Doctor Verified

ये 7 लक्षण हो सकते हैं मूत्राशय की दीवार में सूजन के संकेत, जानें इसका कारण और इलाज

मूत्राशय की दीवार में सूजन या थिकनेस की समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जानें इसके लक्षण और इलाज के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Feb 10, 2022Updated at: Feb 10, 2022
ये 7 लक्षण हो सकते हैं मूत्राशय की दीवार में सूजन के संकेत, जानें इसका कारण और इलाज

हमारे शरीर में मूत्राशय एक महत्वपूर्ण अंग है जिसमें पेशाब इकठ्ठा होता है। मूत्राशय में किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन होने पर या किसी तरह की समस्या आने पर इसकी दीवार में सूजन और थिकनेस आ जाती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में Urinary Bladder Wall Thickening कहा जाता है। मूत्राशय में बहुत ज्यादा देर तक पेशाब के इकठ्ठा होने की वजह से भी इसकी दीवार में सूजन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन इसके अलावा कई अन्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। शुरुआत में मूत्राशय की दीवार में थिकनेस या सूजन की समस्या के लक्षण दिखने पर इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है लेकिन अधिक समय तक इस समस्या के बने रहने के कारण कई अन्य परेशानियां हो सकती हैं। मूत्राशय की दीवार में थिकनेस या सूजन के क्या कारण हैं, इसके लक्षण क्या हैं और इस समस्या का इलाज कैसे किया जाता है? आइये विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

मूत्राशय की दीवार में सूजन के कारण (Urinary Bladder Wall Thickening Causes)

Urinary-Bladder-Wall-Thickening

मूत्राशय में अधिक समस्या तक पेशाब के इकठ्ठा होने के कारण भी इसकी दीवार में सूजन की समस्या हो सकती है। स्टार हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विजय लक्ष्मी के मुताबिक पेशाब से जुड़े संक्रमण भी इसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। मूत्राशय की दीवार में थिकनेस और सूजन के प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं।

इसे भी पढ़ें : ब्लैडर कैंसर (मूत्राशय के कैंसर) से बचना है तो आज से अपनाएं ये 3 आदतें, जानें किन्हें होता है खतरा

1. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई)

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) के कारण मूत्राशय की दीवार में थिकनेस की समस्या हो सकती है। यूटीआई के कारण कई हो सकते हैं लेकिन इसकी वजह से मूत्राशय में समस्याएं होती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यूटीआई इन्फेक्शन की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। ज्यादातर लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की समस्या शारीरिक संबंध बनाने के कारण होती है।

2. कैंसर की बीमारी

कैंसर के कारण मूत्राशय की दीवार में सूजन और थिकनेस की समस्या हो सकती है। मूत्राशय से जुड़े कैंसर के कारण यह समस्या ज्यादातर लोगों में देखी जाती है। धूम्रपान करने या तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।

इसे भी पढ़ें : पेशाब की थैली में पथरी के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

Urinary-Bladder-Wall-Thickening

3. असामान्य ऊतकों की वृद्धि

मूत्राशय की दीवार में असामान्य ऊतकों की वृद्धि के कारण ट्यूमर की समस्या हो जाती है जिसके चलते मूत्राशय की दीवार में सूजन या थिकनेस आ जाती है। फाइब्रोमा एक और सौम्य मूत्राशय ट्यूमर इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माने जाते हैं। 

4. कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी

मूत्राशय की दीवार में सूजन या मोटापन कीमोथेरेपी के कारण भी हो सकता है। कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण मूत्राशय की दीवार में सूजन की समस्या हो सकती है। इसके आलावा किसी भी रेडिएशन थेरेपी से गुजरने के बाद मरीज को यह समस्या हो सकती है।

इसके आलावा मूत्राशय की दीवारों में सूजन या मोटापन मूत्राशय की पथरी, ट्यूमर और इन्फेक्शन के कारण भी हो सकता है।

मूत्राशय की दीवार में सूजन के लक्षण (Urinary Bladder Wall Thickening Symptoms)

मूत्राशय की दीवार में सूजन या थिकनेस की समस्या में आपको पेशाब करते समय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। पेशाब करते समय आपको अधिक जोर देना पड़ सकता है। इसके अलावा इस समस्या में पेशाब से जुड़ी आदतों में बदलाव भी देखने को मिलता है। मूत्राशय की दीवार में सूजन या थिकनेस की समस्या के प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

1. बार-बार बुखार आना।

2. पेशाब करते समय दर्द।

3. पेशाब करने में दिक्कत या अधिक जोर लगाना।

4. पेशाब के रंग में बदलाव।

5. पेशाब से दुर्गंध आना।

6. किडनी में दर्द।

7. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन।

इसे भी पढ़ें : ब्लैडर (मूत्राशय) को रखना है स्वस्थ तो आज से अपना लें ये 5 आदतें, दूर रहेगा इंफेक्शन और किडनी रोगों का खतरा

मूत्राशय की दीवार में सूजन का इलाज (Urinary Bladder Wall Thickening Treatment)

मूत्राशय की दीवार में सूजन या थिकनेस की समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले पेशाब की जांच करते हैं। इस जांच में संक्रमण और अन्य चीजों की जांच की जाती है। इसके बाद मरीज की स्थिति के आधार पर उसका इलाज किया जाता है। अगर यह समस्या कैंसर के कारण हो रही है तो मरीज की सिस्टोस्कोपी जांच की जा सकती है। इलाज में आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। हर मरीज का इलाज समस्या के कारण और उसके लक्षणों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इस समस्या के लक्षण दिखने पर चिकित्सक से संपर्क जरूर करना चाहिए।

(All Image Source - Freepik.com)

Disclaimer