झोलाछाप डॉक्टर की एक छोटी गलती ने कैसे खराब कर दी 'ब्रेन टीबी' के मरीज की हालत, उन्हीं से जानें पूरी कहानी

सिरदर्द की समस्या कब गंभीर हो जाए पता नहीं चलता है। इसलिए छोटी से छोटी परेशानी को नजरअंदाज न करें।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Apr 15, 2021Updated at: Apr 15, 2021
झोलाछाप डॉक्टर की एक छोटी गलती ने कैसे खराब कर दी 'ब्रेन टीबी' के मरीज की हालत, उन्हीं से जानें पूरी कहानी

गंभीर बीमारी कब दस्तक दे जाए किसी को मालूम नहीं। इसलिए हमें अपनी हर एक छोटी से छोटी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कभी-कभी यह छोटी समस्याएं ही गंभीर रूप ले लेती हैं। हम में से कई ऐसे लोग हैं, जो अपने सिर दर्द की परेशानी को अनेदखा कर देते हैं और छोटी-मोटी दवाईयां लेकर सिरदर्द की परेशानी को दबाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सिरदर्द हमेशा नॉर्मल हो ये जरूरी नहीं। कभी-कभी यह सिर दर्द गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं। ठीक ऐसा ही पूजा मिश्रा के साथ हुआ। पूजा मिश्रा के पति प्रकाश मिश्रा बताते हैं कि उनकी पत्नी को बीच-बीच में कई बार सिर दर्द हुआ, जिसे वे यह सोचकर इग्नोर कर देते थे कि वर्क लोड की सिरदर्द की परेशानी हो रही होगी। वहीं, इस बारे में पूजा बताती हैं कि सिरदर्द होने पर वह कुछ समय आराम कर लेती थीं, जिसके बाद सिरदर्द कम हो जाता था। इसलिए उन्होंने दवाई लेना या फिर किसी डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं समझा। धीर-धीरे इस सिरदर्द की वजह से उनकी शारीरिक कमजोरी बढ़ने लगी और एक दिन अचानक से फीवर आ गया, जिसके बाद वह अपने नजदीक के बंगाली डॉक्टर के पास पहुंची? चलिए आगे नजर डालते हैं इस पूरी घटना पर-

बंगाली डॉक्टर से दिखाने पर क्या हुआ?

शारीरिक कमजोरी और फीवर होने पर पूजा बंगाली डॉक्टर के पास गई। जहां पर उनका ब्लड टेस्ट करवाया गया। पूजा के हसबैंड के मुताबिक, ब्लड टेस्ट में कंफर्म टाइफाइड नहीं बताया गया था, फिर भी बंगाली डॉक्टर ने उनकी वाइफ को टाइफाइड की दवाइयां और इंजेक्शन लिख दी। टाइफाइड की करीब 3 इंजेक्शन लगने के बाद पूजा को काफी ज्यादा उल्टियां होने लगीं और वे अचानक से बेहोश हो गई। परिवार के सभी सदस्य घबरा गए। जिसके बाद उन्हें समझ नहीं आया कि वे क्या करें। इसके बाद उन्होंने बंगाली डॉक्टर की दवाई बंद कर दी और दूसरे हॉस्पिटल ले गए। 

दूसरे हॉस्पिटल में निकला ब्रेन में सूजन?

पूजा के हसबैंड प्रकाश बताते हैं कि बंगाली डॉक्टर से दिखाने के बाद पूजा का स्वास्थ्य और ज्यादा खराब हो गया था। बुखार होने के साथ-साथ पूजा बेहोश हो चुकी थीं और उन्हें जरा सा भी होश नहीं था। जिसके बाद वे उन्हें पास के हॉस्पिटल में ले गए। इस हॉस्पिटल में जाते ही उन्हें एडमिट कर लिया गया। एडमिट होने के बाद पूजा का ब्लड टेस्ट और एमआरआई किया गया, जिसमें डॉक्टर ने बताया कि उन्हें ब्रेन में सूजन है। यानि पूजा को टाइफाइड नहीं था, फिर भी उन्हें टाइफाइड का इंजेक्शन लग रहा था। यह स्थिति काफी खतरनाक हो सकती थी, लेकिन समय रहते पूजा के हसबैंड उन्हें हॉस्पिटल ले गए। इसके बाद कई अन्य टेस्ट किए गए, जिसमें ब्रेन में सूजन का कारण ब्रेन टीबी बताया गया। इस हॉस्पिटल में करीब 7-8 दिन पूजा का इलाज चला लेकिन स्वास्थ्य में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि हॉस्पिटल में कोई अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट नहीं थे। काफी दिनों तक एडमिट होने के बाद उसी हॉस्पिटल के डॉक्टर ने उन्हें सजेस्ट किया कि वह किसी अच्छे न्यूजोलॉजिस्ट से उन्हें दिखाए। जिसके बाद पूजा के हसबैंड उन्हें नोएडा स्थित न्यू (Neo) हॉस्पिटल ले गए।

किस तरह स्थिति में आई सुधार ?

पूजा के हसबैंड जब उन्हें न्यू (Neo) हॉस्पिटल ले गए, तो वहां के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर राजीव मोटानी ने उन्हें एडमिट करने की सलाह दी। क्योंकि अभी भी उनकी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं था। एडमिट होने के बाद यहां काफी टेस्ट किए गए, जिसमें बताया गया कि पूजा की स्थिति काफी गंभीर है और उनके मस्तिष्क में कई गांठ बन चुकी हैं। प्रकाश के मुताबिक, डॉक्टर मोटानी ने उन्हें बताया कि पिछले हॉस्पिटल में दिए गए हैवी डोज की वजह से पूजा की स्थिति गंभीर हुई है। इसलिए उनकी स्थिति को सुधारने में करीब 1 साल का वक्त लगेगा। इस हॉस्पिटल में करीब 4 से 5 दिन तक पूजा का इलाज चला। जिसके बाद उनकी हालत में काफी सुधार देखने को मिला। करीब 2 माह से पूजा का इलाज चल रहा, जिसमें उनकी स्थिति में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। 3 महीने से बिस्तर पर लेटी पूजा, आज अपने घर के छोटे-मोटे काम भी कर रही हैं और लोगों से बातचीत भी कर पा रही हैं। 

ब्रेन टीबी का 1 साल तक क्यों चलेगा इलाज? 

प्रकाश के मुताबिक, डॉक्टर का कहना है कि पूजा की हालत काफी गंभीर है। इसलिए उनकी बॉडी को रिकवर होने में काफी वक्त लगेगा। पहले दिए गए हैवी डोज की वजह से उनकी बॉडी काफी कमजोर हो चुकी है, जिसके कारण वे टीबी की दवाइयों को झेल नहीं सकेंगी। इसलिए करीब 6 महीने तक उनके शारीरिक स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की जाएगी। उसके बाद जब पूजा की शारीरिक स्थिति सुधर जाएगी, तब उनका 6 महीने तक टीबी का इलाज चलेगा।

1 साल तक क्या सावधानी है बरतनी?

  • दोबारा सिरदर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • अगर फीवर उतर गया हो और दोबारा फीवर आ जाए, तो बिना देरी के डॉक्टर के पास जाएं।
  • उल्टी या फिर किसी तरह की कमजोरी महसूस होने पर देरी न करें। डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।

रिकवरी होने के लिए पूजा को क्या दी सलाह?

ब्रेन टीवी या फिर टीबी की शिकायत होने पर ठंडी चीजें न खाने की सलाह दी जाती है। पूजा को भी डॉक्टर द्वारा कुछ इसी तरह की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं उसके बारे में-

  • वात करने वाली चीजें न खाएं (उड़द दाल, बैंगन, भिंडी इत्यादि)
  • फ्रिज का पानी न पिएं।
  • बाहर की चीजों का सेवन न करें।
  • तली-भुनी चीजों से दूर रहें।
  • दही भले ही ठंडा आहार है, लेकिन डॉक्टर ने पूजा को दही खाने की सलाह दी है। 
  • शराब-सिगरेट से दूर रहें।
  • नियमित रूप से हल्के-फुल्के एक्सरसाइज न करें।
  • हैवी वर्क लोड न लें।
  • शरीर को अधिक से अधिक आराम दें।

किस तरह के एक्सरसाइज करती हैं पूजा?

  • डीप ब्रीथिंग
  • खाने के बाद 10 मिनट टहलना
  • अनुलोम-विलोग 
  • प्राणायाम जैसे हल्के फुल्के एक्सरसाइज 

ओन्लीमाई हेल्थ द्वारा इस स्टोरी को लिखने का मकसद यह है कि शरीर में दिखने वाले छोटे-मोटे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। क्योंकि यह हल्के-फुल्के लक्षण गंभीर रूप धारण कर सकते हैं। साथ ही कभी भी झोलाछाप बंगाली डॉक्टर से अपना ट्रीटमेंट न लें। क्योंकि ऐसा करने से आपकी स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। हमारे सामने कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें बंगाली डॉक्टर के कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसलिए अपनी सेहत को लेकर सतर्क और सुरक्षित रहने की कोशिश करें।  

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