सकती है।

8 - 35 वर्ष से अधिक लोग में इसका खतरा बढ़ सकता है।

ओस्टियोपोरोसिस और ओस्टियोपीनिया की समस्या से बचाव

अगर ओस्टियोपीनिया की समस्या को शुरुआत में ही रोका जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर समस्या बढ़ने से रुक सकती है। हालांकि ओस्टियोपीनिया के लक्षण नजर नहीं आते हैं लेकिन अपनी डाइट और दिनचर्या में बदलाव करके इसके नुकसान को रोका जा सकता है।

1 - अगर आप धूम्रपान का सेवन करते हैं तो इसे तुरंत बंद करें।

2 - व्यक्ति शराब का सेवन सीमित मात्रा में करे।

3 - अपनी डाइट में कैल्शियम के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स और विटामिंस को जरूर जोड़ें।

4  - अपनी दिनचर्या में उन व्यायामों को जोड़े जिससे शरीर सक्रिय रहे और आपका वजन नियंत्रित रहे। इसके लिए एक्सपर्टी की मदद लें।

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ओस्टियोपीनिया और ओस्टियोपोरोसिस की समस्या होने पर क्या खाएं?

1 - अपने आहार में उन चीजों को जोड़ें जिनके ने भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है साथी विटामिन डी भी भरपूर मात्रा में मौजूद है इसके अलावा कम वसा वाले डेहरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध दही पनीर आदि भी हड्डी की समस्याओं को दूर करने में उपयोगी है।

2 - कैल्शियम के लिए व्यक्ति अपनी डाइट में सरसों का साग, कोलार्ड साग, ब्रोकली, शलजम का साग, भिंडी, सिंहपर्णी साग आदि को जोड़ सकते हैं।

3 - पोटेशियम के लिए व्यक्ति अपनी डाइट में किशमिश ,आलू, पालक, पपीता, संतरा, संतरे का रस, केला, आलू बुखारा, टमाटर आदि को अपनी डाइट में जोड़ सकता है।

4 - विटामिन सी के लिए व्यक्ति अपनी डाइट में हरी मिर्च, संतरा, अंगूर, ब्रोकली, स्ट्रॉबेरी, पपीता, लाल मिर्च, अनानास आदि को अपनी डाइट में जोड़ सकता है।

5 - मैग्नीशियम के लिए पालक, चुकंदर का साग, भिंडी, टमाटर, आलू, शकरकंद, किशमिश आदि को अपनी डाइट में जोड़ सकता है।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि ओस्टियोपोरोसिस की समस्या और ओस्टियोपीनिया की समस्या दोनों ही हड्डी से संबंधित समस्याएं हैं। लेकिन यदि ओस्टियोपीनिया की समस्या को पहले ही रोका जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से बचा जा सकता है।

 इस लेख में फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

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