PCOS और PCOD से जूझ रही महिलाओं को प्रेग्नेंसी में आती हैं ये समस्याएं, जानें सावधानियां, इलाज और बचाव

पीसीओएस (PCOS) और पीसीओडी (PCOD) की समस्या से जूझ रही महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कतें होती हैं, एक्सपर्ट से जानें इलाज और बचाव।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Oct 01, 2021
PCOS और PCOD से जूझ रही महिलाओं को प्रेग्नेंसी में आती हैं ये समस्याएं, जानें सावधानियां, इलाज और बचाव

पीसीओएस और पीसीओडी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी समस्या है जिसकी वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। PCOS या PCOD की समस्या से जूझ रही महिला को प्रेग्नेंसी में भी कई समस्याएं होती हैं। अगर महिलाओं के पीरियड्स नियमित रूप से नहीं आते हैं तो इसकी वजह से कंसीव करने में परेशानियां आती हैं। पॉलीसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम की वजह से महिलाओं के पीरियड्स पर प्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से उन्हें प्रेग्नेंट होने में समस्या होती है। हालांकि इन समस्याओं के साथ ऐसा नहीं है कि महिलाएं मां नहीं बन सकती हैं। कुछ चिकित्सा उपाय और सावधानियों को ध्यान में रहकर महिलाएं इन समस्याओं से निजात पा सकती हैं। आइये ओएसिस फर्टिलिटी की मेडिकल डायरेक्टर और को फाउंडर डॉ दुर्गा जी राव से जानते हैं इन समस्याओं के बारे में।

पीसीओएस के लक्षण (PCOS Symptoms)

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस एक ऐसी बीमारी हैं जिसकी वजह से महिलाओं को पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं होती हैं। पीसीओएस की समस्या के कारण महिलाओं की ओवरी में मासिक धर्म के बाद एग नहीं रिलीज हो पाटा है जिससे पगर्भधारण में दिक्कतें होती हैं। शरीर में हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य कारणों से यह समस्या होती है। आइये जानते हैं पीसीओएस के लक्षणों के बारे में।

पीसीओएस और पीसीओडी के कारण प्रेग्नेंसी में समस्याएं (Pregnancy Complications with PCOS and PCOD)

हालांकि यह कहना पूरी तरह से गलत होगा कि पीसीओएस या पीसीओडी से जूझ रही महिलाएं मां नहीं बन सकती हैं लेकिन इसकी वजह से महिलाओं को गर्भधारण करने में कुछ दिक्कतें होती हैं। पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं में कई समस्याएं ऐसी होती हैं जो प्रेग्नेंसी में रुकावट का कारण बनती हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में।

1. गर्भपात

पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं में अन्य महिलाओं की तुलना में गर्भपात की समस्या अधिक होती है। हार्मोनल बदलाव और अन्य वजहों से पीसीओएस या पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं की इन समस्या से जूझना पड़ता है।

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2.प्रेग्नेंसी में डायबिटीज 

पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान गर्भकालीन मधुमेह होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनमें से कई इंसुलिन प्रतिरोधी होती हैं। गर्भकालीन मधुमेह एक प्रकार का मधुमेह है जो गर्भावस्था के दूसरे भाग में विकसित होता है और अक्सर बच्चे के जन्म के बाद खत्म हो जाता है। इसे अगर बिना इलाज के छोड़ दिया जाता है तो इसकी वजह से बच्चे की सेहत पर और गर्भवती मां पर भी असर होता है।

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3. प्री-एक्लेमप्सिया

प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था के कारण होने वाला एक प्रकार का उच्च रक्तचाप है जो आमतौर पर गर्भावस्था के दूसरे चरण में होता है। प्री-एक्लेमप्सिया में प्लेसेंटा को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता है, इसलिए यह भ्रूण को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं दे पाता है। इससे बच्चे का जन्म कम वजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ हो सकता है।

4. समय से पहले डिलीवरी

पीसीओएस के कारण गर्भवती महिलाओं की समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा बना रहता है।

पीसीओएस या पीसीओडी के साथ कैसे करें गर्भधारण? (How to Conceive With PCOS?)

पीसीओएस या पीसीओडी की समस्या के साथ गर्भधारण करने के महिलाओं को पहले गायनेकोलोजिस्‍ट बात करनी चाहिए। इन समस्याओं के साथ कंसीव करने के लिए कई तरह के चिकित्सा विकल्प मौजूद हैं आप उनका सहारा चिकित्सक की देखरेख में ले सकती हैं। पीसीओएस के साथ गर्भधारण करने के लिए इन विकल्पों को अपनाया जा सकता है।

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  • एंटी-एंड्रोजन दवाओं के सेवन से आपके शरीर में एंड्रोजन को संतुलित किया जा सकता है जिससे प्रेग्नेंसी में फायदा मिलता है।
  • पीसीओएस के लक्षणों को कम करने के लिए चिकित्सक कुछ दवाएं देते हैं।
  • हार्मोनल बर्थ कंट्रोल के तरीकों से मासिक धर्म को नियंत्रित करके गर्भधारण किया जा सकता है।
  • वजन को कम करने और नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से फायदा मिलता है।
  • आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का सहारा लेने से फायदा मिलता है।

पीसीओएस की समस्या के साथ गर्भवती होने के लिए महिलाओं को अपनी जीवनशैली में बदलाव करना पड़ता है। एक्सपर्ट चिकित्सक की सलाह के बाद आपको गर्भधारण के लिए अपने वजन को कम करना होता है। पीसीओएस की समस्या में अक्सर महिलाओं का वजन तेजी से बढ़ जाता है जिसे कंट्रोल करने के बाद खानपान से जुड़ी आदतों में बदलाव करने से फायदा मिलता है। वजन कम करने से आपके अंडाशय से परिपक्व और स्वस्थ एग रिलीज होते हैं। नियमित रूप से एक्सरसाइज और धूम्रपान व अल्कोहल के सेवन से बचने पर भी इस समस्या में फायदा मिलता है। पीसीओएस की समस्या में गर्भधारण करने के लिए आपको चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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