डिप्रेशन की वजह से हो सकती है दिल की धड़कन अनियमित, जानें दोनों के संबंध और खतरे

डिप्रेशन या अवसाद की समस्या का दिल की सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जानें डिप्रेशन की वजह से कौन सी बीमारियों का खतरा रहता है?

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Aug 12, 2021Updated at: Aug 12, 2021
डिप्रेशन की वजह से हो सकती है दिल की धड़कन अनियमित, जानें दोनों के संबंध और खतरे

डिप्रेशन एक प्रकार का मानसिक रोग है जिसकी वजह से इंसान को शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। अगर इस समस्या का समय पर ठीक से इलाज नहीं किया गया तो इसकी वजह से कई गंभीर दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। डिप्रेशन की समस्या से दिल की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। कई शोध और अध्ययन इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि डिप्रेशन या तनाव की वजह से आपको दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एंटी-डिप्रेसेंट दवा का सेवन करने वाले व्यक्ति में ये लक्षण कम दिखाई देते हैं लेकिन अगर सामान्य व्यक्ति जो डिप्रेशन से ग्रसित है और समय पर दवाओं का सेवन नहीं करता है तो उसे डिप्रेशन की वजह दिल की धड़कन के अनियमित होने की समस्या (  Depression and Irregular Heartbeat) का सामना करना पड़ सकता है। डिप्रेशन का दिल की सेहत से सीधा कनेक्शन है, आइये जानते हैं डिप्रेशन की वजह से हार्ट की हेल्थ पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में।

डिप्रेशन की वजह से दिल की धड़कन के अनियमित होने का खतरा (Depression Can Cause Irregular Heartbeat)

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(Image Source - Freepik.com)

डिप्रेशन की समस्या इंसान को सिर्फ मानसिक रूप से ही नहीं बल्कि शारीरिक रूप से भी परेशान करती है। डिप्रेशन या अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा अन्य व्यक्तियों की तुलना में अधिक होता है। कुछ समय पहले डेनमार्क के आरहूस विश्वविद्यालय में हुई शोध के मुताबिक डिप्रेशन की समस्या के कारण व्यक्ति के दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है जिसके बाद उसे दिल से जुड़ी गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इस शोध में यह भी कहा गया है कि एंटी डिप्रेसेंट दवाएं इस खतरे को नहीं पैदा करती हैं। जिन व्यक्तियों को डिप्रेशन या अवसाद की समस्या है उनमें अनियमित दिल की धड़कन का खतरा अधिक होता है लेकिन जो लोग इसके लिए एंटी डिप्रेसेंट दवाओं का सेवन करते हैं उन्हें इसका खतरा थोड़ा कम हो जाता है। कई एक्सपर्ट्स और चिकित्सक भी इस बात का दावा करते हैं कि जिस व्यक्ति को डिप्रेशन या अवसाद की समस्या है उनमें एट्रियल फाइब्रिलेशन (दिल की धड़कन से जुड़ी बीमारी) का खतरा अधिक होता है।

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हार्ट हेल्थ और डिप्रेशन का आपस में संबंध (Depression and Health Health Link)

मेंटल हेल्थ का पूरे शरीर की सेहत पर बुरा असर होता है लेकिन किसी भी व्ग्यक्ति के दिल की सेहत पर मेंटल हेल्थ का असर सबसे ज्यादा होता है। डिप्रेशन, चिंता और एंग्जायटी जैसी समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति को दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा अपने आप बढ़ जाता है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सही समय पर इलाज न होने की स्थिति में इंसान को हृदय से जुड़ी बीमारियों का जोखिम दोगुना हो जाता है। एक शोध के मुताबिक अवसाद से पीड़ित व्यक्ति में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा होता है और दोनों से एक साथ ग्रसित होने की स्थिति में मरीज की मौत ही हो सकती है। लंबे समय तक अवसाद, चिंता, तनाव और यहां तक कि पीटीएसडी का अनुभव करने वाले लोग अपनी सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों का अनुभव कर सकते हैं। इन समस्याओं से ग्रसित होने पर दिल की धड़कन में अनियमितता, ब्लड प्रेशर में वृद्धि और कोर्टिसोल के स्तर में वृद्धि जैसी समस्याएं होती हैं।

क्या डिप्रेशन से बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा? (Can Depression Cause Heart Attack?) 

डिप्रेशन और चिंता आदि से ग्रसित व्यक्ति के दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं। डिप्रेशन की स्थिति में हृदय में रक्त का प्रवाह भी कम हो जाता है और शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थितियों के कारण हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। अनियमित दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर के स्तर में बदलाव की वजह से व्यक्ति को हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं का खतरा रहता है। 

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अगर आप तनाव, अवसाद और चिंता जैसी मानसिक स्थितियों से जूझ रहे हैं तो इसे नजरअंदाज न करें। इस समस्या से ग्रसित होने पर समय रहते चिकित्सक की सलाह जरूर लें। आप इलाज के लिए किसी मनोचिकित्सक से संपर्क करें और दिल के सेहत का ध्यान रखें। याद रखें इस समस्या में संतुलित खानपान और नियमित रूप से व्यायाम करना बहुत फायदेमंद होता है। डिप्रेशन या चिंता से ग्रसित होने की स्थिति में दिल के सेहत की जांच जरूर कराएं।

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