Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

विटामिन A की कमी से रतौंधी की समस्या क्यों और कैसे होती है? डॉक्टर से जानें

शरीर में विटामिन ए की कमी के कारण लोगों को आंखों के कमजोर होने और नाइट ब्लाइंडनेस जैसी समस्याएं होती हैं। आइए जानें ये समस्या क्यों और कैसे होती हैं?

कई लोगों को दिन में सब कुछ नॉर्मल दिखाई देता है, लेकिन शाम होते-होते व्यक्ति को कम रोशनी में देखने में परेशानी होने लगती है। कई लोग इस समस्या हो नॉर्मल थकान या बढ़ती उम्र के कारण होने वाली परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी या आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का एक जरूरी संकेत हो सकता है। ऐसे में आंखों से जुड़ी किसी भी परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में आइए Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital से जानें विटामिन ए की कमी के कारण नाइट ब्लाइंडनेस कैसे और क्यों होती है?

विटामिन ए की कमी से होती है नाइट ब्लाइंडनेस

डॉ. अरविंद के अनुसार, आंखों का अच्छा स्वास्थ्य सिर्फ चश्मा लगाने या आंखों की सफाई तक सीमित नहीं है। सही पोषण भी उतना ही जरूरी होता है। खासतौर पर विटामिन A आंखों के नॉर्मल कामकाज में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर सबसे पहले कम रोशनी में देखने में परेशानी शुरू हो सकती है। विटामिन ए की कमी नाइट ब्लाइंडनेस का सबसे आम कारण है, जिसे मेडिकल भाषा में निक्टालोपिया (Nyctalopia) कहा जाता है।

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आंखें कम रोशनी में कैसे देख पाती हैं?

डॉ. अरविंद का कहना है, इस समस्या की वजह को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आंखें रोशनी को कैसे महसूस करती हैं। रोशनी को महसूस करने और आंखों के सामान्य रूप से काम करने के लिए आंखों की रोशनी के प्रति सेंसिटिव लेयर, जिसे रेटिना कहते हैं, उसे विटामिन ए की जरूरत होती है। विटामिन A 'रोडोप्सिन' (rhodopsin) बनाने में अहम भूमिका निभाता है। यह रेटिना की रॉड सेल्स में पाया जाने वाला एक खास तरह का फोटोपिगमेंट है।

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, हमारी आंख के पीछे एक रोशनी के प्रति सेंसिटिव लेयर (रेटिना) होती है। यही लेयर आंखों में आने वाली रोशनी को पहचानकर उसे ब्रेन तक पहुंचाने का काम करती है। देखने के लिए आंखें दो तरह के रिसेप्टर्स का इस्तेमाल करती हैं -

  • कोन्स (Cones) - कोन्स तेज रोशनी और रंगों को पहचानने में मदद करती हैं।
  • रॉड्स (Rods) - रॉड कम रोशनी या अंधेरे में देखने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

कम रोशनी में सही तरीके से देखने के लिए रॉड सेल्स का हेल्दी रहना जरूरी होता है।

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विटामिन A की आंखों के लिए क्यों जरूरी है?

डॉ. अरविंद बताते हैं, रॉड सेल्स के अंदर रोडोप्सिन (Rhodopsin) नामक एक खास रोशनी के प्रति सेंसिटिव पिगमेंट होता है। यही पिगमेंट कम रोशनी में चीजों को देखने में मदद करता है। कम रोशनी को महसूस करने के लिए रॉड पूरी तरह से रोडोप्सिन पर निर्भर होते हैं। जब रोशनी रोडोप्सिन पर पड़ती है, तो यह टूट जाता है और आंखों से देखी गई चीजों से जुड़ी जानकारी ब्रेन तक पहुंचती है। इसके बाद शरीर विटामिन A की मदद से दोबारा नया रोडोप्सिन बनाता है। यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जिससे आंखें कम रोशनी में भी काम कर पाती हैं।

विटामिन ए की कमी होने पर आंखों में क्या होता है?

डॉ. अरविंद का कहना है, अगर शरीर में विटामिन A की कमी हो जाए, तो रोडोप्सिन के दोबारा बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाता है और शरीर रोडोप्सिन नहीं बना पाता है। इसका सीधा असर रॉड सेल्स की कार्यक्षमता पर पड़ता है, जिससे रॉड सेल्स ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शाम के समय, रात में या कम रोशनी वाली जगहों पर देखने में परेशानी होने लगती है। यही स्थिति नाइट ब्लाइंडनेस कहलाती है। दिन के समय नजर नॉर्मल रह सकती है, इसलिए शुरुआत में कई लोग इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

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नाइट ब्लाइंडनेस के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

WHO के अनुसार, नाइट ब्लाइंडनेस विटामिन ए की कमी के शुरुआती लक्षणों में से एक होती है। डॉ. अरविंद का कहना है, नाइट ब्लाइंडनेस एक संकेत की तरह काम करता है, जो आपको हमेशा के लिए अंधेपन का शिकार होने से बचा सकता है। अगर इस समय कमी की पहचान कर सही इलाज शुरू कर दिया जाए, तो आंखों को होने वाले आगे के नुकसान से बचा जा सकता है। समय पर जांच और इलाज से कई मामलों में स्थिति में सुधार संभव हो सकता है, इसलिए अगर रात में देखने में लगातार परेशानी हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए क्या करें?

साल 2014 में BMJ Journal में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, विटामिन-A के सप्लीमेंट देने से कुछ मरीजों में नाइट ब्लाइंडनेस (रात में कम दिखने की बीमारी) के लक्षणों में सुधार हुआ या वे कंट्रोल में रहे।

डॉ. अरविंद बताते हैं, अगर जांच में विटामिन ए की कमी का पता चलता है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं। साथ ही, रोजमर्रा के डाइट में विटामिन ए से भरपूर फूड्स को शामिल करना भी फायदेमंद हो सकता है। ऐसे में विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए डाइट में गाजर, शकरकंद, हरी पत्तेदार सब्जियां, पीले और नारंगी रंग के फल और सब्जियों को शामिल करें। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के अधिक मात्रा में विटामिन ए सप्लीमेंट लेना सही नहीं है, क्योंकि इसकी अत्यधिक मात्रा भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

निष्कर्ष

शरीर में विटामिन ए की कमी होना नाइट ब्लाइंडनेस का कारण हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति को रात के समय देखने में परेशानी होने या कम रोशनी में देखने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में इसकी कमी को दूर करने के लिए डाइट में विटामिन ए से युक्त फूड्स को शामिल करें। इसके अलावा, अधिक परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और डॉक्टर की सलाह के साथ ही विटामिन ए सप्लीमेंट्स को लें।

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FAQ

  • विटामिन ए के लिए क्या खाना चाहिए?

    विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए डाइट में गाजर, कद्दू, पालक, ब्रोकली, शिमला मिर्च, शकरकंद, फैटी फिश, दही, पनीर और दूध जैसे फूड्स को शामिल करें। इससे स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है।
  • नाइट ब्लाइंडनेस के लक्षण क्या हैं?

    नाइट ब्लाइंडनेस की समस्या होने पर व्यक्ति को कम रोशनी में कम दिखने, पास में रखी चीजों का धुंधला दिखने, सिर दर्द होने और आंखों में दर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 11, 2026 22:43 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr. Aravinda S N

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