coronavirus: लॉकडाउन से भी ज्यादा जरूरी है 'हैंड लॉकडाउन', जानें वायरस से कैसे बचाएं अपने हाथ

लॉकडाउन को सही और गलत ठहराने की बहस के बीच एक डॉक्टर ने हैंड लॉकडाउन की खासियत बताई है और इसे ही बचाव का रास्ता बताया है।   

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaUpdated at: Mar 27, 2020 13:08 IST
coronavirus: लॉकडाउन से भी ज्यादा जरूरी है 'हैंड लॉकडाउन', जानें वायरस से कैसे बचाएं अपने हाथ

कोरोना वायरस से दुनियाभर में 5 लाख लोग चपेट में हैं, जिन्हें और दूसरे लोगों को इस घातक वायरस से बचाने के लिए बड़े-बड़े देशों ने लॉकडाउन का सहारा लिया है। इन्हीं देशों में भारत भी शामिल है, जहां 600 से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में डॉक्टर ने लॉकडाउन से ज्यादा जरूरी हैंड लॉकडाउन को बताया है। हालांकि डब्लूएचओ ने भी कोरोना को फैलने से रोकने में लॉकडाउन की भूमिका को कम बताया था। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गर्वनर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने लॉकडाउन पर बयान देते हुए कहा है कि भारत में लॉकडाउन कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए नाकाफी है। उनका कहना है कि ये एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि लॉकडाउन न सिर्फ लोगों को काम पर  जाने से रोकता है बल्कि ये उन्हें घरों में रहने के लिए मजबूर करता है, जो जरूरी नहीं कि वह अपने घर पर अकेले रहते हों। कोरोना किसी बस्ती में भी हो सकता है, जहां लोग एक साथ रहते हैं।

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क्या कहते हैं डॉक्टर

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में डॉक्टर जितेंद्र नागर का कहना है कि डॉक्टर होने के नाते में एक बहुत बड़ी विपदा को आते हुए देख रहा हूं। इस तरह की प्रकृतिक विपदाओं से दुनिया की कोई सरकार या शक्ति नहीं लड़ सकती। ये सत्ता, संसधानों या सरकार को खेल नहीं है। न ही ये वेंटिलेटर और मास्क का खेल है। दुनिया की इतनी बड़ी महाशक्ति अमेरिका, जहां कोरोना से इतनी जानें जा चुकी हैं। वहीं इटली, जहां सबसे अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं है वहां भी हजारों जानें जा चुकी हैं। इसलिए बचाव आपके खुद के हाथ में है। आपके परिवार का, आपका, आपके देश का बचाव आपके हाथ में है। बार-बार लोगों से घरों में रहने का आह्वान जैसे कि मोदी सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा की है वह ही बचाव का एकमात्र उपाय है। 

हैंड लॉकडाउन भी जरूरी

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से पहले आपको ये नया शब्द अपने डेली के इस्तेमाल में लाना है, जिसे कंप्लीट हैंड लॉकडाउन कहते हैं। इसमें आपको करना ये है कि आपको अपने हाथों को बचाना है, किसी वस्तु को नहीं छूना है। अगर घर से बाहर निकलना आपकी मजबूरी है तो इस बात का ध्यान रखें कि अस्पतालों, बाहर किसी भी जगह पर किसी के भी  हैंडल को छूने से बचें।  कागजी नोट, सिक्कों को भी छूने से बचें। घर में आने वाली किसी भी वस्तु को छूने से बचें। अगर छूते हैं तो तुरंत हाथ धोने की आदत डालिए। मैं आपसे फिर कहूंगा कि बचाव ही मार्ग है। 

क्या कहता है डब्लूएचओ

स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के टॉप इमरजेंसी एक्सपर्ट माइक रयान का कहना है कि कोरोनावायरस को हराने के लिए दुनिया के तमाम देश आसानी से लॉकडाउन के तरीके को नहीं अपना सकते हैं। डब्लूएचओ के मुताबिक, लॉकडाउन समााप्त होने के बाद वायरस दोबारा से सामने आएगा और इससे बचने के लिए जन स्वास्थ्य उपाय की जरूरत पड़ेगी। लॉकडाउन से खतरा और बढ़ गया है और अगर आने वाली स्थिति से बचना है तो कड़े और मजबूत जनस्वास्थ्य कदम या फिर उपाय उठाने होंगे। नहीं तो जब ये सभी प्रतिबंध या पाबंदियां हटेंगी तब इस बीमारी का खतरा दोबारा से बढ़ जाएगा। 

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वायरस को फैलने से रोकना मुश्किल 

राजन ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा कि वायरस को फैलने से रोकना बहुत ही मुश्किल है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन समाज के गरीब तबके के लिए संभावित रूप से मुश्किलें खड़ी करेगा। बता दें कि देश में 21 दिन का लॉकडाउन है, जिसने सभी व्यवस्यों की कमर तोड़ कर रख दी है और लाखों लोगों को बेरोजगार बना दिया है। इतना ही नहीं बहुत से लोगों को खाने-पीने की जरूरी चीजें और दवाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। 

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भारत की आबादी चिंता का विषय

भारत के उच्च जनसंख्या घनत्व ने इसे दुनिया भर में कोरोना के सबसे ज्यादा खतरे वाले देशों की सूची  में डाल दिया है। इसी कारण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1.3 अरब निवासियों को इस आपदा को रोकने के लिए घर में रहने का आदेश दिया है। वहीं चीन, इटली, स्पेन और अमेरिका जैसे देश भी लॉकडाउन का सामना कर रहे हैं। 

जरूरी संसाधनों की जरूरत 

वहीं रघुराम राजन ने कोरोना से लड़ाई में देश के कमजोर बुनियादी ढांचे को एक बाधा करार दिया है और कहा है कि वर्तमान स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि लोगों को बिना आजीविका के पैसा मिलना चाहिए ताकि उनके पास खर्च करने के लिए पैसा हो, वह अपना भोजन प्राप्त कर सकें और सार्वजनिक सेवाओं को चालू रखना भारत के लिए अगले तीन हफ्तों की सबसे बड़ी चुनौती होंगी। राजन ने बताया कि भारत में लॉकडाउन के लिए इन मुद्दों की भयावहता और भी कठिन हो जाएगी।

सीतारमण ने की राहत पैकेज की घोषणा

भारत में लॉकडाउन के लागू होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नागरिकों के बोझ को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत की कोरोना लड़ाई में कोई भी पीछे नहीं रहे इसलिए गरीबों के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। इसके साथ ही कर की समय सीमा और व्यावसायिक नियमों को आसान बनाने का भी फैसला किया गया है।

भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य सेक्टर कोरोनावायरस से महामारी का सामना कर रहा है और लगातार सिकुड़ता जा रहा है क्योंकि कई हेल्थकेयर संगठन गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

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कोरोनावायरस एक वैश्विक लड़ाई

कोरोनावायरस को वैश्विक लड़ाई करार देते हुए पूर्व आरबीआई चीफ ने कहा कि देश के बीच असमंजस की स्थिति और तालमेल में कमी की आशंका है। सभी देश परेशान हैं इसलिए कुछ असमंजस को समझा जा सकता है। आपको बाकी दुनिया के बारे में सोचने से पहले अपने खुद के देश में मेडिकल सप्लाई करनी चाहिए। इसके साथ ही इस बीमारी को देश के सभी हिस्सों से हटाना चाहिए नहीं तो ये फिर से वापस आकर आपको हिट करेगी। 

राजन ने कहा कि कोरोना के चलते बुनिया बचाव के उपायों और वेंटिलेटर सपोर्ट में भारी कमी देखने को मिल सकती है। मोदी ने कोरोना से लड़ने के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य देखभाल उपायों के अंतर्गत 15 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

अमीर देश गरीबों की मदद करें

राजन ने अमीर देशों से आह्वान किया है कि वे अल्प विकसित राष्ट्रों के लिए संसाधन जुटाने में मदद करें ताकि उनके पास महामारी से लड़ने का उचित मौका हो। राजन के मुताबिक, गरीब देशों के बारे में सोचें,  जो पहले से ही वेंटिलेटर की कमी से जूझ रहे हैं और इस संकट से निपट रहे हैं। राजन ने कोरोनोवायरस के प्रकोप की दूसरी और तीसरी लहर के बारे में भी आगाह कियाा और कहा कि सभी की नजरें चीन पर होनी चाहिए और वहां होने वाली प्रगति पर नजर रखना जरूरी है।

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