Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

रात में कम दिखाई देना सिर्फ विटामिन A की कमी नहीं, इन समस्याओं का भी हो सकता है संकेत

जिन लोगों को दिन में सही दिखता है, लेकिन रात में धुंधला दिखने लगता है, तो इसका मतलब है कि उन्हें रतौंधी यानी नाइट ब्लाइंडनेस (Night Blindness) है। रात में कम दिखाई देने का कारण ये 5 बीमारियां हो सकती है, जिसे इग्नोर नहीं करना चाहिए।

कुछ लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्हें दिन में तो साफ दिखाई देता है, लेकिन शाम होते ही चीजें धुंधली नजर आने लगती हैं। अंधेरे कमरे में जाने के बाद आंखों को देखने में काफी समय लगता है या रात में गाड़ी चलाते समय सड़क और आसपास की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। ऐसे लोगों को अगर बार-बार यह समस्या हो रही है, तो इसे आंखों की थकान या विटामिन A की कमी मानकर नजरअंदाज न करें।

इस कंडीशन को रतौंधी यानी नाइट ब्लाइंडनेस (Night Blindness) कहते हैं। अक्सर इसे विटामिन A से जोड़कर देख लिया जाता है, लेकिन इसका कारण आंखों से जुड़ी कुछ बीमारियां भी हो सकती हैं। इसलिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Opthamologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की।

विटामिन A को रतौंधी का कारण क्यों माना जाता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विटामिन A की कमी से आंखों से जुड़ी समस्या रतौंधी (Night blindness) हो सकती है। यह आमतौर पर विकासशील देशों में प्रेग्नेंसी के दौरान आम है। जब विटामिन A गंभीर रूप से कम होता है, तो यह कॉर्निया को सुखाकर रेटिना को नुकसान पहंचा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल ढाई लाख से लेकर पांच लाख बच्चे विटामिन A की कमी के चलते अंधे हो जाते हैं।

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “मेडिकल भाषा में इसे निक्टालोपिया (Nyctalopia) कहते हैं। हालांकि, यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन अन्य बीमारियों के कारण हो सकता है। आंख के रेटिना में मौजूद रॉड सेल्स कम रोशनी में देखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन A से बनने वाला 11 CIS Retinal आंखों के विजुअल पिगमेंट रोडोपसिन का जरूरी हिस्सा है। इसकी कमी होने पर आंख की अंधेरे में देखने और रोशनी के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।”

रतौंधी होने से जुड़ी 5 बीमारियां

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “हालांकि, रतौंधी यानी नाइट ब्लाइंडनेस (Night Blindness) होने का मुख्य कारण चाहे विटामिन A हो, लेकिन इसके साथ यह बात समझना भी जरूरी है कि हर व्यक्त्ति को रात में कम दिखाई देने का कारण सिर्फ विटामिन A की कमी नहीं हो सकता है। रतौंधी होने के ये कारण भी हो सकते हैं।”

night blindness

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रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “ अगर किसी को लंबे समय से रात में देखने में परेशानी हो रही हो और समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही हो, तो रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (Retinitis Pigmentosa) भी हो सकता है। यह रेटिना से जुड़ी जेनेटिकल समस्या है, जिसमें रेटिना के रोशनी से जुड़े सेल्स धीरे-धीरे प्रभावित हो सकते हैं। कई मरीजों में रात में देखने में परेशानी शुरुआती लक्षणों में से एक होती है। अगर समय पर इलाज न हो, तो मरीज को आंखों के किनारे की चीजें देखने की क्षमता भी हो सकती है।”

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि अगर परिवार में किसी को रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा से जुड़ी बीमारी है और व्यक्ति को कम उम्र से ही रात में देखने में परेशानी होती है, तो इसे खासतौर पर गंभीरता से लेना चाहिए।

2. मोतियाबिंद

Dr. Purendra Bhasin का कहना है, “मोतियाबिंद आंखों के नेचुरल लेंस को धुंधला कर देता है। इस कारण सिर्फ दिन में ही नहीं, बल्कि कम रोशनी में देखने में भी परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को रात में गाड़ी चलाते समय सामने आने वाली रोशनी आंखे चौंधिया जाती है। अगर रात में देखने की परेशानी धीरे-धीरे बढ़ रही है और साथ में नजर धुंधली रहती है, तो आंखों की जांच कराना जरूरी है।”

3. मायोपिया

Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, जिन लोगों की नजदीक की नजर (हाई मायोपिया) कमजोर है और उन्हें कम रोशनी में देखने में परेशानी महसूस हो रही है, तो इसका कारण कम रोशनी में पुतली फैलने पर ऑप्टिकल ब्लर ज्यादा महसूस हो सकता है। इसलिए अगर रात में देखने में परेशानी होती है, तो सिर्फ विटामिन A के चेकअप के अलावा, आंखों का नंबर भी सही तरीके से चेक कराना जरूरी है।

4. डायबिटिक रेटिनोपैथी

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “जिन डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं रहता, उनमें रेटिना की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अगर रात में देखने में अचानक या धीरे-धीरे परेशानी बढ़ती महसूस हो, तो रतौंधी की जांच कराना महत्वपूर्ण है।”

5. ग्लूकोमा

American Academy of Ophthalmology के मुताबिक, जिन लोगों को रात में या कम रोशनी में देखने में समस्या होती है, उसका कारण ग्लूकोमा भी हो सकता है। इसमें आंख और दिमाग को जोड़ने वाली ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। ऐसा होने पर मरीज को रात को कम दिखाई दे सकता है। अगर लंबे समय से यह हो रहा है, तो मरीज को ग्लूकोमा की जांच करानी चाहिए।

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रतौंधी की जांच कैसे होती है?

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) का कारण जानने के लिए डॉक्टर पहले मरीज की पूरी मेडिकल और आंखों से जुड़ी हिस्ट्री देखते हैं। इसके बाद जरूरत पड़ने पर आंखों से जुड़े ये चेकअप कराए जाते हैं।

  • विजुअल एक्यूिटी टेस्ट
  • आंखों की पुतली फैलाकर रेटिना की जांच,
  • रेटिनल टेस्ट
  • इलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी
  • विटामिन A की कमी होने पर ब्लड टेस्ट

निष्कर्ष
रतौंधी के कारण का पता लगने के बाद डॉक्टर उस बीमारी का इलाज करते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मरीज को समय पर अपने लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। खुद ही विटामिन A की टैब्लेट नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इसका कारण सिर्फ विटामिन A की कमी नहीं होती। अगर रात में देखने की समस्या के साथ साइड में देखने में भी परेशानी हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

All Image Credit: Magnific



FAQ

  • क्या ग्लूकोमा (काला मोतिया) की दवाओं से भी रात में धुंधला दिख सकता है?

    हां, ग्लूकोमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ आई-ड्रॉप्स आंखों की पुतली को सिकोड़ देती हैं, जिससे कम रोशनी में आंख के भीतर पर्याप्त प्रकाश नहीं पहुंच पाता और रात में देखना मुश्किल हो जाता है।
  • लेसिक आई सर्जरी के बाद रात में हेज या रोशनी का फैलना सामान्य है?

    लेसिक सर्जरी के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक रात में लाइट के आसपास छल्ले या चौंध लगना आम है। हालांकि, अगर यह समस्या बनी रहे, तो आई-स्पेशलिस्ट से जांच करानी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 11, 2026 15:56 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin

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