Fri Sep 11, 2026 | 09:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

कांच, पीतल, स्टील कौन से ट‍िफ‍िन में खाना रखना सुरक्ष‍ित है? डॉक्‍टर से जानें बेस्ट और खराब मटेरियल

कांच, पीतल या स्टील आख‍िर कौन सा टिफिन खाना रखने के लिए सबसे सुरक्षित है? गलत टिफिन बॉक्स से सेहत को नुकसान हो सकता है। डॉक्टर से जानें बेस्ट और खराब टिफिन मटेरियल, उनके फायदे और नुकसान ताक‍ि आप सही चुनाव कर सकें।

Tiffin Box Material Which Are Safe To Store Food: चाहे ऑफि‍स हो या स्‍कूल लोग या बच्‍चे घर से न‍िकलते समय टि‍फ‍िन जरूर ले जाते हैं, लेक‍िन क्‍या कभी आपने सोचा है क‍ि टिफिन बॉक्स का मटेरियल आपकी सेहत पर क्‍या असर डाल सकता है? हमारी भागदौड़ भरी जि‍ंंदगी में, खासकर ज्‍यादा ह्रयूम‍िड‍िटी वाले शहरोंं में, लंच पैक करने का सही तरीका आजमाना बहुत जरूरी है, लेकिन गलत डिब्बे में खाना रखने से खाने में हानिकारक केमिकल मिल सकते हैं, जिससे हार्मोन असंतुलन, पाचन की समस्या और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। एफडीए, डब्‍ल्‍यूएचओ और भारतीय फूड सेफ्टी नियमों पर आधारित वैज्ञानिक जानकारियों के अनुसार आइए सही और गलत ट‍िफ‍िन के विकल्प समझते हैं। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist, Clinical Director At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

सबसे अच्छे टिफिन बॉक्स मटेरियल- Best Tiffin Materials Which Are Safe, Durable & Health Friendly

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1. स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8- Stainless Steel Grades 304 Or 18/8

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि खाने के ल‍िए वे सबसे अच्‍छे मटेर‍ियल के तौर पर स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8 को देखते हैं। ये नींबू चावल या करी जैसे खट्टे खाने के साथ भी रिएक्शन नहीं करते, बीपीए-फ्री होते हैं और कोई जहरीला तत्व नहीं छोड़ते। स्‍टील के ट‍िफ‍िन में खाने का स्वाद नहीं बदलता, जंग नहीं लगती और साफ करना भी आसान होता है। जर्नल ऑफ फूड साइंंस की रिसर्च के अनुसार, अगर स्‍टील के ट‍िफ‍िन को ठीक से इस्‍तेमाल क‍िया जाए, तो इनमें से भारी धातुएं नहीं निकलतीं। भारतीय खाने के लिए लीक-प्रूफ और इंसुलेटेड स्टील टिफिन चुनें।

यह भी पढ़ें- क्या स्टेनलेस स्टील पानी की बोतल में बैक्टीरिया पनप सकता है? डॉक्टर से जानें सच्चाई

2. कांच के डिब्बे- Glass Containers

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इनमें खाना साफ दिखाई देता है और ये नॉन-पोरोस होते हैं यानी इस मटेर‍ियल में पानी, तेल या खाने के कण अंदर नहीं जाते, जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते। बोरोसिलिकेट ग‍िलास (Borosilicate Glass) माइक्रोवेव में सुरक्षित रहता है। सलाद या सब्जी दोबारा गर्म करने के लिए ये बेहतरीन हैं क्योंकि इनमें कोई केमिकल नहीं निकलता।

3. फूड ग्रेड सिलिकॉन- Food Grade Silicone

फूड ग्रेड सिलिकॉन हल्का, लचीला और 220°C तक गर्मी सहने वाला मटेर‍ियल होता है। इस मटेर‍ियल के ट‍िफ‍िन का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह नॉन-टॉक्सिक होता है, दाग नहीं पकड़ता और छोटे हिस्सों में खाना रखने के लिए अच्छा है। हमेशा 100% प्लैटिनम क्योर सिलिकॉन (Platinum Cured Silicone) ही लें।

सबसे खराब टिफिन मटेरियल- Worst Materials Of Tiffin To Avoid

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1. प्लास्टिक- Plastic

अक्सर प्लास्टिक वाले ट‍िफ‍िन में बीपीए, थैलेट्स (Phthalates) या स्टाइरीन होते हैं, जो गर्म करने या ऑयली और खट्टी चीजों के साथ भोजन में मिल जाते हैं। Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया एंडोक्राइन सोसाइटी (Endocrine Society) की स्टडी बताती है कि गर्मी से ये केमिकल जल्दी निकलते हैं जिससे मोटापा, बांझपन और हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं। सिंगल-यूज प्लास्टिक को रीसायकल करने से भी वह सुरक्षित नहीं बनता।

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2. बिना कोटिंग वाला एल्युमिनियम- Uncoated Aluminum

बिना कोटिंग वाला एल्युमिनियम खट्टे खाने के साथ रिएक्शन करके धातु जैसा स्वाद देता है और शरीर में एल्युमिनियम जमा हो सकता है। यह अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़ा माना जाता है। जरूरी हो तो केवल एनोडाइज्‍ड या कोटेड एल्युमिनियम ही लें।

3. मेलामाइन- Melamine

दिखने में यह मटेर‍ियल सिरेमिक जैसा लगता है, लेकिन गर्म खाने पर इसमें से फॉर्मेल्डिहाइड (CH₂O) या रासायनिक यौगिक निकलता है, जो अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के मुताब‍िक संभावित कैंसरकारक है। सस्ते टिफिन में इसका मौजूद होना आम बात है इसल‍िए इससे पूरी तरह से बचें।

हेल्दी लंच के लिए प्रो टिप्स- Pro Tips For Healthier Lunch

  • Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया आज ही स्टील या ग‍िलास का टिफिन अपनाएं। ये 200 से 500 रूपए में मिल जाते हैं और पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं।
  • इन ट‍िफ‍िन को हल्के साबुन से धोएं, खुरदरे स्क्रबर का इस्तेमाल न करें और प्लास्टिक को कभी माइक्रोवेव में न रखें।
  • दाल, सब्जी और साबुत अनाज जैसे संतुलित भोजन के साथ इस्तेमाल करें।

न‍िष्‍कर्ष:

डॉक्‍टर बताते हैं क‍ि खाने में ट‍िफि‍न के जर‍िए टॉक्सिन कम होने से पाचन और एनर्जी दोनों में सुधार आता है। इसल‍िए अच्‍छी सेहत के ल‍िए प्लास्टिक, ब‍िना कोट‍िंग वाले एल्युमिनियम, मेलामाइन से बचें और स्टेनलेस स्टील या ग‍िलास जैसे मटेर‍ियल के ट‍िफ‍िन का इस्‍तेमाल करें।

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FAQ

  • किस तरह का टिफिन सेहत के लिए अच्छा होता है?

    सेहत के ल‍िए स्‍टेनलेस स्‍टील या कांंच का ट‍िफिन सबसे अच्‍छा माना जाता है। ये खाने में केम‍िकल नहीं छोड़ते और रोजाना इस्‍तेमाल के ल‍िए सुरक्ष‍ित होते हैं।
  • पीतल के बर्तन में खाने के क्‍या फायदे हैं?

    पीतल के बर्तन में खाने से पाचन अच्‍छा रहता है। इसमें मौजूद सूक्ष्‍म खन‍िज इम्‍यून‍िटी को सपोर्ट करते हैं, लेक‍िन इनमें खट्टी चीजों का सेवन करने से बचना चाह‍िए।
  • क‍िस बर्तन में खाना पकाना सुरक्ष‍ित है?

    खाना पकाने के ल‍िए स्‍टेनलेस स्‍टील और कास्‍ट आयरन सुरक्ष‍ित माने जाते हैं। ये गर्म होने पर जहरीले केम‍िकल नहीं छोड़ते इसल‍िए सेहत के ल‍िए अच्‍छे माने जाते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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