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Medically Reviewed by Dr Chandni Tugnait , Transformation Coach and Psychotherapist

नींद में घबराकर उठते हैं? ये आम बात नहीं, हो सकता है मेंटल प्रॉब्लम का संकेत

कई लोगों को रात में अचानक घबराकर नींद खुल जाना, दिल तेज धड़कना, पसीना आना या किसी अनजाने डर का महसूस होना आम लगता है। यहां जानिए, नींद में बार-बार डर जाना किस मेंटल प्रॉब्लम का संकेत है?
नींद में घबराकर उठते हैं? ये आम बात नहीं, हो सकता है मेंटल प्रॉब्लम का संकेतनींद में घबराकर उठते हैं? ये आम बात नहीं, हो सकता है मेंटल प्रॉब्लम का संकेत

रात का समय शरीर और दिमाग दोनों के लिए आराम का होता है लेकिन सोचिए, अगर यही समय डर, घबराहट और बेचैनी से भर जाए तो? कई लोग ऐसे हैं जिनकी नींद अचानक टूट जाती है, दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है, पसीना आने लगता है और मन में एक अजीब-सा डर बैठ जाता है, जबकि आसपास कोई खतरा मौजूद नहीं होता। अक्सर लोग इसे बुरा सपना, थकान या दिनभर के तनाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन जब यह समस्या बार-बार होने लगे, तब यह सिर्फ नींद से जुड़ी परेशानी नहीं रह जाती। इस लेख में गेटवे ऑफ हीलिंग के फाउंडर और डायरेक्टर, कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr Chandni Tugnait, MD (A.M) Psychotherapist, Life Alchemist, Coach & Healer , Founder & Director, Gateway of Healing) से जानिए, नींद में बार-बार डर जाना किस मेंटल प्रॉब्लम का संकेत है?

नींद में बार-बार डर जाना किस मेंटल प्रॉब्लम का संकेत है? - What mental health problem do sleep terrors indicate

डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, नींद में बार-बार डर जाना शरीर और दिमाग दोनों के असंतुलन की ओर इशारा करता है, जिसे समय रहते समझना और संभालना जरूरी है। डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं कि यह समस्या अक्सर मानसिक तनाव से जुड़ी होती है। सबसे आम कारणों में एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) शामिल है। ऐसे लोगों का दिमाग सोते समय भी अलर्ट मोड में रहता है, जिससे हल्की-सी बेचैनी भी डर का रूप ले लेती है। इसके अलावा पैनिक डिसऑर्डर में व्यक्ति को अचानक डर, सांस घुटना, दिल की तेज धड़कन और मौत का भय महसूस हो सकता है, जो नींद के दौरान भी ट्रिगर हो सकता है।

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  • कई लोग नाइट टेरर और बुरे सपनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग समस्याएं हैं।
  • डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, नाइट टेरर में व्यक्ति अचानक चीखते हुए उठ सकता है, लेकिन उसे सुबह कुछ याद नहीं रहता।
  • यह समस्या बच्चों के साथ-साथ वयस्कों में भी देखी जा रही है। वहीं बुरे सपने याद रहते हैं और डर का कारण स्पष्ट होता है।
  • बार-बार नाइट टेरर होना मानसिक तनाव, नींद की कमी और डिप्रेशन से जुड़ा हो सकता है।

क्या डिप्रेशन भी इसकी वजह हो सकता है?

डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, डिप्रेशन भी नींद में डरने की एक बड़ी वजह हो सकता है। डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं कि डिप्रेशन में व्यक्ति का दिमाग नकारात्मक विचारों से भरा रहता है, जो नींद के दौरान भी एक्टिव रहते हैं। ऐसे में नींद पूरी नहीं हो पाती और बार-बार डरकर जागने की समस्या होने लगती है। अगर इसके साथ सुबह उदासी, चिड़चिड़ापन, थकान और किसी काम में मन न लगना भी हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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डॉक्टर की सलाह

अगर हफ्ते में दो-तीन बार या उससे ज्यादा बार डरकर नींद खुल रही हो, नींद पूरी न हो पा रही हो और दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन या घबराहट बनी रहती हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, शुरुआती स्टेज में काउंसलिंग, लाइफस्टाइल सुधार और जरूरत पड़ने पर दवाओं से इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

नींद में बार-बार डर जाना सिर्फ एक साधारण नींद की समस्या नहीं, बल्कि यह एंग्जायटी, पैनिक डिसऑर्डर, डिप्रेशन जैसी मेंटल प्रॉब्लम्स का संकेत हो सकता है। डॉ. चांदनी तुगनैत की मानें तो समय रहते इसके कारणों को समझना और सही इलाज लेना बेहद जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो शर्म या डर के बिना एक्सपर्ट से सलाह लेना ही सबसे सही कदम है।

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FAQ

  • नींद में अचानक डर जाने का क्या कारण है?

    इसकी सबसे आम वजह तनाव, चिंता, पैनिक अटैक, डिप्रेशन और दिनभर दिमाग पर पड़ा मानसिक दबाव माना जाता है।
  • नींद की कमी के मानसिक प्रभाव क्या हैं?

    नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, थकान, ध्यान लगाने में परेशानी और एंग्जायटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  • गहरी नींद में सोने के लिए क्या करें?

    नियमित सोने-जागने का समय, सोने से पहले स्क्रीन से दूरी, हल्का भोजन, तनाव कम करने की तकनीक और शांत वातावरण अच्छी नींद में मदद करते हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Jan 07, 2026 17:40 IST

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