सिजेरियन डिलीवरी के हो सकते हैं कई नुकसान, जानें इनके बारे में

आज के समय में जयादातर बच्चों का जन्म सिजेरियन डिलीवरी या सी सेक्शन के द्वारा हो रहा है, इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। जानें इसके नुकसान।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Oct 04, 2021
सिजेरियन डिलीवरी के हो सकते हैं कई नुकसान, जानें इनके बारे में

आज के समय में ज्यादातर बच्चों का जन्म ऑपरेशन के माध्यम से यानी सिजेरियन डिलीवरी के द्वारा होता है। सिजेरियन डिलीवरी को सी सेक्शन या ऑपरेशन डिलीवरी भी कहते हैं। कई मामलों में सिजेरियन डिलीवरी के माध्यम से बच्चों का जन्म होना मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत लाभदायक होता है। कई बार कुछ स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों के कारण सिजेरियन डिलीवरी भी करनी पड़ती है। मेडिकल साइंस की इस प्रगति को जीवन रक्षक भी माना जाता है। तमाम महिलाओं को डिलीवरी के समय कुछ कारणों से जान जाने का भी खतरा होता है जिसकी वजह से सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ती है। लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं हर एक चीज के कई पहलू होते हैं। सी सेक्शन या सिजेरियन डिलीवरी का महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कई शोध और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि सिजेरियन डिलीवरी का महिलाओं के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक प्रभाव रहता है। आइये जानते हैं इनके बारे में।

सिजेरियन डिलीवरी या सी सेक्शन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects Of Cesarean Delivery)

सिजेरियन डिलीवरी या सी सेक्शन से डिलीवरी का महिलाओं के स्वास्थ्य पर लंबा असर होता है। पिछले कुछ सालों में नार्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी की संख्या बढ़ी है। यह डिलीवरी महिला और बच्चों दोनों के सेहत पर असर डालती है। सिजेरियन डिलीवरी को लेकर कई मशहूर हस्तियां भी महिलाओं को समय-समय पर जागरूक करती रहती हैं। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी इसके बारे में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा था। उन्होनें एक पोस्ट में लिखा था कि हमेशा दर्द सहने से अच्छा है कि एक बार दर्द सहा जाए। इस पोस्ट में उन्होंने सिजेरियन डिलीवरी के बारे में बात की थी। दुनियाभर में हुए कई अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि सिजेरियन डिलीवरी के कारण महिलाओं और बच्चों की सेहत पर दीर्घकालीन असर पड़ता है। इसके बारे में ज्यादातर महिलाएं अनजान होती हैं। आइये जानते हैं इनके बारे में।

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1. नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सी सेक्शन से रिकवरी में लगता है अधिक समय

जिन महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी होती है उनकी तुलना में सिजेरियन या सी सेक्शन डिलीवरी वाली महिलाओं की रिकवरी में अधिक समय लगता है। सी सेक्शन से हुई डिलीवरी से रिकवरी करने में औसतन 4 से 6 सप्ताह का भी समय लग सकता है। सिजेरियन डिलीवरी में पेट की मांसपेशियों को काटकर बच्चे को निकाला जाता है जिसकी वजह से इसमें जोखिम भी शामिल होता है। यह एक बड़ी सर्जरी होती है और इसके कारण खून भी सामान्य डिलीवरी की तुलना में अधिक निकलता है। हालांकि अन्य सर्जरी की तरह इसमें जोखिम बहुत कम होते हैं लेकिन रिकवरी का समय अधिक होता है।

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2. प्लेसेंटा प्रीविया और प्लेसेंटा एक्रीटा की समस्या

कई अध्ययन और केस स्टडी से यह बात पता चली है कि सिजेरियन डिलीवरी के कारण महिलाओं में प्लेसेंटा प्रीविया और प्लेसेंटा एक्रीटा की समस्या बढ़ रही है। इसके कारण मां और गर्भ में पल रहे बच्चे को भी खतरा होता है। पहले प्रसव के दौरान होने वाली दिक्कतों और सी सेक्शन के कारण महिलाओं में यह समस्या बढ़ती है। गर्भनाल बच्चेदानी के आसपास या यूरिनरी ब्लैडर (पेशाब की थैली) में घुस जाने को प्लेसेंटा एक्रीटा कहते हैं। इन समस्याओं में बच्चेदानी के फटने का भी खतरा रहता है।

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3. शरीर में कमजोरी का अधिक खतरा

नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी के कारण महिलाओं का शरीर अधिक कमजोर हो जाता है। इस डिलीवरी में महिलाओं के शरीर से अधिक मात्रा में रक्त निकलता है। जिसके कारण कमजोरी हो जाती है। कई बार सिजेरियन डिलीवरी के दौरान हुई दिक्कतों की वजह से महिला को लंबे समय तक इसके साइड इफेक्ट्स से जूझना पड़ता है। सिजेरियन डिलीवरी में पेट की मांसपेशियों को काटना भी शामिल होता है जिसके कारण खून अधिक मात्रा में निकलता है।

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4. एंडोमेट्रियोसिस जैसे संक्रमण का खतरा 

सिजेरियन डिलीवरी के कारण महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस का खतरा बढ़ जाता है। एंडोमेट्रियोसिस रोग गर्भाशय से जुड़ी एक समस्‍या हैं। आपको बता दें कि ये समस्या तब होती है जब महिला के शरीर में कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती है। जिसे एंडोमेट्रियोसिस इम्प्लांट कहा जाता है। ये वेजाइना, सरविक्स और ब्लैडर पर भी पाए जाते हैं। लेकिन पेल्विस के दूसरे जगहों की बजाय यहां सामान्यता कम पाए जाते हैं। ऐसे बहुत ही कम मामले होते हैं जब एंडोमेट्रियोसिस इम्प्लांट्स पेल्विस के बाहर लिवर पर, फेफड़ों या मस्तिष्क के आसपास भी हो जाता है।

5. डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा

सिजेरियन डिलीवरी के कारण महिलाओं में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा रहता है। इस दौरान हुई सर्जरी के कारण कुछ महिलाओं में ये मामले देखे भी गए हैं। दरअसल डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या तब होती है जब आपके शरीर के किसी एक हिस्से या आमतौर पर होने वाले आपके पैरों में एक से ज्यादा गहरी नसों में रक्त के थक्के बनते हैं। डीप वेन थ्रॉम्बोसिस की इस स्थिति में आपके पैरों में दर्द या सूजन पैदा हो सकती है, लेकिन ये आपको बिना लक्षणों के भी हो सकते हैं। डीप वेन थ्रोम्बोसिस की स्थिति आपके शरीर में तब भी पैदा हो सकती है जब आप किसी सर्जरी या चिकित्सीय स्थिति में होते हैं। जिसके कारण आपके रक्त के थक्के बन सकते हैं।

6. शरीर में बदलाव के कारण बीमारियों का खतरा

सिजेरियन डिलीवरी के बाद शरीर में नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में अधिक बदलाव देखने को मिलते हैं जिसके कारण आपको आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। शरीर में मोटापे के अलावा कई अन्य बदलाव भी होते हैं। इन बदलावों के कारण आपको कई तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं। हालांकि नॉर्मल डिलीवरी के बाद भी शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं लेकिन इनका खतरा सिजेरियन डिलीवरी से कम होता है।

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सिजेरियन डिलीवरी या सी सेक्शन गर्भाशय पर एक सर्जिकल कट लगाकर बच्चे को जन्म देने की एक प्रक्रिया है। आज के समय में ज्यादातर सी सेक्शन या सिजेरियन डिलीवरी सुरक्षित मानी जाती हैं। हालांकि इसमें सामान्य डिलीवरी से अधिक जटिलताएं होती हैं। एक बार किसी महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आग चलकर भी महिला को सिजेरियन डिलीवरी से ही गुजरना पड़ेगा। लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के बाद शरीर में उपर बताई गयी समस्याएं हो सकती हैं जिनके कारण गर्भधारण में दिक्कतें या अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आज के समय में फोरसेप्स डिलीवरी भी की जाती हैं जिसमें डिलीवरी से पहले डॉक्टर गर्भ में बच्चे की पुजिशन और सर्वाइकल डायलेशन की जांच करते हैं। जब गर्भवती शिशु को जन्म देने के दौरान थक जाती है तो इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि इस प्रक्रिया में मां की क्षमता कम होती है, जिससे गर्भ से बच्चे को निकालने में परेशानी होती है। इसके कारण फोरसेप्स डिलीवरी किया जाता है। 

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