इन 4 योगासनों से अपने रीढ़ की हड्डी को बनाएं मजबूत और लचीला, अन्य अंगों के लिए भी हैं बहुत फायदेमंद

योगा कर रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाएं। ताकि इससे जुड़ी बीमारियों से बच सकें। जानें एक्सपर्ट राय।

Satish Singh
Written by: Satish SinghUpdated at: Aug 09, 2021 17:12 IST
इन 4 योगासनों से अपने रीढ़ की हड्डी को बनाएं मजबूत और लचीला, अन्य अंगों के लिए भी हैं बहुत फायदेमंद

शरीर के प्रत्येक अंग की अपनी अगल अहमियत होती है। रीढ़ की हड्डी (स्पाइन ) इंसानी शरीर को खड़ा रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिनभर घर में बैठ कर काम करने वाली महिलाएं या फिर पुरुषों की रीढ़ झुक जाती है और ऐसे में ये आगे चलकर कमजोर हो जाती है। इसके लिए हमेशा एक घंटा रीढ़ से संबंधित योगाभ्यास करना चाहिए। रीढ़ को मजबूत करने वाले योगाभ्यास को करने से तनाव भी कम होता है, क्योंकि स्पाइनल कॉर्ड से नर्वस सिस्टम और ब्रेन जुड़ा है। घर पर काम करने के दौरान सबसे ज्यादा असर कमर, पीठ, रीढ़ की हड्डी और हाथों पर पड़ता है। वैसे इन्हें मजबूत बनाने के लिए हम कई योगासन कर सकते हैं। लेकिन इस कड़ी में हम रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए हम आपको 4 योगासन के बारे में बताएंगे जो रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाती है। इन पांच आसन के बारे में देश के प्रसिद्ध योग प्रशिक्षक और टाटा स्पोर्ट्स जेआरडी कांप्लेक्स में बतौर योग टीचर दे रहे अरविंद कुमार से जानेंगे इन आसनों को कैसे किया जाए।

Bhunjangasana

भुजंगासन से रीढ़ की हड्डी होती है मजबूत, रीढ़, बाजू और कमर में आता है खिंचाव

योग प्रशिक्षक अरविंद ने बताया-  इस योग्भ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। रीढ़, बाजू और कमर में खिंचाव आता है। हाथ और कमर को भी बल मिलता है। इसे कम से कम 10 मिनट करना चाहिए। इस योगासन को करने के लिए सूर्य की दिशा में मुंह कर पेट के बल मैट पर लेट जाएं। हाथों को मैट पर रखें और धीरे-धीरे शरीर के आगे के हिस्से को सांप की तरह उठाएं। कुछ देर तक इसी तरह पुजिशन बनाए रखें । फिर वापस उसी अवस्था में आ जाएं। यदि आप पहली बार योगाभ्यास को कर रहे हैं तो बेहतर यही होगा कि आप एक्सपर्ट की निगरानी में ही आसन को करें। नहीं तो इससे कई तरह की परेशानी भी हो सकती है।Paschimotasana

पश्चिमोत्तानासन से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है

पश्चिमोत्तानासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। यह आसन दो शब्द मिलकर बना है -‘पश्चिम’ का अर्थ होता है पीछे और ‘उत्तांन’ का अर्थ होता है तानना। इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर का पिछला भाग तन जाता है जिसके कारण इसका नाम पश्चिमोत्तानासन दिया है। इससे रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है।  बच्चे अगर इसे करते हैं तो उनकी लंबाई बढ़ती है। यह आसन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज़्यादा लाभदायक आसन है। विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए जमीन पर दोनों पैरों को एकदम सीधे फैलाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के बीच में दूरी न हो और पैर को सीधा रखें। गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें। इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों पर रखें। अब सिर और धड़ को धीरे से आगे की ओर झुकाएं और अपने घुटनों को बिना मोड़े हाथ से पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें। इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। सिर और माथे को दोनों घुटनों से छूने की कोशिश करें।

इसे भी पढ़ें : माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए 5 योगासन, योगा एक्सपर्ट से जानें करने का तरीका

मार्जरीआसन से पैदा हुआ खिंचाव रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाती है

मार्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी पर खिंचाव पड़ता है। इसे 10 से 20 बार कम से कम करना चाहिए। खिंचाव रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। आसन रीढ़ की हड्डी को फैलाने और मजबूत करने में भी मदद करता है। इस आसन को करने के लिए पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को फर्श पर आगे की ओर रखें। दोनों को हाथों भार डालते अपने हिप्स को ऊपर उठाएं। जांघों को ऊपर की ओर सीधा करके पैर के घुटनों पर 90 डिग्री का कोण बनाए। इसके बाद  एक लंबी सांस लें और अपने सिर को पीछे की ओर झुकाएं, अपनी नाभि को नीचे से ऊपर की तरफ धकेलें और टेलबोन को ऊपर उठाएं। अब सांस को बाहर छोड़ते हुए सिर को नीचे की ओर झुकाएं और ठुड्डी को अपनी छाती से लगाने का कोशिश करें।

सेतुबंधासन से मांसपेशियों और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है

यह आसन पीठ को मजबूत बनाने के लिए बेहद लाभकारी है। 4 बार इस आसन को दोहराएं। इस योगाभ्यास से रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, छाती, गर्दन सभी की स्ट्रेचिंग होती है। पीठ, हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों को मजबूत करता है। ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है। यह दिमाग को शांत करता है, ब्लॉकेज को भी खोलता है। तनाव कम करने में भी मदद करता है। इसे करने के लिए पहले पीठ के बल लेट जाएं। घुटनों को मोड़ें पैरों को जमीन पर एक दूसरे से कुछ दूरी पर रखें। पैर आपके पेट से 10-12 इंच दूर होने चाहिए। घुटनों और टखनों के साथ यह एक सीधी रेखा में रखें। बाजुओं को शरीर के अगल-बगल रखें और आपकी हाथ नीचे रखें। सांस को खींचे और कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। कंधों को इस क्रम में आराम से मोड़ें। ठुड्डी को नीचे लाए बिना छाती को ठुड्डी से छूएं। शरीर के वजन को कंधों, बाजुओं और पैरों की मदद से संतुलित करें। अपने कूल्हों और शरीर को इस पोज में लाने की कोशिश करें। दोनों जांघें एक-दूसरे के और जमीन के समानांतर रखें। इस क्रम में आराम से सांस लेते रहें। इस स्थिति में कुछ देर रहें और जब इस पुजिशन से बाहर निकलें तब सांस को बाहर छोड़ें।

इसे भी पढ़ें : सूर्य नमस्कार करने में अक्सर लोग करते हैं ये 5 गलतियां, जानें क्या हैं ये और क्यों इन्हें करने से बचें

हमेशा एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में ही करें योग

योग प्रशिक्षक बताते हैं कि कई लोगों को कई प्रकार की बीमारी होती है, किसी को सांस तो किसी को हड्डियों में फ्रैक्चर सहित अन्य रोग हैं। यदि कोई मरीज योगासन करे तो संभव है कि उसे हेल्थ इशू के कारण दिक्कत हो सकती है। इसलिए लोगों की कोशिश यही होनी चाहिए कि वो योगा एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में ही योग करें। यदि शरीर में किसी प्रकार की परेशानी है तो उसका इलाज करवाने के साथ एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही योग करें। नहीं तो फायदा होने की बजाय नुकसान हो सकता है।

Read More Articles on Diet and Fitness In Yoga

Disclaimer