What Happens When You Have A Mini Stroke In Hindi: मिनी स्ट्रोक को ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक यानी टीआईए के नाम से भी जाना जाता है। मिनी स्ट्रोक की समस्या तब होती है जब ब्रेन तक सही तरह से ब्लड फ्लो नहीं होता है। इसका मतलब है कि ब्रेन में अस्थाई रूप से ब्लड फ्लो में दिक्कतें आने को हम मिनी स्ट्रोक कहते हैं। मिनी स्ट्रोक आने पर स्ट्रोक जैसे ही लक्षण नजर आते हैं। हालांकि, मिनी स्ट्रोक आने पर दीर्घकालिक परिणाम नजर नहीं आते हैं और न ही किसी तरह का स्थाई नुकसान होता है। इसके बावजूद, मिनी स्ट्रोक को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मिनी स्ट्रोक का मतलब है कि ब्लड फ्लो में दिक्कत आ रही है, जिसकी चपेट में ब्रेन हेल्थ है। यह कभी भी गंभीर स्थिति ले सकता है। इसलिए, बहुत जरूरी है कि मिनी स्ट्रोक के बाद अपना इलाज जरूर करवाएं। अगर समय पर मिनी स्ट्रोक का इलाज न करवाया जाए, तो इसका शरीर पर किस तरह का असर पड़ सकता है? जानें, फरीदाबाद स्थित फोर्टिस अस्पताल में डायरेक्टर-न्यूरोलॉजी डॉ. विनीत बंगा से।
मिनी स्ट्रोक का इलाज न करवाया जाए, तो क्या हो सकता है?- What Happens If A Mild Stroke Goes Untreated In Hindi
मिनी स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक, स्ट्रोक से अलग होता है। असल में, मिनी स्ट्रोक बहुत कम समय के लिए रहता है। कई बार लोगों को मिनी स्ट्रोक का पता भी नहीं चलता है और यह स्थिति अपने आप कंट्रोल हो जाती है। लेकिन, मिनी स्ट्रोक आने पर शरीर में स्ट्रोक जैसे कई लक्षण नजर आते हैं, जैसे कमजोरी, बोलने में दिक्कत, धुंधला नजर आना, सिर घूमना आदि। अगर किसी को मिनी स्ट्रोक आया है और इसके अबाद अपना इलाजया नहीं करवाया, तो शरीर में कई तरह के बुरा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों की मानें, तो मिनी स्ट्रोक का इलाज किया जाना बहुत जरूरी है। अगर कोई इसके प्रति लापरवाही करता है, तो इसके दीर्घकालिक परिणाम नजर आ सकते हैं। जैसे स्थाई रूप से मरीज अपंग हो सकता है और जान भी जा सकती है। ऐसे में मिनी स्ट्रोक को लेकर लापरवाही किया जाना बिल्कुल सही नहीं होता है। अगर किसी को मिनी स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से अपना इलाज करवाना चाहिए।
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किन्हें रहता है मिनी स्ट्रोक का अधिक खतरा
हाई ब्लड प्रेशरः मिनी स्ट्रोक का खतरा हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अधिक रहता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर की वजह से आर्टरीज कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में ब्लड के क्लॉट बनने लगते हैं, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है। इससे स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है।
डायबिटीजः डायबिटीज भी ऐसी एक मेडिकल कंडीशन है, जिसकी वजह से ब्लड वेसल्स डैमेज हो जाती हैं और ब्लड फ्लो पर बुरा असर पड़ने लगता है। ऐसे में स्ट्रोक का रिस्क भी डायबिटीज के मरीजों में बढ़ जाता है।
हाई कोलेस्ट्रॉलः हाई कोलेस्ट्रॉल का मतलब है कि आर्टरीज में प्लाक का जमना। आपको बता दें कि दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं। बैड कोलेस्ट्रॉल और गुड कोलेस्ट्रॉल। अगर किसी की आर्टरीज में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, तो इससे ब्लड फ्लो बाधित होता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई पर बुरा असर पड़ने लगता है। इस स्थिति में, स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ता है।
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मिनी स्ट्रोक से बचाव कैसे करें
मिनी स्ट्रोक से बचने के लिए यहां दिए गए टिप्स को अपनाएं-
- अपनी लाइफस्टाइल को मोडिफाई करें। ऐसी आदतों से दूर रहें, जो बीमार होने के जोखिम को बढ़ा सकती है।
- अपनी डाइट में हेल्दी चीजें शामिल करें। सैच्युरेटेड फूड्स का सेवन न करें। लो-सॉल्ट डाइट आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
- फल और सब्जियां हेल्थ में सुधार करती है। पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने से मिनी स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है।
- अगर किसी भी तरह की मेडिकल कंडीशन है, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल का स्तर, मोटापा आदि। इन्हें मैनेज करने की कोशिश करें। खासकर, वजन बढ़ने न दें। ध्यान रखें कि मोटापा अपने आप में कई बीमारियों की मुख्य वजह होता है।
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