जानें शोल्डर डिस्लोकेशन (कंधा उतरना) के कारण, लक्षण और इलाज

किसी दुर्घटना, चोट या खेलकूद के दौरान कंधा उतरने यानि शोल्डर डिसलोकेशन की समस्या होती है, जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jul 16, 2021Updated at: Jul 16, 2021
जानें शोल्डर डिस्लोकेशन (कंधा उतरना) के कारण, लक्षण और इलाज

शोल्डर डिस्लोकेशन (Shoulder Dislocation) या कंधा उतरने की समस्या में किसी झटके या चोट के लगने की वजह से बाजू के ऊपर वाली हड्डी शोल्डर से खिसक जाती है। कंधे की सॉकेट एक कप नुमा आकार की होती है जो कि घूमने वाला जॉइंट होता है। आपका कंधा हर दिशा में घूम सकता है और इसका मूवमेंट दूसरे जॉइंट्स की तुलना में अधिक होता है। कंधा उतरने की स्थिति में जो बाजू की ऊपर वाली हड्डी होती है वो इस सॉकेट से खिसक जाती है। इसके अलावा कई बार हडियों को साथ रखने वाले ऊतक के डैमेज होने पर भी यह समस्या होती है। कंधा उतरने या शोल्डर डिसलोकेशन की वजह से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कंधे और बाजुओं का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोग या फिर खिलाडियों के साथ यह समस्या अक्सर हो जाती है। एक बार शोल्डर डिसलोकेट होने के बाद दोबारा ऐसा होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए हैं कि पहली बार जब शोल्डर डिसलोकेशन होता है तो इसकी वजह से शोल्डर के जॉइंट कमजोर और अस्थिर हो जाते हैं।

शोल्डर डिसलोकेशन (कंधा उतरना) की समस्या के कारण (Shoulder Dislocation Causes)

Shoulder-Dislocation-Causes-Symptoms-and-Treatment

चूंकि हमारे कंधे के जोड़ शरीर के सबसे ज्यादा मूवमेंट करने वाले जोड़ होते हैं। आप कंधे का मूवमेंट किसी भी दिशा में कर सकते हैं। इसी मूवमेंट की वजह से अक्सर लोगों को कंधा उतरने की समस्या होती है। इसके अलावा कंधा उतरने या शोल्डर डिसलोकेशन का दूसरा कारण कंधे की हड्डियों को जोड़ वाले ऊतक होते हैं। इन ऊतकों के डैमेज होने पर भी शोल्डर डिसलोकेट हो सकते हैं। कंधा उतरने या शोल्डर डिसलोकेट होने के सबसे ज्यादा मामले आगे की तरफ डिसलोकेट होने के आते हैं। कंधे पर अचानक झटका लगने या दबाव की वजह से हड्डी अलग हो जाती है जिसकी वजह से शोल्डर डिसलोकेट होते हैं। यह घटना सबसे ज्यादा स्पोर्ट्स के दौरान होती है। कई बार यह देखा गया है कि झटका लगने या गिरने पर चोट लगने की वजह से खिलाड़ियों के कंधे डिसलोकेट हो जाते हैं। कंधा उतरने या शोल्डर डिसलोकेशन के प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं।

इसे भी पढ़ें : क्या है ब्लड क्लॉटिंग (खून में थक्का जमना) ? जानें इसके कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाय

  • चोट लगने की वजह से।
  • किसी दुर्घटना में कंधा उतरने की समस्या।
  • हॉकी खेलते समय।
  • रग्बी खेलने पर।
  • रॉक क्लाइंबिंग करते समय।
  • फुटबॉल खेलने पर।
  • सॉकर खेलने पर।
  • वॉलीबॉल खेलने पर।

शोल्डर डिसलोकेशन (कंधा उतरने) के लक्षण (Shoulder Dislocation Symptoms)

शोल्डर डिसलोकेशन या कंधा उतरने की समस्या में दर्द और झटका लगने पर दर्द के साथ चमक की समस्या होती है। शोल्डर डिसलोकेट होने पर कंधे की कार्टिलेज, ऊतक और मसल खिंच कर टूट जाते हैं जिसकी वजह से इस समस्या में असहनीय दर्द हो सकता है। इसके अलावा आपके कंधे का मूवमेंट नहीं हो पाता है। आमतौर पर कंधा उतरने की समस्या या शोल्डर डिसलोकेट होने पर ये लक्षण दिखाई देते हैं।

  • असहनीय दर्द।
  • कंधे का मूवमेंट न होना।
  • कंधे के जोड़ में उभार।
  • बेहोसी की स्थिति।
  • मांसपेशियों की ऐंठन
  • हाथ या उंगलियों में सुन्नपन, झुनझुनी और कमजोरी।
  • हाथ हिलाने में कठिनाई।
Shoulder-Dislocation-Causes-Symptoms-and-Treatment

शोल्डर डिसलोकेशन (कंधा उतरने) की समस्या में क्या करें? (What to Do After Shoulder Dislocation?)

कंधा उतरने की समस्या बेहद गंभीर समस्या होती है। इस समस्या में तुरंत चिकित्सक की देखरेख में इलाज किया जाना चाहिए। किसी दुर्घटना, चोट या खेलकूद के दौरान अगर आपको लगता है कि आपका शोल्डर डिसलोकेट हो गया है तो ऐसे में इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

  • हाथ को हिलाने से बचें और इसे स्थिर रखें।
  • कंधे को वापस दबाव से उसकी जगह पर ले जाने की कोशिश खुद से न करें।
  • दर्द से राहत के लिए आप दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर सकते हैं।
  • तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

शोल्डर डिसलोकेशन का इलाज (Shoulder Dislocation Treatment)

शोल्डर डिसलोकेट होने या कंधा उतरने की समस्या में आपका चिकित्सक एक्सरे की जांच आदि के बाद इलाज करता है। कंधे को वापस उसकी जगह पर ले जाने के लिए कई तरह के इलाज किये जाते हैं। कुछ गंभीर स्थिति में चिकित्सक इसे ठीक करने के लिए सर्जरी भी कर सकता है।  डॉक्टर कुछ दिनों के लिए मरीज के हठ और कंधे को एक जगह स्थिर रखने के लिए विशेष पट्टी का इस्तेमाल भी करते हैं। कंधा उतरने की समस्या एक बेहद गंभीर समस्या है जिसका सही ढंग से इलाज किया जाना चाहिए।  इसके इलाज के दौरान अपने हाथों और कंधे का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अन्यथा इलाज का असर कम होता है और किसी गंभीर खतरे की आशंका बनी रहती है। 

Read More Articles on Other Diseases in Hindi

Disclaimer