प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ब्लीडिंग हो सकती है मिसकैरेज का संकेत, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण और खतरे

प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) के शुरूआती महीनों में अधिक ब्लीडिंग मिसकैरेज का संकेत हो सकती है, इस समस्या में एक्सपर्ट डॉक्टर से परामर्श जरूर करना चाहिए।

Prins Bahadur Singh
Reviewed by: डॉ. प्राची बेनाराPublished at: Aug 10, 2021Updated at: Aug 10, 2021Written by: Prins Bahadur Singh
प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ब्लीडिंग हो सकती है मिसकैरेज का संकेत, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण और खतरे

प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) के दौरान महिलाओं के शरीर में बड़े पैमाने पर बदलाव होते हैं। इन बदलावों को प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के दौरान महसूस किया जा सकता है। प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने में बाहर से देखने पर शरीर में हो रहे बदलाव नजर नहीं आते हैं लेकिन इस दौरान महिलाओं के शरीर के अंदर शारीरिक और मानसिक बदलाव बड़े पैमाने पर हो रहे होते हैं। प्रेग्नेंसी में महिला के शरीर में हार्मोनल चेंज होते हैं और अगले कुछ महीने के लिए बच्चे को गर्भ में पालने के लिए शारीरिक बदलाव भी होते हैं। जब शरीर में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहे हों तो इस दौरान थोड़ी बहुत ब्लीडिंग होना सामान्य बात होती है। हर गर्भवती महिला के लिए यह जरूरी है कि वे इस दौरान शरीर में हो रहे परिवर्तनों से घबराएं नहीं बल्कि इसके बारे में सही और सटीक जानकारी रखें। 

गर्भावस्था यानि प्रेग्नेंसी की शुरुआत में मिसकैरेज (गर्भपात) होना आम बात है और यही वजह है कि ज्यादातर पति-पत्नी प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही से पहले प्रेग्नेंसी के बारे में किसी को बताते नही हैं। एक गर्भवती मां को प्रेग्नेंसी के बारे में सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। सही जानकारी होने पर महिला अपने पेट में पल रहे बच्चे और खुद की सेहत का ध्यान सही तरीके से रख सकती है। वैसे तो गर्भावस्था की शुरुआत में ब्लीडिंग होना सामान्य होता है लेकिन यह समस्या अगर बढ़ जाए तो आपके लिए चिंता का विषय बन सकती है। गायनेकोलॉजिस्ट और इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. प्राची बेनारा के मुताबिक प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ब्लीडिंग होने पर इसके बारे में सही जानकारी आपके और पेट में पल रहे बच्चे की सेहत के लिए जरूरी है। इसलिए आइए डॉ प्राची से जानते हैं प्रेग्नेंसी की शुरुआत में होने वाली ब्लीडिंग के मायने और इस समस्या से किन स्थितियों में प्रेग्नेंट महिला को खतरा होता है।

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क्या ये मिसकैरेज (गर्भपात) का संकेत है? (Is It A Miscarriage?)

प्रेग्नेंसी के पहले 20 हफ्तों में अपने आप गर्भ में बन रहे भ्रूण का नष्ट हो जाने को मिसकैरेज कहते हैं। ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि लगभग 30 प्रतिशत प्रेग्नेंट महिलाओं का गर्भधारण ममिसकैरेज की वजह से खत्म हो जाता है। मिसकैरेज के बाद महिला को दर्द और अपराधबोध भी होता है। लेकिन डॉ प्राची कहती हैं कि इस समस्या में महिलाओं को अपराधबोध या खुद को कोसना नहीं चाहिए। क्योंकि इसमें आपकी कोई गलती नहीं होती है। चिंता और अपराधबोध के बजाय आप इसके बारे में सही और सटीक जानकारी रखने से इस समस्या से बच सकती हैं। अगर आप मिसकैरेज के खतरे और उसके लक्षणों के बारे में पहले से अवगत हैं तो आप इससे बच सकती हैं। जानें प्रेग्नेंसी की शुरुआत में मिसकैरेज से पहले दिखने वाले संकेतों के बारे में।

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  • अगर आपको ही रही हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग तेज हो जाए।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द।
  • पेट में गंभीर दर्द।
  • वेजाइनल डिस्चार्ज में खून के थक्के।
  • गर्भावस्था के लक्षणों में कमी जैसे जी मिचलाना या स्तनों में संवेदनशीलता कम होना।

इन स्थितियों में आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। अगर आपको ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की सलाह देगा और गर्भावस्था हार्मोन (सीरम β एचसीजी) जांच के लिए भी कह सकता है। 

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मिसकैरेज या गर्भपात क्यों होता है? (Why Do Miscarriages Happen?)

गर्भावस्था के पहले तिमाही में मिसकैरेज होने का कारण बच्चे के गुणसूत्रों या आनुवांशिक मैटेरियल में दिक्कत होता है। आपको बता दें कि गुणसूत्र (क्रोमोसोम) धागे जैसी संरचानाएं होती हैं जिनमें आनुवांशिक कोड होते हैं, यही कोड यह निर्धारित करते हैं कि आप अपने माता-पिता से किन अनुवांशिक लक्षणों को धारण या स्थानान्तरण करेंगे। एक मनुष्य में 46 गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से प्रत्येक को माता-पिता से 23 गुणसूत्र प्राप्त होते हैं। आदर्श रूप से अंडाणु या मां के अंडे में 23 गुणसूत्र और पिता के शुक्राणु से 23 गुणसूत्र मिलकर भ्रूण को 46 गुणसूत्र देते हैं। और जब भ्रूण को ये गुणसूत्र नहीं मिलते हैं तो यह ठीक से विकसित नहीं हो पाता है और गर्भावस्था के दौरान मिसकैरेज की वजह से यह खत्म हो जाता है। गर्भपात का एक अन्य कारण प्लेसेंटा के निर्माण में गड़बड़ी या समस्या हो सकती है। प्लेसेंटा वह अंग है जो बच्चे को मां से जोड़ता है और इसके साथ कोई समस्या होने पर गर्भावस्था में मिसकैरेज जैसी दिक्कतें पैदा होती हैं।

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आपको प्रेग्नेंसी के दौरान मिसकैरेज का कितना खतरा? (What Are My Chances of Having a Miscarriage?)

दुर्भाग्य से मिसकैरेज या गर्भपात की घटना बहुत आम है और इस पर आपका कोई भी कंट्रोल नहीं होता है। डॉ प्राची के मुताबिक आप भले ही इस पर कंट्रोल नही कर सकती हैं लेकिन इसके बारे में सही जानकारी जरूर रख सकती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान कुछ जोखिम कारक मिसकैरेज की संभावना को बढ़ा सकते हैं। आइये जानते हैं इनके बारे में।

1. अगर मां की उम्र 30 वर्ष की है तो ऐसे में 5 में से 1 गर्भवती महिला को मिसकैरेज का खतरा रहता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है मिसकैरेज का खतरा उतना ही बढ़ जाता है।

2. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समस्या में भी महिलाओं को मिसकैरेज का खतरा रहता है।

3. अत्यधिक शराब, धूम्रपान की आदत की वजह से भी गर्भपात या मिसकैरेज का खतरा होता है।

4. मोटापे की समस्या में भी महिलाओं को मिसकैरेज हो सकता है।

5. कैफीन का अत्यधिक सेवन करने से गर्भपात का खतरा।

6. कुछ दवाओं के प्रयोग से।

7. संक्रमण जिनका इलाज न हुआ है, इसकी वजह से भी मिसकैरेज का खतरा होता है।

7. गर्भाशय में दिक्कतें होने पर जैसे फाइब्रॉएड या गर्भाशय का असामान्य आकार।

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एक बार मिसकैरेज होने पर क्या अगली बार अधिक खतरा है? (Are You At a Higher Risk of Miscarriage Next Time?)

एक बार गर्भपात या मिसकैरेज होने के बाद महिलाओं के मन में इस बात की चिंता बढ़ जाती है कि, क्या अगली बार गर्भधारण करने पर भी उन्हें इस समस्या का सामना करना पड़ेगा? लेकिन इस बारे में आपको अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बार-बार मिसकैरेज होने की संभावना 100 में से 1 महिला को होती है। इसलिए अगर आपको कभी इस समस्या का सामना करना पड़ा है तो अगली बार सही तरीके से गर्भधारण कर स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। 

मिसकैरेज के बाद कब हो सकती हैं दोबारा प्रेग्नेंट? (When Can You Try for Another Baby?)

गर्भपात या मिसकैरेज महिलाओं पर भावनात्मक रूप से गहरा असर छोड़ सकता है, इसलिए इस दौरान दुःख की भावनाओं को दबाना नहीं चाहिए। गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंट होने से पहले खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करें। चिकित्सकीय रूप से, आप गर्भपात के बाद एक सामान्य अवधि होने के बाद दूसरी गर्भावस्था के लिए प्रयास कर सकती हैं।

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