बच्चों के व्यक्तित्व पर विज्ञापन का पड़ता है नकारात्मक प्रभाव, ऐसे में बच्चों की परवरिश हो कुछ ऐसी

बच्चों के हाथ में मोबाइल दे देने से बच्चे न केवल समय से पहले समझदार हो जाते हैं बल्कि उन पर नकारात्मक व सकारात्मक दोनों तरीकों से प्रभाव पड़ता है।

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Nov 19, 2020
बच्चों के व्यक्तित्व पर विज्ञापन का पड़ता है नकारात्मक प्रभाव, ऐसे में बच्चों की परवरिश हो कुछ ऐसी

टीवी और मीडिया से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। टीवी पर आने वाले आकर्षक विज्ञापन को देखकर बच्चे माता-पिता से वही चीजें खरीदने के लिए कहते हैं। माता-पिता मान भी लेते हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि बच्चे परिवार की खरीदारी में अब निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। विज्ञापन के आधार पर बच्चे पेरेंट्स को सुझाव देते हैं कि इस कंपनी का मोबाइल फोन ले लेते हैं या इस कंपनी का प्रोडक्ट ज्यादा अच्छा है। ज्यादातर अभिभावक उनकी बातों को प्राथमिकता देते हैं। ‌ऐसा करना बच्चों के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है क्योंकि बच्चे अगर कम उम्र में ही ब्रांड से जुड़ने लगेंगे तो वे अपने दोस्तों के सामने गर्व से बताएंगे कि उनके घर में इस मॉडल की कार है या वे इस ब्रांड का परफ्यूम यूज करते हैं। ऐसे में बच्चे इमेज कॉन्शियस हो जाते हैं और खुद को स्मार्ट और आकर्षक बनाने की कोशिश भी करते हैं। पढ़ते हैं आगे...

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बच्चों के व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव

आसपास के वातावरण का प्रभाव बच्चों पर बहुत जल्दी पड़ता है। चूंकि बच्चे विज्ञापन से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही समझाना जरूरी है कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत। वे जो भी टीवी पर देखते हैं असल में वह सच्चाई नहीं है। उन्हें बताएं कि विज्ञापन को इंजॉय करते रहें लेकिन उससे ज्यादा प्रभावित होना भी सही नहीं है। इससे न केवल उनका मानसिक विकास रुकता है बल्कि उनके अंदर जीवन के प्रति व्यवहारिक सोच विकसित नहीं हो पाती है। ऐसे में उनके धैर्य, उदारता और सहनशीलता की भावना विकसित करना बेहद जरूरी है।

अभिभावक क्या करें

अगर आप अपने बच्चे को विज्ञापन के दुष्प्रभाव से बचाना चाहते हैं तो उसकी हर जिद पूरी करनी जरूरी नहीं है। अगर बच्चा कोई चीज आपसे मांग रहा है तो उसे तुरंत खरीद कर ना दें बल्कि जानने की कोशिश करें कि क्या सचमुच वह चीज उसके काम की है या केवल विज्ञापन की चमक के कारण वह उस चीज को खरीदने के लिए कह रहा है और अगर वह चीज अनुपयोगी है तो अपने बच्चे को चीज की उपयोगिता और अनुपयोगिता के बारे में समझाएं अगर आप उसे तर्क देकर इस बात को समझाएंगे तो बच्चे को ज्यादा समझ में आएगा कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों को पहले ही महंगी चीज़ें लाकर दे देते हैं पर वह नहीं जानते कि इससे बच्चों की परवरिश पर गलत प्रभाव पड़ता है। अगर उन्हें कुछ सामान देना भी है तो उन्हें डिक्शनरी ला कर दें इससे उनका मानसिक विकास भी होगा और ज्ञान भी बढ़ेगा। अपने बच्चे को जागरूक करना भी आपका ही काम है। उसे समझाएं कि अगर कंपनी में स्कीम के तहत कुछ मुफ्त में मिल रहा है तो हो सकता है कि उसकी कीमत पहले से जुड़ी हो। इन तरीकों की मदद से आप अपने बच्चे को जागरूक बना सकती हैं।

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पेरेंट्स को खुद बदलना भी जरूरी

अगर आप खुद विज्ञापनों से जल्दी प्रभावित होते हैं तो सबसे पहले खुद को बदलें क्योंकि बच्चे माता-पिता को देखकर ही आगे बढ़ते हैं। अगर आप अपने बच्चे को साथ में शॉपिंग के लिए ले जा रहे हैं तो अपने मन में पहले से तय करें कि आपको केवल वही सामान खरीदना है जो जरूरी है। अपने बच्चे को यह भी समझाएं कि वह बेवजह किसी ऐसी चीज को ना खरीदें। अगर आप बचपन से ही अपने बच्चे में ऐसी आदत डालेंगे तो वे बड़ा होकर अपने खर्चों पर रोक लगाएंगे।

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