National Wear Red Day: महिलाएं कैसे रखें अपने दिल का ख्याल? डॉक्टर से जानें दिल की सेहत के लिए 8 जरूरी टिप्स

नेशनल वियर रेड डे (National Wear Red Day) अमेरिका में मनाया जाने वाला एक खास दिन है। यह दिन महिलाओं के हृदय रोगों के प्रति जागरुकता को बल देता है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Feb 05, 2021
National Wear Red Day: महिलाएं कैसे रखें अपने दिल का ख्याल? डॉक्टर से जानें दिल की सेहत के लिए 8 जरूरी टिप्स

नेशनल वियर रेड डे (National Wear Red Day) अमेरिका में मनाया जाने वाला एक खास दिन है। इस दिन की खासियत यह है कि यह दिन महिलाओं के दिल से संबंधित बीमारियों को लेकर जागरुक करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन हर साल अमेरिका में फरवरी के पहले शुक्रवार को मनाया जाता है। इस दिन अमेरिकन महिलाएं लाल रंग पहनती हैं। अब ये लाल रंग कपड़े, जूते, लिप्सटिक, आइलाइनर, गहने, टोपी कुछ भी हो सकता है। भारत में भी हृदय रोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। उसमें भी हम जानते हैं कि महिलाएं घर की धड़कन होती हैं लेकिन खुद अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखती हैं। महिलाएं अपने दिल का ख्याल कैसे रख सकती हैं, इसके बारे में हमने बात की राजकीय हृदय रोग संस्थान, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. अवधेश शर्मा से। 

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अवधेश शर्मा के मुताबिक, आमतौर पर लोग यह मानकर चलते हैं कि  पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं में हार्ट अटैक की सम्भावना न के बराबर  होती है, जबकि यह सच्चाई नहीं है। यह तथ्य पूरी तरह से गलत है। आज स्त्री और पुरुष दोनों में हृदय रोगों की संख्या समान स्तर पर बढ़ रही है। लेकन फिर भी सतही तौर पर दोनों के हार्ट अटैक के लक्षणों में काफी अंतर है। 

महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले होते हैं अलग लक्षण

1. स्त्रियों में पुरुषों की तुलना में सीने में तेज दर्द की बजाय हल्का दर्द या छाती में भारीपन मिलता है

2. जल्दी थकान होना

3. पेट का फूलना

4. घबराहट या बेचैनी होना

5. सांस का फूलना व हल्का दर्द होना

महिलाएं करती हैं लक्षणों को नजरंदाज

डॉक्टर शर्मा के मुताबिक, असामान्य लक्षणों के कारण ज़्यादातर महिलाएं हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं व रोग की गम्भीरता बढ़ने पर ही डॉक्टर से पास जाती हैं जो कि इलाज में देरी का कारण बनता है। कई शोधों में यह पाया गया है कि ज्यादातर महिलाएं हार्ट अटैक पड़ने के बाद गोल्डन आवर (golden hour) जो की इलाज के लिए बहुत जरूरी होते हैं, के निकलने के बाद ही अस्पताल पहुंचती हैं।

एस्ट्रोजन हार्मोन करता है बचाव

डॉक्टर के अनुसार, महिलाओं में हार्ट अटैक की समस्या आमतौर पर लगभग 40 साल की उम्र के बाद ज्यादा दिखती है। यह वह समय होता है जब महिला की माहवारी यानी पिरियड्स खत्म  हो चुके होते हैं। युवावस्था में एस्ट्रोजन हार्मोंस की अधिकता के कारण हार्ट अटैक की सम्भावना पुरुषों की तुलना में काफी कम होती है।एस्ट्रोजन को ब्यूटी हार्मोन भी कहा जाता है।कई सारे प्रकाशित शोधपत्रों में यह निकलकर आया है कि महिलाओं में 45 वर्ष की उम्र के बाद हार्मोनल गड़बड़ी की वजह से हार्ट की बड़ी धमनियों में रुकावट की बजाय छोटी-छोटी आर्टरीज़ में ज़्यादा रुकावट होती है जिस कारण इनमें हार्ट अटैक के असामान्य लक्षण व सीने में हल्का दर्द होता है।

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महिलाएं ऐसे रखें दिल का ख्याल-How Women Should Take Care Of Their Heart Health in Hindi

1-हार्ट अटैक के लक्षणों को नज़रंदाज़ बिल्कुल भी ना करें।

2-माहवारी ख़त्म होने के बाद साल में कम से कम एक बार अपना रूटीन चेक अप जैसे कि बीपी,कोलेस्ट्राल,ब्लड शुगर ,ईसीजी ज़रूर कराएं।

3-स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

4-खुश रहें  और तनाव न लें।

5-हरी सब्ज़ियों व ड्राई फ़्रूट्स का सेवन ज़्यादा से ज़्यादा करें।

6-शारीरिक रूप से एक्टिव रहें। व्यायाम और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

7-तम्बाकू और धूम्रपान का सेवन ना करें।

8-अपने वजन को नियंत्रित रखें व मोटापे से बचें।

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क्यों खास है ये दिन

इस दिन के मार्फत महिलाओं को हृदय रोगों के प्रति जागरुक किया जाता है। अमूमन महिलाएं खुद की सेहत को लेकर गंभीर नहीं रहतीं। और हृदय से जुड़ी बीमारियां गंभीर होती हैं। इसलिए जरूरी है इस तरह के विशेष दिनों का सेलिब्रेट होना। निम्न कारणों से खास है ये दिन।

महिलाएं हमारे लिए खास हैं

महिलाएं घर की लाइफलाइन होती हैं। लेकिन घर के अन्य सदस्यों का ख्याल रखने के कारण खुद की सेहत पर ध्यान देना भूल जाती हैं। लेकिन अगर महिलाएं न हों तो यह दुनिया नहीं चल पाएगी। इसलिए जरूरी है कि महिलाएं खुद का और के अन्य सदस्यों को भी उनका ख्याल रखना चाहिए। ताकि यह दुनिया और खूबसूरत बन सके।

ज्ञान ही शक्ति है

नेशनल वियर रेड डे लोगों को हृदय रोगों के प्रति जागरुक करने का दिन है। अगर परिवार और महिलाएं दिल के रोगों के प्रति जागरुक रहेंगी तो यह परेशानी बढ़ेगी नहीं। एक आंकड़े के मुताबिक अमेरिका में हर तीन में से एक महिला हृदय रोग से पीड़ित है। इसलिए जितनी जागरुकता महिलाओँ में होगी उतना वे खुद का ख्याल रखेंगी।

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रोकथाम ही दवा है

दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों के लिए जरूरी है कि उनके रोकथाम पर बात की जाए। बहुत से लोगों में शुरूआती लक्षण दिखने पर पहचान ही नहीं पाते कि यह दिल से जुड़ा मामला है। इसलिए हृदय रोगों के प्रति जागरुकता जरूरी है।

नेशनल रेड वियर डे के मार्फत अमेरिका में महिलाओं के हृदय रोगों के प्रति जागरुक किया जाता है। दिल का मामला सिर्फ अमेरिका में नहीं बल्कि दुनिया भर में गंभीर समस्या है। खासकर महिलाओं को खुद के हृदय रोगों के प्रति अधिक जागरुक होने के जरूरत है।

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