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अचानक बोलने में दिक्कत और कंफ्यूजन, क्या ये मिनी स्ट्रोक का संकेत? जानें डॉक्टर से

Mini Stroke in Hindi: अचानक से बोलने में दिक्कत या कंफ्यूजन होना और फिर कुछ समय बाद ठीक हो जाना, अगर ये परेशानी किसी को होती है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि ये मिनी स्ट्रोक न हो। इस लेख में मिनी स्ट्रोक से जुड़ी हर जानकारी जानें।

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अचानक बोलने में दिक्कत और कंफ्यूजन, क्या ये मिनी स्ट्रोक का संकेत? जानें डॉक्टर से


Mini Stroke in Hindi: लोगों को लगता है कि ब्रेन से जुड़ी समस्याएं एकदम से शरीर पर दिखने लगती हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है। जब भी दिमाग से जुड़ी परेशानी आती है, तो उसके संकेत मरीज को पहले ही दिखने लगते हैं। अगर मरीज पहले ही लक्षणों को समझकर डॉक्टर से सलाह लें, तो बीमारी की गंभीरता से बचा जा सकता है। दिमाग से जुड़ी ऐसी ही एक बीमारी है स्ट्रोक या लकवा, जिसके बारे में लोग सोचते हैं कि अचानक ही ये बीमारी बिना लक्षणों के आ जाती है। लेकिन ऐसा नहीं होता है, स्ट्रोक आने से पहले मरीज को अचानक बोलने में दिक्कत होने लगती है और हाथ-पैर में सुन्न होने लगते हैं। इसे मिनी स्ट्रोक यानी Transient Ischemic Attack (TIA) कहते हैं। इस बारे में हमने मुंबई के झायनोवा शेल्बी अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. विश्वनाथन अय्यर (Dr Vishwanathan Iyer, Neurosurgeon, Zynova Shalby Hospital, Mumbai) से बात की। मिनी स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जानने से पहले ये जानते हैं कि मिनी स्ट्रोक क्या है?

मिनी स्ट्रोक क्या है? - What is Mini Stroke (Transient Ischemic Attack) in Hindi

डॉ. विश्वनाथन अय्यर कहते हैं, “मिनी स्ट्रोक में दिमाग तक जाने वाला ब्लड कुछ समय के लिए रुक जाता है, और फिर कुछ देर बाद सामान्य हो जाता है। मिनी स्ट्रोक के लक्षण भी कुछ देर बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाते हैं। लेकिन इससे पता चलता है कि भविष्य में स्ट्रोक का रिस्क बढ़ सकता है। इसे आप वार्निंग स्ट्रोक भी कह सकते हैं, जो कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों के अंदर ठीक हो सकता है, लेकिन अगर इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो ये आगे चलकर गंभीर स्ट्रोक में बदल सकता है।”

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क्या अचानक बोलने में दिक्कत और कंफ्यूजन होना मिनी स्ट्रोक के लक्षण हैं? - What is Symptoms of Mini Strokes in Hindi

डॉ. विश्वनाथन कहते हैं, “ बिल्कुल, अगर किसी को अचानक बोलने में दिक्कत होने लगे या फिर कंफ्यूजन हो तो मिनी स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, कई और भी लक्षण हैं, जिन पर नजर रखना जरूरी है। अगर ये लक्षण कुछ समय बाद चले भी जाए, तो भी इसे हल्के में न लें बल्कि डॉक्टर से जरूर मिलें।”

  • चेहरे का एक हिस्से में टेढ़ापन आना
  • हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्न होना
  • आंखों से धुंधला दिखना
  • चलने में परेशानी होना या बैलेंस न रहना
  • तेज सिरदर्द की शिकायत
  • उल्टी होना

मिनी स्ट्रोक और स्ट्रोक में अंतर - Difference Between Mini Stroke and Stroke in Hindi

मिनी स्ट्रोक (TIA) 

सामान्य स्ट्रोक

दिमाग में अस्थायी ब्लॉकेज 

स्थायी ब्लॉकेज या ब्लीडिंग

कुछ मिनटों या घंटों में ठीक होना

लंबे समय तक रहता है

टेंपरेरी नुकसान 

परमानेंट नुकसान

बड़े स्ट्रोक की चेतावनी 

विकलांगता या मृत्यु का रिस्क

मिनी स्ट्रोक किन लोगों को होने का रिस्क - Who is at Risk of Having a Mini Stroke in Hindi

डॉ. विश्वनाथन कहते हैं कि TIA होने का रिस्क सबसे ज्यादा अन लोगों को होता है -

  1. जिन लोगों की उम्र 55 साल से ज्यादा होती है
  2. स्ट्रोक या हार्ट की बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री
  3. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है
  4. स्मोकिंग या शराब पीने वाले लोगों को
  5. जो लोग फिजिकल एक्टिवटी बिल्कुल नहीं करते
  6. जो लोग बहुत ज्यादा जंक या प्रोसेस्ड फूड लेते हैं

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मिनी स्ट्रोक से बचाव कैसे करें? - How to Prevent a Mini Stroke in Hindi

डॉ. विश्वनाथन ने बताया कि कुछ सावधानियों के जरिए मिनी स्ट्रोक के रिस्क को कम किया जा सकता है।

  1. कम नमक और तेल का खाना खाएं।
  2. ताजी और मौसमी फल-सब्जियां खाएं।
  3. ट्रांस फैट वाले फूड न खाएं।
  4. रोजाना कम से कम 30 मिनट कसरत करें।
  5. वजन कंट्रोल में रखें।
  6. स्मोकिंग से ब्लड क्लॉट बनता है, तो स्मोक करना बिल्कुल छोड़ दें।
  7. शराब ज्यादा पीने से लिवर और ब्लड प्रेशर पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है।
  8. ब्लड प्रेशर, शुगर का रेग्लुर चेकअप कराएं।

निष्कर्ष

डॉ. विश्वनाथन ने जोर देते हुए कहा कि अगर किसी को लक्षण नजर आने के बाद कुछ समय बाद चले जाए, तो उसे हल्के बिल्कुल न लें। मिनी स्ट्रोक यानी Transient Ischemic Attack शरीर को संकेत देता है कि आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन की कोई समस्या है, जिसके बारे में डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी है।

उम्मीद है कि आपको लेख पसंद आया होगा। इस लेख का मकसद सिर्फ आपको जानकारी देना है।किसी भी तरह की सेहत से जुड़ी परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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