Surrogacy Myths and Facts: कुछ वक्त पहले बॉलीवुड की डिंपल क्वीन प्रीति जिंटा ने सरोगेसी के जरिए मां बनने का खुलासा किया था। प्रीति जिंटा से पहले एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा, सनी लियोन और शिल्पा शेट्टी भी सरोगेसी से जरिए मां चुकी हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस ही नहीं देशभर के कई बड़े बिजनेस मैन भी पेरेंट्स बनने के लिए सरोगेसी को अपना चुके हैं। इस तरह हस्तियों को सरोगेसी के जरिए पेरेंट्स बनता देख लोगों के मन में कई तरह के सवाल आते हैं। इन सवालों का जवाब जानने के लिए लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं।
लेकिन कई बार इंटरनेट पर गलत जानकारी मौजूद होने के कारण लोग भ्रामक स्थिति में आ जाते हैं और परेशान हो जाते हैं। अगर आप भी सरोगेसी को लेकर किसी तरह के कंफ्यूजन में हैं, तो आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं, सरोगेसी से जुड़े 5 मिथक और उनकी सच्चाई। इस विषय पर ज्यादा जानकारी के लिए हमने गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आस्था दयाल से बात की।
मिथक 1 : सरोगेसी उन महिलाओं के लिए है जो बॉडी फिगर खराब नहीं करना चाहती हैं।
सच्चाई: डॉ. आस्था दयाल का कहना है कि यह बात बिल्कुल गलत है। जो महिलाएं मां बनने के लिए सरोगेसी का सहारा लेती हैं, वह संभवतः असल जिंदगी में बांझपन से जूझ रही होती हैं। एक्सपर्ट ने अनुसार, किसी भी महिला के लिए गर्भधारण करना और बच्चे को जन्म देना एक एहसास और व्यक्तिगत भावना है। यह कहना कि महिलाएं अपने फिगर को बचाने के लिए सरोगेसी का विकल्प चुनती हैं, पूरी तरह से मिथक है क्योंकि सरोगेसी का मतलब है कि एक महिला दूसरी महिला को माता-पिता बनने में मदद कर रही है।
इसे भी पढ़ेंः आईवीएफ से जुड़े इन 5 मिथकों पर आप भी करते हैं भरोसा? जानें इनकी सच्चाई
मिथक 2 : सरोगेट बच्चे के साथ बंधन बनाना मुश्किल होता है।
सच्चाई: सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली मां के लिए बच्चे के साथ संबंध कायम करना थोड़ा मुश्किल काम होता है। एक्सपर्ट का कहना है कि प्रेग्नेंसी पीरियड मां और बच्चे के बीच एक अनोखा बंधन बनाती है। हालांकि हर मामले में ये बात लागू नहीं होती है। हो सकता है सरोगेसी के जरिए पेरेंट्स बनने वाले कपल्स को शुरुआत में वक्त लगे, लेकिन वक्त के साथ यह समस्या खत्म हो जाती है।
इसे भी पढ़ेंः प्रेग्नेंसी में दृष्टि धामी ने भारी डंबल्स के साथ किया वर्कआउट, डॉक्टर से जानें क्या ऐसा करना है सेफ?
मिथक 3: सरोगेट मदर बच्चे को रख सकती है।
सच्चाई : सरोगेसी को लेकर यह तथ्य बिल्कुल गलत है। डॉक्टर की मानें तो सरोगेसी के जरिए पेरेंट्स बनने वाले लोग पहले ही दस्तावेज और कानूनी पेपर्स बनवा लेते हैं। इसलिए अगर सरोगेट मदर बच्चे को नहीं रख सकती है। हां यह बात सच है कि प्रेग्नेंसी बेहद भावनात्मक सफर है, खासकर तब जब आप एक सरोगेट मदर हैं और गर्भ में बच्चे को पाल रही हैं। लेकिन सरोगेट मदर्स बच्चे को उसके भावी माता-पिता से दूर करके अपने पास नहीं रख सकती है।
इसे भी पढ़ेंः नॉर्मल डिलीवरी में कितने टांके आते हैं? डॉक्टर से जानिए इसके बारे में
मिथक 4 : सरोगेट मदर बच्चे की जैविक मां होती है।
सच्चाई : नहीं, जिस कपल ने महिला को पेरेंट्स बनाने के लिए तैयार किया है, वही महिला बच्चे की मां होगी। सरोगेसी मुख्यतः दो तरह की होती है। पहला जेस्टेशनल सरोगेसी। इस प्रक्रिया में माता-पिता के शुक्राणु और अंडाणु का उपयोग किया जाता है, और फिर उसे सरोगेट के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यदि जेस्टेशनल सरोगेसी है, तो इच्छित मां बच्चे की जैविक माँ होती है, न कि सरोगेट मां, भले ही उसने उन्हें अपने गर्भ में बच्चे को रखा हो। हालांकि, पारंपरिक सरोगेसी में, पिता के शुक्राणुओं को सरोगेट मां के गर्भ में स्थानांतरित किया जाता है। इस स्थिति में सरोगेट मां ही बच्चे की जैविक मां हो।
प्रेग्नेंसी की तरह ही सरोगेसी उन सभी लोगों के लिए एक खूबसूरत प्रक्रिया है, जो किन्हीं कारणों से प्राकृतिक तरीकों से गर्भधारण करके पेरेंट्स नहीं बन पा रहे हैं। अगर आपके मन में सरोगेसी को लेकर कोई सवाल है, तो इसके बारे में डॉक्टर से बात करें।
Image Credit: Freepik.com