Triple Vessel Disease: दिल से जुड़ी इस गंभीर बीमारी को मात देकर लौटे सौरव गांगुली, जानें क्या है ये बीमारी

मेडिसिन नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ में छपी एक रिपोर्ट की मानें, तो भारत में हृदय रोगों से मरने वालों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ने का अनुमान है

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Feb 03, 2021Updated at: Feb 03, 2021
Triple Vessel Disease: दिल से जुड़ी इस गंभीर बीमारी को मात देकर लौटे सौरव गांगुली, जानें क्या है ये बीमारी

पिछले दिनों भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान,हम सब के चहेते और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav ganguly heart attack news) को सीने में दर्द की शिकायत की वजह से कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के प्रेस रिपोर्ट के अनुसार सौरभ गांगुली को हार्ट अटैक पड़ा था। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी एंजीयोग्राफ़ी की गई, जिसमें की ट्रिपल वेसल डिजीज का पता चला और उसके बाद उनकी एंजियोप्लास्टी की गई। अब उनकी हालत स्थिर है। पर क्या आप जानते हैं कि गांगूली की एंजियोप्लास्टी क्यों की गई? इससे पहले हमारे लिए ये जानना जरूरी है कि ट्रिपल वेसल डिजीज क्या है, जिस वजह से दादा को दिल का दौरा (heart attack) पड़ा? इसके बारे में हमने राजकीय हृदय रोग संस्थान, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर में कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर आफ कार्डियोलॉजी डॉ. अवधेश शर्मा से बात की।

inside3heartdiseases

डॉक्टर शर्मा के मुताबिक अनियमित दिनचर्या, तैलीय भोजन, शारीरिक शिथिलता, तम्बाकू का सेवन व अत्यधिक तनाव के कारण बाकी दुनिया के मुकाबले भारत में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हमारे देश में काफ कम उम्र में लोग हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं, जैसे कि  सौरव गांगुली हुए ।

क्या है ट्रिपल वेसल डिजीज और इसका कारण ?(What is triple vessel disese and its causes)

डॉक्टर अवधेश शर्मा के मुताबिक ट्रिपल वेसल डिजीज एक गंभीर बीमारी है।इसका पता हार्ट अटैक पड़ने के बाद एंजीयोग्राफ़ी से लगाया जाता है।इसमें दिल को खून पहुंचाने वाली तीनों धमनियों में रुकावट आ जाती है।जिसके कारण हृदय की मांसपेशियों को साफ रक्त  की आपूर्ति नहीं हो पाती है। हमारे दिल को ऑक्सीजनयुक्त ब्लड की सप्लाई तीन नसों यानी धमनियों के माध्यम से होती है जिनको आर्टरीज (नसें) कहा जाता है। दो आर्टरी लेफ्ट साइड में होती हैं, जो हार्ट के लेफ्ट पार्ट को सप्लाई करती हैं। एक आर्टरी राइट साइड में होती है, जिसको कि राइट कोरोनरी आरटेरी कहते हैं। ये नस राइट साइड और दिल के नीचे वाले इन्फिरियर पार्ट को रक्त की सप्लाई करती हैं। जब किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है तब इनमें से कोई एक नस बंद हो जाती है। ट्रिपल वेसल डिजीज में तीनों रक्त धमनियां (नस) बंद हो जाती हैं। एक नस में रुकावट को सिंगल वेसल डिजीज, दो नसों में रुकावट को डबल वेसल डिजीज कहा जाता है। जब तीनों नसों में 70 फीसद से ज्यादा की रुकावट होती है तो उसे मेडिकल भाषा में ट्रिपल वेसल डिजीज (triple vessel disese)कहते हैं। 

यह बीमारी किन लोगों को होती है?

डा० शर्मा के मुताबिक निम्नलिखित श्रेणियों में हार्ट अटैक या फिर ट्रिपल वेसल डिज़ीज़ की आशंका ज्यादा होती है-

1-अनियंत्रित शुगर

डॉक्टर शर्मा के मुताबिक जो लोग अनियंत्रित डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें ट्रिपल वेसल डिजीज की परेशानी जल्दी होती है।

2-हार्ट अटैक की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री

आनुवंशिक कारण से दिल की बीमारी में काफ़ी महत्त्वपूर्ण  हैं व जिन व्यक्तियों के माता-पिता या भाई-बहनों में हार्ट अटैक की समस्या रही है, उनमें इसका खतरा ज्यादा रहता है और ऐसे लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता होती है।

3-उच्च रक्तचाप ,बढ़ा हुआ कोलेस्ट्राल व मोटापा

बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर ,कोलेस्ट्राल व मोटापा हार्ट अटैक का एक प्रमुख कारण है।

4-धूम्रपान व तम्बाकू का सेवन

भारत में कम उम्र में बढ़ते हुए हृदय रोग का एक मुख्य कारण तम्बाकू का सेवन व धूम्रपान है,जिसको रोकने के लिए सामाजिक व सरकारी स्तर पर जन-जागरूकता की बहुत जरूरत है।

5-ज्यादा  तनाव

आधुनिक जीवनशैली और युवा वर्ग में बढ़ता हुआ तनाव व भागम-भाग वाली दिनचर्या भारतीयों को समय से पहले हृदय रोगों से ग्रसित कर रही है। जिस वजह से लोगों में तनाव बढ़ रहा है।

ट्रिपल वेसल डिजीज और एंजियोग्राफी (triple vessel disease angiography)

ट्रिपल वेसल डिजीज का पता एंजियोग्राफी से लगाया जाता है। डॉक्टर अवधेश शर्मा के मुताबिक एंजीयोग्राफ़ी में दिल की तीनों नसों में 70 फीसदी से ज्यादा ब्लॉकेज होने पर उसे ट्रिपल वेसल डिजीज लेबल कर दिया जाता है। अगर एक या दो नसों में ब्लॉकेज है तो एंजियोप्लास्टी उपचार का एक बेहतर उपाय है। एंजियोप्लास्टी दिल की बंद नसों को ठीक करने की एक अत्याधुनिक विधि है जिसमें की बिना चीरा लगाए व बिना बेहोश किए दिल की नसों के ब्लॉकेज को ठीक किया जाता है। इसमें धातु के बने स्प्रिंग (छल्ले ) को कंप्यूटर की सहायता से रेडियोइमेजिंग से ब्लॉकेज तक ले जाया जाता है एवं बैलून के माध्यम से फुलाकर ब्लॉकेज की जगह लगा दिया जाता है। जिससे ब्लड सप्लाई नॉर्मल हो जाती है।

डॉक्टर शर्मा का कहना है कि अगर किसी हृदय रोगी को ट्रिपल वेसल डिजीज है तो उसको आमतौर पर ओपन हार्ट सर्जरी या बाई पास कराने की सलाह दी जाती है,लेकिन यदि अगर मरीज बाईपास ऑपरेशन (triple vessel disease bypass surgery) के लिए इच्छुक नहीं है तो कुछ मामलों में एंजियोप्लास्टी भी की जाती है जो की मरीज़ के रोग की स्थिति पर निर्भर करती है क्योंकि आधुनिक समय में  कार्डियोलाजी में एडवांस व नई तकनीक आने के बाद तीनों नसों में अगर छोटे-छोटे  ब्लॉकेज हैं तो उसे एंजियोप्लाटी के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है।हालांकि अगर ब्लॉकेज काफी लंबे हैं या ब्लॉकेज में  कैल्सीयम बहुत ज्यादा जमा है या ब्लॉकेज बहुत हार्ड हैं तो वहां पर बैलून के माध्यम से स्टंट नहीं लगा सकते। ऐसे मामलो में बाईपास सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है।

इसे भी पढ़ें : दिल की सेहत का रखना है ख्याल तो खाएं ये 14 सुपरफूड्स, एक्सपर्ट से जानें कौन सा फूड है फायदेमंद

ट्रिपल वेसल डिजीज के लक्षण (Symptoms of Triple Vessel Disease)

1.चलने फिरने पर सांस का फूलना

ट्रिपल वेसल डिजीज के मरीजों में शुरुआत दिनों में चलने-फिरने में सांस फूलने की समस्या आती है। ऐसे मरीज़ों की साँस सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने,एक -दो किलोमीटर चलने पर उनके हमउम्र स्वस्थ्य लोगों की तुलना में ज़्यादा फूलती है।जो कि रोग की गम्भीरता के साथ बढ़ती चली जाती है।

2.सीने में दर्द होना

ऐसे मरीजों को सीने में दर्द की शिकायत रहती है। थोड़ा चलने फिरने पर या मेहनत का काम करने पर सीने में दर्द होने लगता है जो कि आराम करने पर ठीक हो जाता है।सीने में दर्द के साथ-साथ कुछ रोगियों को काफ़ी पसीना भी आता है।

3.घबराहट और बेचैनी होना

ऐसे मरीजों में हमेशा ऐसा सेंसेशन बना रहता है जैसे कि उनका दम घुट जाएगा। ऐसे में उन्हें काफ़ी घबराहट व बेचैनी भी होने लगती है। 

4.कभी-कभी बहुत थकान का आना

ट्रिपल वेसल डिजीज के मरीजों को कभी-कभी बहुत थकान महसूस होती है। उन्होंने बहुत काम नहीं भी किया है तब भी उन्हें थकान महसूस होने लगती है।

5.साइलेंट अटैक

ज्यादा उम्र के लोगों में या फिर जिन्हें शुगर की बीमारी होती है उन्हें ज़्यादातर साइलेंट अटैक आता है।इन रोगियों में सीने में दर्द के स्थान पर सांस फूलने,घबराहट और अपच की शिकायत होती है।पेट में भारीपन व अपच की दिक्कत को अक्सर लोग गैस के साथ जोड़ते हैं जो की कुछ रोगियों में हार्ट अटैक का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है।डॉक्टर अवधेश के मुताबिक पेट की अपच को गैस के साथ न जोड़ें और अगर यह दिक्कत बार-बार हो रही है व आप उच्च रक्तचाप या शुगर के मरीज़ हैं तो अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श करें।

इसे भी पढ़ें : दिल की धड़कन का अचानक घटना-बढ़ना क्या सामान्य समस्या है? डॉक्टर से जानें ऐसी स्थिति के खतरे और सावधानियां

सावधानियां (Precautions)

जो मरीज ट्रिपल वेसल डिजीज से पीडित हैं उन्हें ये सावधानियां बरतनी चाहिए-

1.स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाएं

डॉक्टर शर्मा के मुताबिक ऐसे मरीजों को ज्यादा घी, तेल या चिकनाई वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खासतौर से सैचुरेटिड फैट जो कि रूम टेम्परेचर पर जम जाता है, जैसे कि देसी घी, डालडा। इन सबका सेवन कम करना चाहिए। दूसरा ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें बार-बार एक ही तेल में पकाया गया है। ऐसे तेल में ट्रांस फैटी एसिड बन जाते हैं वो ट्रांस फैटी एसिड हार्ट की नसों के लिए बहुत ज़्यादा नुकसानदायक हैं एवं इन्हें बिल्कुल नहीं खाना चाहिये।फ़ास्ट फ़ूड व मैदे से बनी चीज़ों के ज़्यादा सेवन से बचना चाहिये।

2.हरी पत्तेदार सब्जियां और डार्क रंग के फलों का ज़्यादा सेवन करें

ट्रिपल वेसल डिजीज से पीड़ित व्यक्ति को हरी पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए और ऐसे फल खाने चाहिए जिनका की रंग गाढ़ा हो जैसे कि स्ट्रॉबेरी और काले अंगूर।

3.ड्राई फ्रूट्स खाएं

ऐसे मरीजों को रोज एक अंजुली ड्राई फ्रूट्स खाना चाहिये। ड्राई फ्रूट्स में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स होते हैं, जो कि दिल के लिए स्वास्थ्यवर्धक हैं। 

insidehealthydiet

4.रेड मीट से बनाएं दूरी

दिल के मरीजों को मटन और अंडे की जर्दी को नजरअंदाज करना चाहिए। यह कॉलेस्ट्रेल से भरपूर होता है। दिल के रोगियों को मछली का सेवन करना चाहिये क्योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो की दिल के लिए अच्छा होता है।

5.तंबाकू और धूम्रपान से बचें 

दिल को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि तंबाकू और स्मोकिंग से बचना चाहिए। इन नशीले पदार्थों का सेवन खून को गाढ़ा कर देता है जिससे की थक्का जम जाता है व हृदय की ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है। इसका नतीजा हार्ट अटैक होता है। 

6.तनाव कम लें

ऐसे लोग जो तनाव ज्यादा लेते हैं उन्हे दिल की बीमारियां जल्दी होती हैं। इसलिए डॉक्टरों का मानना है कि लोगों को तनाव नहीं लेना चाहिए। 

7.व्यायाम व योग को दिनचर्या में शामिल करें

विभिन्न शोधों में यह निकल कर आया है कि अगर आप 30 मिनट रोज़ किसी भी तरह का व्यायाम अथवा योग करते हैं तो हार्ट अटैक का ख़तरा काफ़ी कम हो जाता है।इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन व्यायाम अथवा योग करना चाहिए।

8.वजन को नियंत्रित रखें

मोटापा हृदय रोगों का एक बढ़ा कारण है।डा० शर्मा के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपना वज़न नियंत्रित रखना चाहिए।

हार्ट अटैक तब आता है जब हृदय को खून पहुंचाने वाली तीनों धमनियों में से कोई एक रुक जाती है। ट्रिपल वेसल डिजीज में तीनों नसें बंद हो जाती हैं जिसके कारण सांस फूलना,सीने में दर्द होना,घबराहट व थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।नियमित दिनचर्या,स्वस्थ आहार व व्यायाम के द्वारा इससे बचा जा सकता है।आधुनिक समय में इलाज की बेहतर तकनीकों के द्वारा समय रहते इसका इलाज सम्भव है इसलिये लापरवाही बिल्कुल भी ना करें व समय रहते अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें एवं रोग की समयपूर्व पहचान के लिये नियमित जाँचें कराते रहें।

Read more articles on Heart-Diseases in Hindi

Disclaimer