शरीर में हर अंग का अपना एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। यदि, किसी भी अंग के कार्य में परेशानी आती है तो इससे दूसरे अंग पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आपको एक रोग की वजह से शरीर की अन्य समस्या हो सकती है। जानकार बताते हैं कि हार्ट के द्वारा सभी अंगों तक रक्त पहुंचाने के पंप किया जाता है। जब हार्ट रक्त को सही तरह से पंप नहीं कर पाता है तो इस स्थिति को कार्डियोजेनिक शॉक(Cardiogenic Shock) कहा जाता है। यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है। इस आपातकालीन स्थिति अक्सर दिल के दौरे (हार्ट अटैक) या अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के कारण उत्पन्न होती है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह घातक हो सकता है। इस लेख में नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कार्डिएक सर्जन व सीनियर कंसल्टेंट डॉ देबासिस दास से जानते हैं कार्डियोजेनिक शॉक के लक्षण और कारणों के बारे में।
कार्डियोजेनिक शॉक क्या है? - What is Cardiogenic Shock in Hindi
कार्डियोजेनिक शॉक तब होता है जब हार्ट शरीर की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब हृदय की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन में बाधा उत्पन्न होती है और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
कार्डियोजेनिक शॉक के क्या कारण हो सकते हैं? - Causes Of Cardiogenic Shock In Hindi
कार्डियोजेनिक शॉक के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ कारणों को आगे बताया गया है।
- दिल का दौरा (Myocardial Infarction) – यह कार्डियोजेनिक शॉक का सबसे आम कारण है। जब हृदय की धमनियों (नसों) में रुकावट उत्पन्न होती है, तो हृदय को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे वह प्रभावी रूप से पंप करने में असमर्थ हो जाता है।
- हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी (Cardiomyopathy) – यदि हार्ट की मांसपेशियां बहुत कमजोर हो जाती हैं, तो वे शरीर को आवश्यक रक्त नहीं भेज पाती हैं, इससे भी हार्ट रक्त को पंप नहीं कर पाता है।
- हृदय वाल्व की समस्या (Heart Valve Disease) – यदि हृदय के वाल्व डैमेज हो जाते हैं, तो वे ब्लड सर्कुलेशन को नियंत्रित करने में असमर्थ हो सकते हैं, जिससे हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है।
- दिल की धड़कने अनियमित (Severe Arrhythmia) – यदि हृदय की धड़कन बहुत तेज या बहुत धीमी हो जाती है, तो हृदय प्रभावी रूप से रक्त पंप नहीं कर पाता।
- हृदय में इंफेक्शन (Myocarditis) – हृदय की मांसपेशियों में संक्रमण (इंफेक्शन) होने से यह कमजोर हो सकती है और ठीक से कार्य नहीं कर पाती।
- फेफड़ों में रक्त का थक्का जमना (Pulmonary Embolism) – यदि फेफड़ों की धमनियों में रक्त का थक्का जम जाता है, तो यह हृदय से फेफड़ों तक रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है।
कार्डियोजेनिक शॉक के लक्षण - Symptoms Of Cardiogenic Shock in Hindi
- ब्लड प्रेशर अचानक बहुत कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को चक्कर आने या बेहोशी की स्थिति बन सकती है।
- हृदय की धड़कन असामान्य रूप से तेज या धीमी हो सकती है।
- लंग्स तक पर्याप्त रक्त न पहुंचने के कारण सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
- शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण त्वचा पीली या नीली दिख सकती है।
- शरीर में रक्त संचार कम होने के कारण त्वचा ठंडी और चिपचिपी हो सकती है।
- शरीर तनावग्रस्त होने के कारण अत्यधिक पसीना आ सकता है।
इसे भी पढ़ें: हार्ट की बीमारियों का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए? डॉक्टर से जानें
कार्डियोजेनिक शॉक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है, लेकिन यदि इसके लक्षणों को समय पर पहचाना जाए और उचित चिकित्सा उपचार लिया जाए, तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। हृदय स्वास्थ्य का ध्यान रखना और नियमित जांच कराना इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है। यदि किसी को कार्डियोजेनिक शॉक के लक्षण महसूस हों, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।