कंप्यूटर और मोबाइल से चिपके रहना बढ़ाता है माइग्रेन का दर्द, जानें वर्क फ्रॉम होम के नुकसान से जुड़ा ये शोध

अमेरिकी माइग्रेन फाउंडेशन के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि माइग्रेन से 85 से 90 प्रतिशत लोगों को कंप्यूटर और मोबाइल की ब्लू लाइट से परेशानी है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Oct 14, 2020Updated at: Oct 14, 2020
कंप्यूटर और मोबाइल से चिपके रहना बढ़ाता है माइग्रेन का दर्द,  जानें वर्क फ्रॉम होम के नुकसान से जुड़ा ये शोध

कोरोनावायरस महामारी के कारण ज्यादातर लोगों में चिंता और तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। वहीं कई बीमारियों का कारण तो वर्क फ्रॉम होम (Work From Home)है, जिसकी वजह से लोगों का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और मोटापा बढ़ रहा है। बैठे-बैठे जहां पाचन तंत्र धीमा पड़ गया है वहीं इससे अजीब सी थकान महसूस होती है। ये थकान न सिर्फ शरीर को परेशान कर रही है बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रही है। इन सबसे में सबसे बड़ा हाथ कंप्यूटर और मोबाइल है। दरअसल कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन से आने वाली रोशनी आपके मस्तिष्क पर एक खास असर डालती है। इसके कारण दिमाग के नर्व्स को परेशानी होती है, जो कि सिर दर्द को  (Smartphones and Headaches)बढ़ाता है।

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वहीं हाल ही में आई एक स्डटी की मानें, तो वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) के कारण लोगों में माइग्रेन की परेशानी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। दरअसल अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किए गए एक शोध की मानें, तो कोरोना महामारी के दौरान लोगों में वर्क फ्रॉम होम करने से माइग्रेन का दर्द बड़ी तेजी से बढ़ा। सर्वेक्षणों से पता चला है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 40 प्रतिशत से अधिक लोग अब घर से काम करते हैं, और उनमें से अधिकतर हो माइग्रेन की परेशानी हो रही है। 

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क्या कहता है ये शोध?

शोध की रिपोर्ट्स की मानें, तो महामारी शुरू होने के बाद से लोग तनाव, सिरदर्द और माइग्रेन की रिपोर्ट कर रहे हैं।  फिलाडेल्फिया में पेन मेडिसिन के विशेषज्ञ कैथरीन हैमिल्टन, की मानें जो कि इस रिपोर्ट के लेखक भी हैं, तो उनका कहना है कि  ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहना लोगों में माइग्रेन के दर्द को ट्रिगर कर रहा है। वहीं नील्सन पोलिंग कंपनी के अनुसार कोरोनोवायरस महामारी जैसी स्थिति में घर पर रहने के दौरान लोग पहले से 60 प्रतिशत अधिक स्क्रीन पर समय बीता रहे हैं। जिसमें कि औसत व्यक्ति एक दिन के दौरान डिजिटल उपकरणों पर 13 घंटे से अधिक समय बिता रहा है।

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स्क्रीन का ब्लू लाइट

इस अध्ययन की मानें, तो  नीली रोशनी  सिरदर्द या माइग्रेन को आसानी से ट्रिगर कर सकती है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि आंखों से मस्तिष्क तक एक विशिष्ट तंत्रिका मार्ग है, जहां ये रोशनी नसों को प्रभावित करती है। ये नर्व्स ब्लू लाइट के संपर्क में आने से सिर दर्द और हार्ट बीट को तेज कर देता है। इस तरह ये माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ता है, जिसमें आप प्रकाश संवेदनशीलता, चक्कर आना, मतली, और बहुत कुछ महसूस कर सकते हैं।

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वर्क फ्रॉम होम में स्क्रीन टाइम को कैसे करें कम?

वर्क फ्रॉम होम में स्क्रीन टाइम को कम करना थोड़ा मुश्किल काम है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमें हर वक्त अपने ऑफिस से जुड़ा होना होता है। वहीं फैमिली और फ्रैंड्स के साथ भी हम लोग ऐसे ही जुड़े रहते हैं। ऐसे में काम के बीच में भी हम ऐसी कुछ चीजों को कर सकते हैं, जिसके द्वारा ये स्क्रीन टाइम कर सकते हैं।

  • -वर्क फ्रॉम होम में आप काम के बीच में एक गैप तय रखें और उतनी देर कंप्यूटर और मोबाइल बंद कर लें।
  • -स्रकीन पर ब्राइटनेस फुल न रखें।
  • -काम के दौरान बीच-बीच में आइज एक्सरसाइज करें।
  • -आंखों को बार-बार धोते रहें इससे आपको आराम मिलेगा।
  • -अपने वर्क टेबल पर ग्रीन प्लांट्स लगाकर रखें। ये आंखों की

इस तरह से आप अपने स्क्रीन टाइम  को कम कर सकते हैं। वहीं एक खास बात ये भी है  माइग्रेन प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता के कारण तेजी से बढ़ सकता तो आप कोशिश करें कि कंप्यूटर पर काम करने वाले चश्मे ले लें और उसे लगा कर ही काम करें।

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