युवाओं में डिप्रेशन की पहचान करना हुआ संभव शोधकर्ताओं ने खोजा एक नया टूल: रिसर्च

 हाल में हुए अध्‍ययन में शोधकर्ताओं ने एक ऐसा टूल ढ़ूढा है, जिससे कि युवाओं में डिप्रेशन का पता लगाया जा सकता है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Jan 23, 2020
युवाओं में डिप्रेशन की पहचान करना हुआ संभव शोधकर्ताओं ने खोजा एक नया टूल: रिसर्च

तनाव और डिप्रेशन आज के समय में एक ऐसी समस्‍या बन चुकी है, जिससे बड़े से लेकर बच्‍चे तक ग्रस्‍त हैं। ऐसा ही एक नया शोध हुआ है, जिसमें कि शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक पूर्वानुमान टूल की पहचान करने के अपने प्रयासों को बढ़ाया है, जो उन युवाओं की पहचान करने में मदद करता है, जो 18 साल की आयु के आसपास पहुंचने पर हाई या नॉर्मल डिप्रेशन का अनुभव करने की संभावना रखते हैं।

क्‍या कहती है रिसर्च ? 

अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड अडोलेसेंट साइकियाट्री के जर्नल में प्रकाशित इस अध्‍ययन में किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ता शामिल थे। उनका मानना है की डिप्रेशन की व्यापकता के बावजूद, स्थिति के कारणों, लक्षणों, समाधानों की पहचान करने के लिए कम किया गया है, जबकि पूर्वानुमान टूल पहले से ही मनोविकृति और कई शारीरिक स्वास्थ्य स्थितियों के लिए विकसित किए गए हैं। परिवार के इतिहास और सबथ्रेशोल्ड लक्षण, जो अवसाद के मापदंड तक नहीं पहुंचते हैं, वे अवसाद के जोखिम तक पहुंचने के दो मौजूदा तरीके हैं।

New Research On Depression

कैसे किया गया अध्‍ययन?

अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 2,000 से अधिक ब्राजील के किशोर युवाओं के डेटा का इस्तेमाल किया। इस डेटा की मदद से, टीम ने एक टूल विकसित किया, जो 18 साल तक पहुंचने पर एक प्रमुख डिप्रेशन का अनुभव करने वाले युवाओं को पहचानने में मदद कर सकता है।

केवल उपकरण की पहचान नहीं, अध्ययन ने न्यूजीलैंड और यूके के किशोर युवाओं के नमूनों में टूल के प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया। इसने इन देशों में डिप्रेशन की भविष्यवाणी करने की अपनी क्षमता में अंतर का प्रदर्शन किया और भविष्य में डिप्रेशन के खतरे को बताने वाला उपकरण विकसित करते समय स्थानीय विविधताओं पर विचार करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

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किंग्स कॉलेज लंदन की वेलेरिया मोंडेली, IDEA प्रोजेक्ट लीड और अध्ययन के लेखक ने कहा,  "यह शोध एक सुलभ उपकरण को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, जो युवाओं में डिप्रेशन की स्‍क्रीनिंग में मदद कर सकता है और दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।"

उन्होंने आगे कहा "डिप्रेशन आजीवन प्रभाव को कमजोर कर सकता है और किशोर इसकी शुरुआत में विशेष रूप से कमजोर होते हैं। बाद में किशोरावस्था में डिप्रेशन के अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान, इस बीमारी को रोकने में मदद करने के लिए प्रभावी प्रारंभिक हस्तक्षेप रणनीतियों को तैयार करने में भी सहायक हो सकती है।'' 

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अध्ययन के प्रमुख लेखक क्रिश्चियन कीलिंग ने कहा, 'हमारे अध्ययन में, हमने डिप्रेशन के उच्च जोखिम वाले युवाओं की पहचान करने के अधिक पारंपरिक तरीकों से परे जाने की कोशिश की है।" डेटा का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने एक प्रमुख डिप्रेशन के विकास के जोखिम का आकलन करने के लिए उपकरण विकसित किया।

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