Fri Sep 11, 2026 | 11:46 PM IST

'मैदा लकड़ी' के इस्तेमाल से पाएं सूजन, दर्द, चोट जैसी इन 5 समस्याओं में तुरंत आराम, जानें प्रयोग का तरीका

मैदा लकड़ी आयुर्वेद में गुणकारी मानी जाती है, इससे अर्थराइट‍िस का दर्द, चोट, दर्द आद‍ि में आराम म‍िलता है 

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मैदा लकड़ी का साइंट‍िफ‍िक नाम ल‍िटसी ग्‍लूट‍िनोसा (litsea glutinosa) है। मैदा लकड़ी एक पौधे का नाम है ज‍िसकी छाल बहुत फायदेमंद होती है। मैदा लकड़ी की छाल से कई रोगों का इलाज क‍िया जाता है। चोट या जख्‍म को ठीक करने के ल‍िए आप मैदा लकड़ी की छाल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। ज‍िन लोगों को जोड़ों में दर्द हो वो भी मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं, इसके इस्‍तेमाल से जोड़ों का दर्द दूर होता है। मैदा लकड़ी के इस्‍तेमाल से मोच, हड्डी टूटने पर होने वाला दर्द, कमर दर्द, सायट‍िका, सूजन आद‍ि समस्‍याओं में आराम म‍िलता है। इस लेख में हम मैदा लकड़ी के फायदे और उसे इस्‍तेमाल करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। इस व‍िषय पर ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थित प्रांजल आयुर्वेद‍िक क्‍लीन‍िक के डॉ मनीष स‍िंह से बात की। 

maida lakdi uses

1. चोट लगने पर इस्‍तेमाल करें मैदा लकड़ी (Use maida lakdi on wounds)

अगर आपको चोट लग गई है और दवा मौजूद नहीं है तो आप मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। मैदा लकड़ी के इस्‍तेमाल से जख्‍म भर जाता है। आप ताजे जख्‍म पर मैदा लकड़ी की छाल को घ‍िसकर लगा लें, इससे जख्‍म जल्‍दी भर जाएगा। मैदा लकड़ी में एंटी-फंगल गुण होते हैं। मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल उन चोटों के ल‍िए फायदेमंद है ज‍िनमें कटा या त्‍वचा छ‍िल गई हो। अगर चोट गहरी है तो आप डॉक्‍टर की मदद लें। 

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2. अर्थराइट‍िस के दर्द में इस्‍तेमाल करें मैदा लकड़ी (Benefits of maida lakdi in arthritis)

maida lakdi benefits

आपके घुटनों या जोड़ों में अर्थराइट‍िस के कारण अक्‍सर दर्द रहता है तो मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल करके देखें। गठ‍िया रोग में मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल फायदेमंद माना जाता है। इससे दर्द ठीक हो जाता है। आपको मैदा लकड़ी की छाल का पाउडर घुटनों पर लगाना है, इस पाउडर में आप नीलगि‍र‍ी का तेल डाल सकते हैं। आप मैदा लकड़ी की छाल का तेल भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। 

3. डायर‍िया होने पर करें मैदा लकड़ी के पाउडर का सेवन (Benefits of maida lakdi to treat diarrhea)

डायर‍िया ज‍िसे हम दस्‍त कहते हैं ये एक तरह का माइक्रोब‍ियल संक्रमण माना जाता है ज‍िसके कारण पेट में सूजन आ जाती है और खाना पचने की प्रक्र‍िया ठीक तरह से काम नहीं करती। मैदा लकड़ी के इस्‍तेमाल से डायर‍िया, पेट दर्द, उल्‍टी आद‍ि समस्‍याओं में आराम म‍िलता है। आप मैदा लकड़ी के पाउडर को गरम पानी के साथ लें तो डायर‍िया की समस्‍या दूर हो जाएगी।

4. शरीर में सूजन को दूर करे मैदा लकड़ी (Maida lakdi can cure swelling)

maida lakdi powder

सूजन कम करने के ल‍िए आप मैदा लकड़ी का पाउडर और हल्‍दी को म‍िलाएं और चूरण बना लें और इसे दूध के साथ लें तो सूजन की समस्‍या से न‍िजात म‍िलेगा। चोट पर ये एंटी-सेप्‍ट‍िक का काम करता है, इसे लगाने से इंफेक्‍शन नहीं होता। अगर ब्‍लीड‍िंग हो रही है तो वो भी बंद हो जाएगी। कई तरह की बीमार‍ियां जैसे डायर‍िया, बर्न, पेट दर्द, डैंड्रफ आदि के ल‍िए बनने वाली दवाओं में मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। 

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5. सायटिका और कमर के दर्द को ठीक करती है मैदा लकड़ी (Benefits of maida lakdi to cure sciatica and back pain)

मैदा लकड़ी की छाल के पाउडर का लेप बनाकर आप दर्द वाले ह‍िस्‍से में लगा सकते हैं। रीढ़ की हड्डी व कमर की नसों से जुड़ी हुई समस्या सायट‍िका (sciatica) और कमर के दर्द में इसका इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। हड्डी टूटने के दर्द या मोच आने पर भी आप दर्द को कम करने के ल‍िए मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। मैदा लकड़ी की छाल से न‍िकलने वाले तेल को भी इस्‍तेमाल करने से दर्द और ज्‍वॉइंट्स में होने वाले पेन से आराम म‍िलता है। 

अगर आपको क‍िसी तरह की एलर्जी या गंभीर बीमारी है तो मैदा लकड़ी का इस्‍तेमाल करने से पहले डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 27, 2021 00:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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