मॉडर्न लाइफस्टाइल के कारण लोग हो रहे हैं इन गंभीर बीमारियों का शिकार, जानें पुराने लोग क्यों रहते थे स्वस्थ

झाड़ू लगाने, झुककर पोछा लगाने, आटा गूंथने और हाथों से कपड़े धोने से अनचाहे में हो जाती है एक्सरसाइज। जानें इससे किन बीमारी से होता है बचाव।

Satish Singh
Written by: Satish SinghPublished at: Aug 12, 2021Updated at: Aug 12, 2021
मॉडर्न लाइफस्टाइल के कारण लोग हो रहे हैं इन गंभीर बीमारियों का शिकार, जानें पुराने लोग क्यों रहते थे स्वस्थ

आधुनिकता ने दुनिया को छोटा कर दिया है और लोगों को आलसी बना दिया है। इसी के कारण महिलाएं ज्यादातर घर के काम मशीन से करतीं हैं और शरीर को आराम देतीं हैं। लेकिन यह आराम शरीर को बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। जमशेदपुर में कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम की स्त्री रोग विशेषज्ञ विनिता सहाय ने बताया - आधुनिकता के कारण महिलाओं ने फिजिकल वर्क कम कर दिया है। मशीन पर ही ज्यादातर काम करतीं हैं। जैसे मसाला पीसना, झाड़ू-पोछा लगाना, बैठ कर खाना पकाना, कपड़ा धोना आदि कार्यों में महिलाएं मशीन का ज्यादा इस्तेमाल करतीं है। इससे फिजिकल वर्क बहुत ही ज्यादा कम होता है। इन्हीं आधुनिकता के कारण महिलाओं को कई प्रकार की बीमारी होती है। आइए इस आर्टिकल में हम जानते हैं कि मशीनों पर ज्यादा निर्भर होने के कारण लोगों को क्या-क्या नुकसान उठाना पड़ रहा है, किन-किन बीमारियों के होने का खतरा अधिक है। जानने की कोशिश करते हैं कि मॉर्डन लाइफस्टाइल ज्यादा बेहतर है या फिर वही पुरानी लाइफस्टाइल पर सिलपट्टे पर मसाला पीस खाने का स्वाद भी आता था और एक्सरसाइज भी होती थी। मां जिस छोटे बैट से कपड़े की धुलाई करती थी उससे भी उनकी एक्सरसाइज हो जाती थी। 

मशीनों पर निर्भर होने से इन बीमारियों का है खतरा

वैसी महिलाएं और पुरुष जो शारिरिक परिश्रम करने की बजाय मशीनों पर ज्यादा निर्भर हैं उन्हें कई प्रकार की बीमारी हो सकती है। डॉ. विनिता सहाय बताती हैं कि इसके कारण पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम-डिसऑर्डर), डायबिटीज, मोटापा, ब्लड प्रेशर, हार्ट का प्रॉबल्म, जोड़ों का दर्द, पीठ का दर्द, घुटने का दर्द आदि समस्याएं हो सकती है। पहले के दौर में यह बीमारियां महिलाओं-पुरुषों को होती थी, लेकिन जब वो बुजुर्ग हो जाते थे तब उन्हें इस प्रकार की समस्याएं झेलनी पड़ती थी। लेकिन अब ऐसी दिक्कतें युवा अवस्था से लेकर मीडिल एज ग्रुप के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। जो काफी खतरनाक है। महिलाएं अगर घर में काम नहीं करतीं हैं तो कम से एक्सरसाइज या योग कर लिया करें अगर एक्सरसाइज नहीं करतीं हैं तो घर का काम जरूर करें क्योंकि बीमारियों से बचने के लिए शरीर को फिजिकल रूप से व्यस्त रखना बहुत जरूरी है। पीसीओडी होने से पीरियड बंद हो जाता है, मोटापा बढ़ जाता है। चेहरे पर बाल आ जाते हैं। मेल टाइप डिस्ट्रीब्यूशन और प्रभाव चेहरे पर दिखने लगता है। इसके साथ महिलाओं को अपना खानपान भी सुधारना चाहिए।

झाड़ू-पोछा लगाने से बेली फैट होती है कम

डॉक्टर बताती हैं कि झाड़ू-पोछा लगाने से पूरी बॉडी की एक्सरसाइज होती है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलता है। अगर हम झाड़ू-पोछा फर्श पर बैठकर लगाते हैं तो इससे शरीर की कैलोरी बर्न होती है। इसी कैलोरी को कम करने के लिए आप जिम में हजारों रुपए खर्च करते हैं। इसके दो फायदे हैं एक घर भी साफ हो जाता है और शरीर का भी व्यायाम हो जाता है। जिनकी कमर के आसपास बहुत ज्यादा फैट है और वो नियमित तौर पर पोछा लगातीं हैं तो उनका फैट कम हो जाएगा। इससे कमर की एक्सरसाइज होती है और मोटापा कम होता है। आज के दौर में लोग घरों में नौकरानी लगाते हैं। पुरुष-महिला दोनों ही वर्किंग होने के कारण उनमें से कोई भी घर के काम-काज को नहीं कर पाता। इसके अलावा पोछा लगाने के लिए वाइपर सहित स्टिक वाले पोछे बाजार में उपलब्ध हैं। जिन्होंने लोगों को आलसी और कामचोर बनाने के साथ बीमारी भी दे रहे हैं। यह सही है कि वाइपर और स्टिक वाले पोछे का इस्तेमाल करने पर मेहनत कम लगने के साथ काम आसानी से हो जाता है। लेकिन कहीं न कहीं हम अपने शरीर के साथ अन्याय कर रहे होते हैं।

kneading dough

आटा गूंथने से भी होती है एक्सरसाइज

आटा गूंथने से हाथ को मजबूती और ताकत मिलता है। आटा गूंथना एक तरह का एक्सरसाइज है। अगर आपके पास डंबल्स नहीं या आप जिम नहीं जा रहीं हैं तो आटा गूंथिए। इससे हाथों का एक्सरसाइज होता है। बाइसेप्स बनता है। हाथों में मजबूती आती है। खासकर आटा गूंथने से कलाई में पॉवर आती है। जिम में जो रिस्ट का एक्सरसाइज करते हैं, वो आटा गूंदने से भी हो जाएगी। लोअर मीडिल क्लास के लोग घरों में आज भी आटा गूथते हैं, लेकिन अपर मीडिल क्लास के लोग इसके लिए भी मशीनों पर ही निर्भर हैं। आधुनिकता का ही असर है कि आज के दौर में जिनके पास पैसे हैं वो आटा गूथने वाली मशीन खरीद लेते हैं, इससे आटा खुद ब खुद गुथने के साथ रोटी भी बनकर तैयार हो जाती है। इससे न केवल समय का बचत होता है बल्कि मेहनत भी नहीं लगता है। लेकिन यही मेहनत न करना लोगों को बीमार कर रहा है।

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Grinding

सिलबट्टे पर मसाला पीसना, या हाथ चक्की चलाना

पहले के समय माताएं घर में दाल पीसना हो तो जात-हाथ चक्की (अनाज पीसने की पारंपरिक मशीन) का इस्तेमाल करतीं थीं। इससे भी अच्छी एक्सरसाइज हो जाती थी। वहीं सिलबट्टे पर मसाला पीसने से न केवल खाना स्वादिष्ट बनता था बल्कि चाहे अनचाहे में फुट, हैंड की अच्छी एक्सरसाइज भी हो जाती थी। लेकिन आजकल लगभग सभी के घर में मसाला पीसने के लिए मिक्सर है। आधुनिक उपकरों की वजह से ही लोग आलसी हो गए हैं। ओखली और सील पर मसाला पीसने से बॉडी एक खास पोजिशन पर रहती है। मसाला पीसने से हाथों का मूवमेंट होता है। इससे हाथों को मजबूती मिलती है। शरीर में ब्लड फ्लो भी अच्छा रहता है। वहीं सिलबट्टे पर मसाला पीसना आसान भी नहीं है, यह मेहनत का काम है। 

कपड़े धोने के फायदे

बचपन के उन दिनों को याद कर आज भी आप दोस्तों के बीच चर्चा करते होंगे कि मां जिस बैट से कपड़े की धुलाई करती थी, उसी बैट से जब हम गलती करते थे तो धुनाई भी कर देती थी। खैर कपड़े धोने की यह परंपरा भी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। आजकल तो लोग मॉर्डन वॉशिंग मशीन पर निर्भर हो रहे हैं। इस कारण ज्यादातर महिलाएं ज्यादा वजन की समस्या जूझ रही है। ऐसा फिजिकल एक्टिविटी नहीं करने के कारण होता है। लेकिन आप अपने हाथ से कपड़ा धोएंगे तो आपका वजन कम हो सकता है। कपड़ा धोने में बहुत सारी एनर्जी की जरूरत होती इसके कारण आपकी बहुत सारी कैलोरी बर्न होती है। एक घंटे में 100 से भी ज्यादा कैलोरी बर्न कर सकती हैं। सप्ताह में एक बार या दो बार अगर आप हाथ से कपड़ा धोएंगे तो आपके पूरे शरीर एक्सरसाइज हो जाएगी। यह एक तरह का फुल बॉडी वर्कआउट है क्योंकि इस वर्कआउट में बाल्टी के उठाने से बाजुओं में हरकत होगी। कपड़ों को धोने, निचोड़ने और सुखाने में फुल बॉडी एक्सरसाइज होती है। इन सारी चीजों को करने से शरीर के कई पार्ट काम करते हैं। इसलिए कपड़े धोने को हम फुल बॉडी एक्सरसाइज कह सकते हैं। लेकिन आज मॉर्डन वॉशिंग मशीन में कपड़ा व डिटर्जेंट डालिए, कपड़ा अपने आप धुल भी जाएगा, सूख भी जाएगा। इसमें लोगों को मेहनत करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। 

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बैठकर बनाए खाना 

आधुनिक युग में ज्यादातर घरों में मॉड्यूलर किचन है। महिलाएं खड़े होकर खाना बनाती हैं। लेकिन आपको पता है खड़े होकर खाना बनाने से पीठ में दर्द, घुटने में दर्द, कमर दर्द की समस्या होती है। क्योंकि अधिक देर तक एक पुजिशन में खड़े होने से मांसपेशियों में खिंचाव होता है, जिससे दर्द होता है। वहीं बैठकर खाना बनाने से ऐसी समस्याएं नहीं होती हैं। शहरों ज्यादातर महिलाएं कमर दर्द की समस्या से जूझती हैं। डॉ. विनिता बताती हैं कि कमर दर्द की समस्या को लेकर हमारे पास ग्रामीण महिलाओं की तुलना में शहरी महिलाएं ज्यादा आती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में महिलाएं आज भी खेती का काम संभालने के साथ घर का काम संभालती हैं। वहीं वो आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल भी कर करतीं हैं। इससे उनमें बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। ग्रामीण महिलाओं में कमर दर्द नहीं होने का कारण यह भी है कि वो कोई भी काम बैठकर करती हैं, जैसे कि सब्जी काटने से लेकर सब्जी व खाना बनाने का काम वो बैठकर ही करती हैं। इससे बार-बार उठने और बैठने के कारण चाहे-अनचाहे में महिलाओं की एक्सरसाइज हो जाती है। 

आप जितना कम मेहनत करेंगे उतनी जल्दी बीमार पड़ेंगे

आपने नोटिस किया होगा कि पुरुषों के साथ महिलाएं भी अब पहले की अपेक्षा कम काम करती हैं। लोगों को अपना ही काम करने में शर्म महसूस होता है। उदाहरण के तौर पर कहीं बाजार गए तो सामान को कार में रखवाने के लिए दुकानदार को बोलते हैं, यात्रा कर रहे हैं तो कुली करते हैं। थोड़ी दूर भी जाने के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। यह तमाम चीजें हमें मेहनत करने से रोकती हैं। लेकिन आप जितना ज्यादा मेहनत नहीं करेंगे उतना ही अधिक बीमार पड़ने की संभावना बढ़ेगी। कुल मिलाकर अगर हमें मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज इत्यादि बीमारी से बचना है तो घरेलू काम खुद से करें। मशीन या मेड के सहारे नहीं रहे।

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