Doctor Verified

पंचकर्म करवाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? जानें एक्सपर्ट की राय

आज के समय में जब बीमारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचार की ओर लौट रहे हैं। यहां जानिए, पंचकर्म के लिए कौन सा महीना सबसे अच्छा है?
  • SHARE
  • FOLLOW
पंचकर्म करवाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? जानें एक्सपर्ट की राय


आज के दौर में जब लोग दवाइयों के साइड इफेक्ट्स और एलोपैथिक इलाज की सीमाओं से परेशान हो चुके हैं, तब भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद एक बार फिर लोकप्रिय हो रही है। आयुर्वेद सिर्फ एक इलाज पद्धति नहीं बल्कि एक लाइफस्टाइल है, जो शरीर, मन और आत्मा, तीनों के संतुलन पर आधारित है। इसमें खानपान, दिनचर्या, मौसम के अनुसार रहन-सहन और विशेष चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शामिल हैं। आयुर्वेद में ऐसी ही एक प्राचीन और प्रभावशाली प्रक्रिया है पंचकर्म, जिसे शरीर के अंदर जमे हुए विषैले तत्वों यानी टॉक्सिन को नेचुरल तरीके से बाहर निकालने के लिए किया जाता है। पंचकर्म यानी पांच तरह की शुद्धिकरण प्रक्रियाएं—वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण। यह न केवल शारीरिक रोगों को ठीक करता है, बल्कि मानसिक तनाव, थकावट और इम्यूनिटी से जुड़ी समस्याओं में भी बेहद लाभकारी माना गया है।

पंचकर्म की प्रक्रिया किसी भी समय नहीं की जा सकती। आयुर्वेद इस बात पर जोर देता है कि पंचकर्म ऋतु, यानी मौसम के अनुसार ही कराया जाना चाहिए। मौसम के बदलाव के साथ-साथ शरीर के दोष (वात, पित्त और कफ) भी असंतुलित होते हैं, इसलिए पंचकर्म का समय इन दोषों के शुद्धिकरण के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल होता है कि पंचकर्म करवाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? किस ऋतु में कौन सा पंचकर्म लाभकारी होता है? और किन लोगों को यह नहीं करवाना चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से बात की-

पंचकर्म के लिए सबसे उपयुक्त मौसम कौन सा है? - Which Season Is Best For Panchakarma

आयुर्वेदाचार्य डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, पंचकर्म हर व्यक्ति के दोष (वात, पित्त, कफ), बल, आयु और मौसम के अनुसार किया जाना चाहिए। ऋतुचक्र के आधार पर पंचकर्म की प्रक्रिया और उसके प्रकारों का चयन किया जाता है ताकि शरीर पर उसका अधिकतम सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।

1. वमन

पंचकर्म की प्रमुख प्रक्रियाओं में से एक है वमन, जिसमें उल्टी के जरिए शरीर से कफ दोष को बाहर निकाला जाता है। डॉ. श्रेय बताते हैं कि वमन से पहले व्यक्ति को स्नेहन (तेलों से अभ्यंग) और स्वेदन (स्टीम थेरेपी) दिया जाता है, ताकि दोषों को कोष्ठ (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट) में लाया जा सके। इसके बाद वमन कराया जाता है, जिससे कफ बाहर निकलता है।

इसे भी पढ़ें: इन 5 परिस्थितियों में नहीं करवाना चाहिए पंचकर्म, आयुर्वेदाचार्य ने खुद बताया इसका कारण

बसंत ऋतु (फरवरी से अप्रैल) वमन के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे पहले आने वाली शिशिर और हेमंत ऋतु में कफ शरीर में जम जाता है, विशेषकर छाती और श्वसन तंत्र में। बसंत में तापमान थोड़ा बढ़ता है और यह कफ को पिघलाने और बाहर निकालने (vaman karne ke fayde) के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि वमन हर किसी को नहीं कराना चाहिए। डॉ. श्रेय के अनुसार, वमन केवल उन्हीं व्यक्तियों को करवाना चाहिए जिनका शरीर बलवान हो, उनकी उम्र अनुकूल हो और मौसम भी अनुकूल हो। कमजोर, बहुत वृद्ध या गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को इससे बचना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी प्लानिंग से पहले आपको पंचकर्म क्यों कराना चाहिए? जानें डॉ. चंचल शर्मा से

2. विरेचन

विरेचन शरीर से पित्त दोष को बाहर निकालती है। इसमें विशेष प्रकार की जड़ी-बूटियों से बनी चटनी, चूर्ण या घृत दिए जाते हैं, जिससे शौच के माध्यम से पित्त शरीर से बाहर निकलता है। विरेचन को वर्षा ऋतु (जुलाई–अगस्त) (What is the best season for Panchakarma treatment) में करना सर्वोत्तम माना गया है। इन मौसमों में पित्त का प्रकोप अधिक होता है और शरीर में गरम तत्व अधिक बढ़ जाते हैं। विरेचन से यह संतुलित होता है।

डॉ. श्रेय कहते हैं कि विरेचन को ज्यादातर लोग करा सकते हैं, लेकिन बहुत छोटे बच्चों, बुजुर्गों या बहुत कमजोर लोगों में यह हल्के रूप में या बिलकुल नहीं कराया जाता है। विरेचन से पेट साफ होता है, त्वचा निखरती है और पाचन शक्ति (panchakarma karne ke fayde) बेहतर होती है।

3. बस्ती

तीसरी प्रक्रिया है बस्ती, जो शरीर से वात दोष को बाहर निकालती है। इसमें औषधीय तेलों या काढ़ों को गुदा मार्ग से शरीर में प्रवेश कराया जाता है। डॉ. श्रेय के अनुसार, बस्ती कई प्रकार की होती है, जो व्यक्ति के दोष और बीमारी के आधार पर तय की जाती है। शरद ऋतु (सितंबर–अक्टूबर) बस्ती के लिए सबसे उत्तम होती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस समय वात दोष शरीर में बढ़ने लगता है। वात संबंधी रोग जैसे जोड़ दर्द, पीठ दर्द, कब्ज, अनिद्रा आदि इस समय उभरते हैं और बस्ती से इनका प्रभावी इलाज संभव है।

Which season is best for Panchakarma

पंचकर्म करवाने से पहले ध्यान दें ये बातें

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि पंचकर्म कोई सामान्य स्पा ट्रीटमेंट नहीं है, बल्कि एक गंभीर आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है जिसे करवाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • पंचकर्म हमेशा किसी अनुभवी आयुर्वेदाचार्य या प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक की निगरानी में ही करवाना चाहिए।
  • शरीर की ताकत, आयु, रोग की अवस्था और मौसम के अनुसार पंचकर्म का प्रकार चुनें।
  • पंचकर्म के दौरान और बाद में विशेष आहार-विहार (डाइट और जीवनशैली) का पालन करना आवश्यक होता है।
  • इसके बाद शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है, डिटॉक्सिफिकेशन होता है और मानसिक शांति मिलती है।

निष्कर्ष

पंचकर्म एक प्राचीन और प्रभावशाली चिकित्सा पद्धति है, लेकिन इसका अधिकतम लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय, सही व्यक्ति और सही विधि से किया जाए। हर ऋतु का अपना प्रभाव होता है और आयुर्वेद इसे बारीकी से समझता है। इसलिए यदि आप पंचकर्म कराने का विचार कर रहे हैं, तो मौसम और अपने शरीर की स्थिति को ध्यान में रखकर ही निर्णय लें। इससे न केवल शरीर शुद्ध होगा, बल्कि इम्यूनिटी और मानसिक संतुलन भी बेहतर होगा।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • पंचकर्म करवाने का सही मौसम कौन सा होता है?

    आयुर्वेद के अनुसार पंचकर्म करवाने का सही मौसम व्यक्ति के दोष और प्रक्रिया के अनुसार बदलता है। जैसे वमन के लिए बसंत ऋतु, विरेचन के लिए वर्षा तथा बस्ती के लिए शरद ऋतु सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं।
  • क्या गर्मियों में पंचकर्म करवाना सही होता है?

    गर्मियों में विशेष सावधानी के साथ पंचकर्म करवाया जा सकता है, लेकिन यह मौसम पित्त दोष के अधिक सक्रिय होने का समय होता है। इसलिए कुछ प्रक्रियाएं जैसे विरेचन इस मौसम में सीमित मात्रा में की जा सकती हैं। डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
  • क्या पंचकर्म हर किसी को करवाना चाहिए?

    नहीं, पंचकर्म हर किसी को नहीं करवाना चाहिए। यह व्यक्ति की आयु, शारीरिक क्षमता, रोग, मौसम और मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। कमजोर, बुजुर्ग या गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह से ही पंचकर्म कराना चाहिए।

 

 

 

Read Next

Haldi Doodh Ke 5 Fayde: हड्डियों को बनाए मजबूत और मांसपेशियों को करे हील

Disclaimer

TAGS