Ulcerative Colitis: आंतों में सूजन आने पर नजर आ सकते हैं ये 7 लक्षण, जानें कारण और बचाव

आंतों में सूजन आने पर शरीर में कई लक्षण नजर आने लगते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने पर अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में जानें इसके कारण और बचाव...

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Feb 18, 2021 17:55 IST
Ulcerative Colitis: आंतों में सूजन आने पर नजर आ सकते हैं ये 7 लक्षण, जानें कारण और बचाव

अल्सरेटिव कोलाइटिस (ulcerative colitis) इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज -Inflammatory bowel disease (IBD) के नाम से भी जाना जाता है। यानी आम भाषा में बोला जाए तो आंतों में सूजन आना, जिसके कारण अल्सर जैसी गंभीर बीमारी भी पैदा हो सकती है। जिस व्यक्ति को अल्सरेटिव कोलाइटिस होता है उस व्यक्ति की बड़ी आंत यानी कोलन और मलाशय की अंदरूनी परत प्रभावित होती है। इसके लक्षण अचानक से दिखाई नहीं देते बल्कि धीरे-धीरे पैदा होते हैं। ऐसे में इस समस्या के बारे में पता होना जरूरी है। अब सवाल ये है कि इस समस्या की पहचान कैसे करें? आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे की आंतों में सूजन के क्या लक्षण होते हैं। साथ ही कारण और बचाव भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

आंतों में सूजन के लक्षण (symptoms of ulcerative colitis)

आंतों में सूजन आने पर निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं। बता दें कि इसके लक्षण बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करते हैं। जानते हैं इनके बारे में...

1 - बार बार मल त्यागने की इच्छा होना

2 - वजन का घटना

3 - शरीर में थकान महसूस करना

4 - बुखार का आना

5 - पेट में दर्द होना या ऐंठन महसूस करना

6 - मवाद और खून के दस्त होना

7 - बच्चों में शारीरिक विकास नहीं हो पाएगा

बता दें कि अल्सरेटिव कोलाइटिस से ग्रस्त व्यक्ति ऊपर दिए लक्षणों को महसूस करते हैं लेकिन कई लोग इस बीमारी से लंबे समय तक ग्रस्त होते हैं उनमें अलग लक्षण नजर आ सकते हैं।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण (Causes of Ulcerative colitis)

अल्सरेटिव कोलाइटिस का कारण वैसे तो अभी तक स्पष्ट नहीं है। पहले समय में तनाव के कारण और गलत आहार को इस समस्या का कारण मानते थे लेकिन अब इसके निम्न कारण हो सकते हैं-

1- आनुवंशिकता

बता दें कि यदि आपके परिवार में किसी सदस्य को अल्सरेटिव कोलाइटिस है तो यह आपको भी हो सकता है। हालांकि ज्यादा मामले पारिवारिक इतिहास के सामने नहीं आए हैं।

2 - प्रतिरक्षा प्रणाली में खराबी

जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली में खराबी आ जाती है उन लोगों में अल्सरेटिव कोलाइटिस की संभावना बढ़ सकती है। जैसा कि हम सब जानते हैं प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस और संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है। वहीं असामान्य प्रतिक्रिया से प्रतिरक्षा प्रणाली पाचन तंत्र की कोशिकाओं को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

3 - आइसोट्रेटिनोइन

यह एक प्रकारी की दवाई होती है, जिसका उपयोग मुहांसों के इलाज में किया जाता है। लेकिन ऐसा पाया गया है कि यह आईबीटी यानी इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज का कारण भी हो सकती है लेकिन ध्यान रहे कि अभी तक कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

4 - उम्र के कारण

30 साल की उम्र से पहले के व्यक्ति अल्सरेटिव कोलाइटिस की ज्यादा संभावना होती है। लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि यह किसी भी उम्र में हो सकता है।

आंतों में सूजन से बचाव (Prevention of ulcerative colitis)

बता दें कि चूंकि अभी तक इस समस्या का कारण नहीं पता चल पाया है तो ऐसे में ये बता पाना थोड़ा मुश्किल है कि किस प्रकार का खाना अल्सरेटिव कोलाइटिस को रोक सकता है। लेकिन इसके प्रभाव को रोकने के लिए निम्न उपाय आपके काम आ सकते हैं-

1 - भरपूर मात्रा में पानी पीने से इस समस्या को रोका जा सकता है।

2 - थोड़ी-थोड़ी समय में थोड़ा थोड़ा आहार लेते रहने से ये समस्या रूक सकती है।

3 - फाइबर युक्त आहार का सेवन सीमित मात्रा में करना एक अच्छा उपाय है।

4 - फैट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना एक अच्छा ऑप्शन है।

5 - इसके अलावा लेक्टोज इनटोलरेंट वाले व्यक्तियों को दूध का सेवन कम करना चाहिए।

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कैसे होता है आंतों की सूजन का परीक्षण (diagnosis of ulcerative colitis)

डॉक्टर को जब संकेत मिलते हैं कि व्यक्ति को अल्सरेटिव कोलाइटिस है तो वे निम्न तरीकों से और परीक्षण करके इस बाच का पता लगाते हैं-

1 - रक्त परीक्षण- खून की कमी या किसी संक्रमण की जांच के लिए डॉक्टर रक्त परीक्षण करते हैं।

2 - कोलोनोस्कोपी- बता दें कि छोटे कैमरे से जुड़ी पतली रोशनी वाली ट्यूब के माध्यम से बड़ी आंत की परत को दिखाया जाता है। इसके अलावा डॉक्टर्स ऊत्तक का छोटा नमूना भी ले सकते हैं।

3 - मल का परीक्षण -सफेद रक्त कोशिकाएं जो मल में मौजूद होती है अल्सरेटिव कोलाइटिस का निदान कर सकती हैं।

4 - सीटी स्कैन - डॉक्टर को अल्सरेटिव कोलाइटिस का पता लगेने के लिए पेट का सीटी स्कैन कर सकते हैं।

5 - एक्स-रे - पेट के क्षेत्र को एक्स-रे करके बड़ी आत के हिस्से की जांच कर सकते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण होने वाली बीमारियां

अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण निम्न बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। जानते हैं-

1 - जिगर की बीमारी

2 - ऑस्टियोपोरोसिस

3 - मुंह में छाले

4 - आंखों में सूजन

5 - त्वचा और जोड़ों में सूजन

6 - शरीर में गंभीर निर्जलीकरण की संभावना

7 - अत्यधिक रक्तस्राव

बता दें कि इस समस्या को डॉक्टर्स निम्न प्रकार के माध्यम से स्टेज का पचता लगाते हैं। इसका सबसे पहला प्रकार अल्सरेटिव प्रॉक्टाइटिस है, इसमें सूजन मलाशय के निकट क्षेत्र तक होती है। ऐसे में इसे कोलाइटिस का हल्का प्रकार मानते हैं। वही प्रॉक्टोसिगमॉडाइटिस होने पर शरीर में खूनी दस्त, पेट में ऐंठन, पेट में दर्द जैसी समस्या नजर आती हैं। इस प्रकार में सूजन मलाश्य और बड़ी आंत में होती है। अगर लेफ्ट साइड कोलाइटिस की बात करें तो इसमें सूजन बड़ी आंत मलाशय और अवरोही बृहदांत्र DESCENDING COLON में होती है, इसके लक्षणों में वजन घटना, खूनी दस्त, पेट में ऐंठन आदि आते हैं। जबकि पैंकोलाइटिस में बड़ी आंत सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। इसमें खूनी दस्त, पेट में ऐंठन, थकान आदि लक्षण पाए जाते हैं। अगर एक्यूट फेवर अल्सरेटिव कोलाइटिस की बात करें तो इसमें अधिक दस्त, दस्त के साथ खून, बुखार, पेट में दर्द आदि लक्षण दिखते हैं। यह काफी दुर्लभ प्रकार होता है।

नोट - जैसा कि हमने बताया कि अल्सरेटिव कोलाइटिस का मुख्य कारण सामने नहीं आया है। लेकिन समस्या गंभीर है। ऐसे में लापरवाही ठीक नहीं है। समय-समय पर डॉक्टर से संपर्क करते रहें। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा दिए जाने वाले टेस्ट भी करवाते रहें। जैसा कि हमने पहले भी बताया कि इसके लक्षण धीरे-धीरे नजर आते हैं। ऐसे में अगर आप पहले से अपना टेस्ट करवाकर  इस बीमारी का पता लगा लेंगे तो इलाज समय पर शुरू हो जाएगा। इसके अलावा आप अपनी डाइट में थोड़ा सा बदलाव करके और पानी की भरपूर मात्रा से बड़ी आंतों को स्वस्थ रख सकते हैं।

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