कंफ्यूज रहने वालों में कमजोर होती हैं ये नर्व सेल्स, जानें कौन सा ब्रेन तुक्का मारने में भी होता है जबरदस्त

मानसिक स्वास्थ्य को सही रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये आपकी हर गतिविधि यानी कि डिसीजन मेकिंग तक को प्रभावित कर सकता है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Oct 19, 2020 09:41 IST
कंफ्यूज रहने वालों में कमजोर होती हैं ये नर्व सेल्स, जानें कौन सा ब्रेन तुक्का मारने में भी होता है जबरदस्त

 हमारा मस्तिष्क हर फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया देता है, जिसमें वो अलग-अलग गति से अपनी रिएक्टिविटी दर्ज कराता है। इसी कारण हम लोग कुछ लोगों को एक्टिव और कुछ लोगों को स्लो समझ लेते हैं, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं होती है। इसी तरह डिसीजन मेकिंग में भी हमारे मस्तिष्क का एक बड़ा हाथ होता है। हाल ही में आया शोध डिसीजन मेकिंग और कंफ्यूजन में रहने वाले लोगों के मस्तिष्क के बारे में एक खास खुलासा करता है। इस शोध की मानें, तो डिसीजन मेकिंग यानी कि आपके निर्णय लेने की क्षमता और गति असल में हमारे न्यूरॉन की फायरिंग (Treatment of nervous system) रेट की गति से जुड़ा हुआ है। वो कैसे,  तो इस समझने के लिए आइए सबसे पहले जानते हैं ये शोध।

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डिसीजन मेकिंग को लेकर क्या कहता है ये शोध?

जर्मनी में बॉन विश्वविद्यालय ने इस विषय पर शोध किया है और ये बायोलॉजी करेंट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि कैसे तंत्रिका कोशिकाओं की पहचान करते हैं जो इस प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस शोध में पाया गया कि निर्णय लेने में विश्वास का स्तर न्यूरॉन की फायरिंग दर की गति से जुड़ा हुआ है। शोध बताता है कि कैसे मस्तिष्क के टेम्पोरल लोब के न्यूरॉन्स में विद्युत तरंगों की बढ़ी हुई आवृत्ति निर्णय लेने की क्षमता को गति देता है। वहीं ये व्यक्ति को डिसीजन मेकिंग में मदद करता है

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इस प्रयोग के लिए, शोधकर्ताओं ने 12 पुरुषों और महिलाओं को चुना और उन्हें दो अलग-अलग स्नैक्स की तस्वीरें दिखाईं, उदाहरण के लिए, एक चॉकलेट बार और चिप्स का एक बैग। फिर उन्हें एक स्लाइडर का उपयोग करने के लिए कहा गया था जो यह इंगित करने के लिए कि वे कौन से विकल्प खाएंगे? इस शोध के लेखक प्रोफेसर डॉ.फ्लोरियन मोरमैन की मानें, तो जितना अधिक वे स्लाइडर को अपने केंद्र की स्थिति से बाईं या दाईं ओर ले जाते हैं, उतना ही अधिक वे अपने निर्णय में स्लो और धीमे होते गए। प्रतिभागियों को इस तरह से कुल 190 अलग-अलग स्नैक जोड़ियों के बार में बताना था। उसी समय, वैज्ञानिकों ने दिमाग के इसी लोब में प्रत्येक में 830 तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि दर्ज की।

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क्या तंत्रिका कोशिकाएं आपके निर्णय लेने को प्रभावित कर सकती हैं?

वास्तव में इस शोध ने बताया कि कैसे कुछ लोगों का दिमाग चीजों को याद रख कर तुरंत प्रतिक्रिया देने में तेज रहा और कुछ लोगों को कमजोर। शोध में पता  चला कि कुछ न्यूरॉन्स में विद्युत दालों की आवृत्ति आसान शब्दों में समझें, तो उनकी फायरिंग रेट डिसीजन मेकिंग को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, जिन लोगों में न्यूरॉन्स की फायरिंग रेट (Nervous System Problems) तेज थी उनका दिमाग तेजी से काम करता था, वहीं जिन लोगों में ये प्रोसेस स्लो था वो कंफ्जून की स्थिति में बार-बार पहुंच रहे थे। वहीं जो इन दोनों के बीच में मध्यम गति वाले थे और उनका दिमागी बैकअप अच्छी था, वो तुक्के में चीजों को सही बता रहे थे।

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इस तरह ये शोध बताता है कि कैसे मानसिक गतिविधियों को करने में और निर्णय लेने में प्रभावित न्यूरॉन्स और मस्तिष्क के इस  क्षेत्र का बड़ा हाथ है। वहीं ये स्मृति प्रक्रियाओं को देने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं, जैसे कि दिमाग में चीजों को याद करके सही फैसले लेना। वहीं शोधकर्ताओं की मानें, तो पर अब भी इस विषय पर शोध की और जरूरत है पर तब तक आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को सही रखें और ब्रेन एक्सरसाइज करें।

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