हार्ट अटैक के बाद पत्नी की सूझबूझ से बची पति की जान, जानें किसी को हार्ट अटैक आने पर आप क्या कर सकते हैं

एक पत्नी की सूझबूझ से पति की हार्ट अटैक से जान बच पाई। रुकी हुई धड़कनों को डॉक्टरों ने शॉक देकर ठीक किया। 

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Mar 04, 2021Updated at: Mar 06, 2021
हार्ट अटैक के बाद पत्नी की सूझबूझ से बची पति की जान, जानें किसी को हार्ट अटैक आने पर आप क्या कर सकते हैं

‘’उस दिन ये रात की नौकरी करके आए थे। आकर नाश्ता खाया और सो गए। सुबह 10 बजे उठे। उस समय मैं हलवा बना रही थी। ये एकदम से उठे और बोले मेरे हाथ पैरों में दर्द हो रहा है मैंने सोचा कि ऐसे ही दर्द हो रहा है। और इनको दर्द की दवा खाने को कह दिया, लेकिन थोड़ी ही देर में इनका शरीर पसीना-पसीना होने लगा। ये बेचैन होने लगे। कहने लगे कि मुझे सीने में बहुत तेज दर्द हो रहा है। मैं तुरंत इन्हें अस्पताल लेकर चली गई।’’ ये कहानी है कानपुर के 54 साल के राम निवास की। राम निवास को साल 2019 में हार्ट अटैक आया था। उस समय घर पर केवल उनकी पत्नी और बेटियां थीं। पत्नी की सतर्कता की वजह से आज राम निवास जिंदा हैं। ओन्ली माई हेल्थ को राम निवास के हार्ट अटैक की पेरशानी उनकी पत्नी पुष्पा शुक्ला ने बयां की।

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हृदय रोग मौत का प्रमुख कारण

राम निवास जैसे सफल मामले हर घर में दिखाई नहीं देते हैं। बहुत नसीब वाले होते हैं वे लोग हार्ट अटैक की परेशानी से बच जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि हृदय रोग दुनिया भर में मौत का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)  का मानना है कि दुनिया भर में हृदय रोग (Cardiovascular diseases) मौत का पहला कारण है। हर पांच में से चार मौतें हार्ट अटैक से होती हैं। डब्लूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में लगभग 17.9 मिलियन मौतें कार्डियोवास्कुलर डिजीज की वजह से हुई हैं। 

आप पति की ऐसी हालत देखकर घबराई नहीं?

इस सवाल के जवाब में पुष्पा शुक्ला ने बताया कि ‘’उस समय मैं समझ ही नहीं पाई थी कि इन्हें हुआ क्या है। जब इन्होंने कहा कि मेरे हाथों पैरों में दर्द हो रहा है तो मैं केवल दवा लेने के लिए अंदर कमरे में गई थी। इतने में ही इन्हें बहुत तेज सीने में दर्द होने लगा। मैं तो साड़ी भी नहीं पहन पाई थी। इतने में ये हाय अम्मा करके नीचे गिर पड़े। शरीर से एकदम पसीना निकलने लगा। मैं इनके सीने को मसलने लगी।  घर में छोटी लड़कियां थीं वो रोने लगीं।’’ पुष्पा देवी ने तुरंत पड़ोसी की मदद ली। और पास के अस्पताल में जाकर पति को भर्ती कराया।

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अस्पताल ने नहीं किया इलाज

पुष्पा देवी ने बताया कि जब पति की हालत खराब हो गई थी उस समय वे जिस पास के अस्पताल में ले गईं तो उन्होंने इनकी हालत देखकर इलाज करने से मना कर दिया। अस्पताल ने कहा कि इन्हें तुरंत कार्डियोलॉजी के अस्पताल में ले जाइए। हमने बिना देर किए एम्बुलेंस की मदद से इन्हें हृदय रोग संस्थान में लेकर गए। वहां जाकर डॉ. अवधेश शर्मा ने तुरंत इनका इलाज किया। 

अब कैसी है पति की तबीयत?

इस सवाल के जवाब में पुष्पा शुक्ला ने बताया कि पति का अभी मोतियाबिंद का इलाज हुआ है। दो साल पहले भी राम निवास की एक आंख का मोतियाबिंद का इलाज हो चुका है। इस साल कुछ दिनों पहले दूसरी आंख का भी मोतियाबिंद का इलाज हुआ है। राम निवास की तबीयत अभी भी ठीक न होने के कारण उनकी पत्नी ने उनकी हालत की सारी कहानी ओन्ली माई हेल्थ को बताई। पुष्पा का कहना है कि अब उनके पति की तबीयत पहले से ठीक हो रही है। वे उनके खानपान का पूरा ध्यान रखती हैं।

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डॉक्टर का किया शुक्रिया

पेशे से होमगार्ड राम निवास की पत्नी ने ओन्ली माई हेल्थ को बताया कि जिस समय वे अपने पति को अस्पताल लेकर गई थीं, उस समय उनकी दिल की धड़कन लगभग रुक चुकी थीं, लेकिन इलाज करने वाले डॉक्टर ने इनकी जान बचा ली। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अवधेश शर्मा हमारे लिए किसी दूत से कम नहीं हैं। पुष्पा ने बताया कि डॉक्टर अवधेश शर्मा इलाज के दो साल बाद भी आज भी फोन करके पति का हालचाल ले लेते हैं। उनकी दवाइयां अभी भी चल रही हैं। लॉकडाउन में जब घर से कोई बाहर नहीं निकल पा रहा था तब भी डॉक्टर अवधेश शर्मा ने फोन के सहारे पति की दवाएं बताएं और उन्हें खाने में किन चीजों को खाना है किनको नहीं। यह सब बताया। पुष्पा शुक्ला ने डॉक्टर का दिल से शुक्रिया किया।

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क्या बोले इलाज करने वाले डॉक्टर

कानपुर के राजकीय हृदय रोग संस्थान, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. अवधेश शर्मा ने मरीज राम निवास का इलाज किया था। उन्होंने बताया कि मरीज हमारे पास बिल्कुल पल्सलेस, बीपीलेस आया था। यह लैंड मार्क केस था। किसी तरह से वो पेशेंट बच गया। वरना ऐसी कंडीशन वाले मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर ने कहा कि हार्ट के मरीज के लिए समय बहुत मायने रखता है। राम निवास तबियत बिगड़ने के एक घंटे के अंदर अस्पताल आ गए थे। हमने उन्हें दो बार शॉक दिया। जिससे मरीज की धड़कनों में हलचल शुरू हुई। फिर उसे वेंटिलेटर पर लिटाया और पेसमेकर लगा दिया। इसके बाद पांच डॉक्टरों की टीम ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की। जिससे मरीज की जान बच पाई। 

आप कैसे कर सकते हैं हार्ट अटैक के मरीज की मदद

  • अगर आपके आसपास किसी की हार्ट अटैक आता है तो बिना देर किए मरीजो को अस्पताल में लेकर जाएं।
  • हार्ट के मरीज के लिए समय बहुत कीमती होता है। इसलिए कोशिश करें कि मरीज को एक घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाएं।
  • मरीज के शरीर से अगर बहुत पसीना बह रहा है। सीने में दर्द हो रहा है तो तुरंत एंबुलेंस को कॉल करें। अगर एम्बुलेंस आने में समय लग रहा है तो अपने या किसी पड़ोसी के वाहन का इस्तेमाल करें।
  • ध्यान रहे कि हार्ट के मरीज को कार्डियो के अस्पताल में ही लेकर जाएं।  

40 के बाद दिल का खास ख्याल जरूरी

होमगार्ड राम निवास का इलाज करने वाली पांच डॉक्टरों की टीम में से एक डॉ. अवधेश शर्मा ने बताया कि 40 की उम्र के बाद दिल का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो जाता है। क्योंकि ज्यादा कोर्डियो से संबंधित परेशानियां इसी उम्र में होती हैं। दिल का ख्याल रखने के लिए उन्होंने निम्न बातों पर ध्यान देने की सलाह दी।

1. डॉ. शर्मा के मुताबिक लोगों को स्वस्थ जीवनशेली को अपनाना चाहिए। ज्यादा तला, भुना नहीं खाना चाहिए।

2. तनाव कम लेना चाहिए। अगर किसी बात का तनाव है तो लोगों से बात करें। उस तनाव को कम करने की कोशिश करें।

3. हरी सब्जियां, सीजनल फ्रूट्स का सेवन करें।

4. नियमित व्यायाम करें।

5. तंबाकू, सिगरेट को बिल्कुल न कहें। ई-स्मोकिंग भी नुकसानदायक होती है।

6. रेड मीटे से दूरी बनाएं। यह हृदय के लिए बहुत अच्छा नहीं होता।

ऐसे मरीजों की कहानी आपसे साझा करने का बस यही मकसद है कि आप बीमारियों के प्रति जागरुक रहिए। ताकि समय रहते आप अपनी भी मदद कर पाएं। जैसे राम निवास की पत्नी ने सूझबूझ दिखाई और समय रहते अपने पति को इलाज के लिए अस्पताल ले गईं वैसे ही आप भी किसी के लिए दूत बन सकते हैं। हार्ट अटैक के मामलों में अक्सर समय पर अस्पताल न पहुंच पाने पर मौत तक हो जाती है, लेकिन राम निवास वाले मामले में यह तत्परता दिखाई गई और डॉक्टरों ने भी तुरंत इलाज शुरू कर दिया। 

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