Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

मेरी मां साल भर के लिए स्टोर करती हैं आंवला, पर क्या वाकई यह सेहतमंद है? एक्सपर्ट से जानें इसका असली पोषण

बचपन से देख रही हूंं जब भी सर्दि‍यां आती हैं मेरी मां आंंवला को स्‍टोर करके रख लेती हैं ताक‍ि उसका इस्‍तेमाल सालभर क‍िया जा सके। आंवला में व‍िटाम‍िन सी के साथ कई ऐसे पोषक तत्‍व होते हैं ज‍िसके कारण मां हमेशा आंवला खाने की सलाह देती हैं। जानते हैं इसे स्‍टोर करना क‍ितना सुरक्ष‍ित है?

आयुर्वेद की भाषा में आंवला को रसायन कहा जाता है क्‍योंक‍ि इसमें कई ऐसे गुण होते हैं जो सेहत के ल‍िए बहुत लाभकारी माने जाते हैं। मैंने बचपन से ही अपने घर में बड़ोंं से आंवला के फायदे (Amla Ke Fayde) सुने हैं। मेरे दादाजी को डायब‍िटीज थी और वह इसे खाते थे और हमें भी खाने की सलाह देते थे। सर्दि‍योंं के द‍िनों में मां की गोद में बैठकर मैं आंंवला खाया करती थी। ऐसा नहीं है क‍ि आंवला सर्दि‍यों में म‍िलता है, तो इसे गर्मि‍यों में नहीं खा सकते। मां आंवले को सर्दि‍यां खत्‍म होने से पहले सालभर के ल‍िए स्‍टोर करके रख लेती हैं ताक‍ि इसका इस्‍तेमाल सालभर क‍िया जा सके। आजकल हम सुन रहे हैं क‍ि क‍िसी भी चीज को प्र‍िजर्व या स्‍टोर करने से ज्‍यादा उसे ताजा खाना फायदेमंद होता है। ऐसे में क्‍या आंवला को सालभर स्‍टोर करके खाना सुरक्ष‍ित है? आइए जानते हैं इस पर मेरा अनुभव और एक्‍सपर्ट से जानते हैं उनकी राय। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

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सालभर के ल‍िए आंवला का पाउडर तैयार करती हैं मेरी मांं

मेरे घर के क‍िचन में एक कांच की बर्नी है ज‍िसमें आंवला का पाउडर हमेशा भरा हुआ द‍िखता है। मां कहती हैं क‍ि इसे दवा की तरह इस्‍तेमाल करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि आंवला में कई ऐसे गुण होते हैं जो हमें बीमारी और इंंफेक्‍शन से बचा सकते हैं। जैसे ही सर्द‍ियांं जाने वाली होती हैं, वैसे ही मां सब्‍ज‍ी वाले भाई से ढेर सारा आंवला मंगवा लेती हैं। फ‍िर शुरू होता है उसे धोकर साफ करके धूप में सुखाने का स‍िलस‍िला। इसके बाद मां आंवला का पाउडर बनाकर उसे स्‍टोर करती हैं। अगली ठंड आने तक घर में पर्याप्‍त आंवला पाउडर रहता है।

सब्‍जी में होता है आंवला पाउडर का इस्‍तेमाल

मां स्‍टोर क‍िए हुए आंवला पाउडर को हमें ख‍िलाने के ल‍िए बड़ी चालाकी से इसे खाने में म‍िला देती हैं। कभी सब्‍जी में आंवला पाउडर होता है, तो कभी पराठे में डाल देती हैं। सर्दि‍यों में, तो मैं और मेरी बहन मां की डांट से बच नहीं पाते। हमें खट्टा आंवला द‍ि‍नभर में खाना ही होता है। मांं के डर से आंवला छुपा भी दो, तो उन्‍हें पता नहीं कैसे पता चल जाता है और वो हमें फ‍िर ताजा आंवला खाने के ल‍िए‍ देती हैं। आप सोच रहे होंगे क‍ि आंवला खाने पर इतना जोर क्‍यों है? दरअसल मेरी बुआ डॉक्‍टर हैं और मेरे दादाजी को आयुर्वेद का अच्‍छा ज्ञान था। मेरी बुआ और दादाजी हमेशा कहते थे क‍ि आंवला लगभग सभी शारीर‍िक समस्‍याओं को दूर करने का काम करता है, आंवला के फायदे अन‍ग‍िनत हैं इसल‍िए इसे जरूर खाना चाह‍िए।

क्‍या वाकई आंवला को सालभर के ल‍िए स्‍टोर क‍िया जाना चाह‍िए?

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Ayurveda Expert, Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि आंवला को सर्द‍ियों के ल‍िए स्‍टोर क‍िया जा सकता है। आंवला पाचन में मदद करता है, इससे खून साफ होता है, आंवला एंटी-एज‍िंग भी है और अगर आप आंवला पाउडर या चूर्ण का इस्‍तेमाल करते हैं, तो उसकी तासीर ठंडी होती है। आंवला को सालभर इस्‍तेमाल करने के ल‍िए उसे पाउडर फार्म में स्‍टोर करें। स्‍टोर करने के ल‍िए पहले उसे छांव में ड्राई कर लें फ‍िर पाउडर तैयार करें। साथ ही आंवला के पाउडर को एयरटाइट कंटेनर में स्‍टोर करें। Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि आंवला का पाउडर, जूस के मुकाबले 50 से 60 प्रत‍िशत ज्‍यादा फायदेमंद होता है। आंवले का मुरब्‍बा भी बना सकते हैं, हालांक‍ि वह बस फाइबर की तरह काम करेगा जो आंतों की सेहत के ल‍िए फायदेमंद होता है।

आंवला के जूस को स्‍टोर न करें

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Ayurveda Expert, Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि आंवला को जूस के फार्म में ब‍िल्‍कुल स्‍टोर न करें। अगर उसमें प्रि‍जर्वेट‍िव भी म‍िला लें, तो भी वो सेहत के ल‍िए हान‍िकारक ही होता है इसल‍िए आंवला के जूस को स्‍टोर करने से बचें। आंवला का पैक्‍ड जूस जो बोतलों में बाजार में म‍िलता है उसमें बॉइल्‍ड एक्‍सट्रैक्‍ट होते हैं जो सेहत के ल‍िए फायदेमंद नहीं है इसल‍िए आंवला का जूस हमेशा ताजा और घर पर बनाकर ही पीना चाह‍िए।

ताजा आंवला पांच से छह द‍िन में खा लें

नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) के अंतगर्त काम करने वाली संस्‍था नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (NABCONS) के मुताब‍िक, आंवला (Indian Gooseberry) में बहुत ज्‍यादा नमी होती है इसल‍िए यह जल्‍दी खराब हो जाता है। अगर आप इसे ताजा पेड़ से तोड़कर खा रहे हैं, तो पांच से छह द‍िनों में ही इसे खा लेना सुरक्ष‍ित है।

न‍िष्‍कर्ष:

मेरे अनुभव और एक्‍सपर्ट की सलाह से यह पता चलता है कि‍ आंवला को सालभर के ल‍िए स्‍टोर करके इस्‍तेमाल क‍िया जा सकता है, लेक‍िन इसे पाउडर के रूप में स्‍टोर करें, आंवला के जूस को स्‍टोर करना सेहत के ल‍िए हान‍िकारक हो सकता है। आंवला का मुरब्‍बा भी बना सकते हैं, लेक‍िन उसमें इतने गुण नहीं होंगे ज‍ितना आंवला पाउडर में होते हैं।

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FAQ

  • आंंवला खाने के क्‍या फायदे हैं?

    आंवला का सेवन करने से हेयर फॉल कंट्रोल होता है, त्‍वचा के दाग-धब्‍बे दूर होते हैं, इम्‍यून‍िटी बढ़ती है, शुगर लेवल कंट्रोल होता है, आंवला के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इंफेक्‍शन से बचाव करते हैं।
  • क्‍या द‍िल के मरीज आंवला खा सकते हैं?

    हां द‍िल के मरीज आंवला का सेवन कर सकते हैं। ह्रदय स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए आंवला फायदेमंद होता है। यह बैड कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है और यह धमन‍ियों में प्‍लाक जमने के खतरे को भी कम करता है ज‍िससे ह्रदय रोगोंं से बचाव होता है।  
  • आंवला खाने का सही तरीका क्‍या है?

    आंवला को हमेशा ताजा ही खाना चाह‍िए। अगर इसे स्‍टोर करके खा रहे हैं, तो आंवला का पाउडर खाएं। आंवला जूस का सेवन ज्‍यादा फायदेमंद नहीं होता वह बस फाइबर की तरह काम करता है। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 10, 2026 09:07 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 10, 2026 09:07 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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