Fri Sep 11, 2026 | 09:08 PM IST

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क्या हर मौसम में एक जैसा खाना सेहत के लिए सही है? आयुर्वेदाचार्य से जानें

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों की डाइट लगभग पूरे साल एक जैसी हो गई है, वही रोटी, वही सब्जी, वही दही, वही मसाले, चाहे कड़ाके की ठंड हो, चिलचिलाती गर्मी या फिर बरसात का मौसम। यहां जानिए, क्या हर मौसम में एक जैसा खाना सेहत के लिए सही है?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग साल भर एक ही तरह का खाना खाते हैं। वही रोटी, वही चावल, वही सब्जी और वही मसाले, चाहे बाहर चिलचिलाती गर्मी हो, उमस भरी बारिश या ठंड का मौसम। सुविधाजनक तो यह तरीका है, लेकिन क्या यह सेहत के लिए भी सही है? बदलते मौसम के साथ शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं, मगर हमारी थाली अक्सर वही की वही रहती है। यही वजह है कि आज गैस, एसिडिटी, थकान, इम्यूनिटी की कमजोरी और मौसमी बीमारियां आम होती जा रही हैं। आयुर्वेद सदियों से यह मानता आया है कि हर मौसम का भोजन अलग होना चाहिए। मौसम के अनुसार शरीर की पाचन शक्ति यानी अग्नि कभी तेज होती है तो कभी मंद। इस लेख में हरियाणा के सिरसा में स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानिए, क्या हर मौसम में एक जैसा खाना सेहत के लिए सही है?

क्या हर मौसम में एक जैसा खाना सेहत के लिए सही है?

आयुर्वेद में वर्ष को अलग-अलग काल और ऋतुओं में बांटा गया है। हर ऋतु में शरीर की जठराग्नि (डाइजेस्टिव फायर) अलग तरह से काम करती है। कभी यह तेज होती है, तो कभी मंद। डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, ''अगर हम मौसम के अनुसार भोजन नहीं करेंगे, तो अग्नि कमजोर होगी और शरीर में आम (टॉक्सिन) बनने लगेंगे, जिससे रोगों की शुरुआत होती है।''

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1. अप्रैल से जुलाई: ऊष्ण काल (अदान काल) में क्या खाएं?

अप्रैल से जुलाई तक का समय ऊष्ण काल या अदान काल कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी के कारण शरीर की ऊर्जा धीरे-धीरे क्षीण होती है और पाचन शक्ति कमजोर यानी अग्निमंद हो जाती है। ऐसे में भारी, तली-भुनी और मसालेदार चीजें नुकसान पहुंचा सकती हैं।

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में शीतल (ठंडी) प्रकृति वाले फूड्स लेने चाहिए। जैसे-

  • दही
  • लस्सी
  • नारियल पानी
  • हल्का और लघु आहार

रोटी के रूप में गेहूं या जौ की रोटी बेहतर मानी जाती है। ज्यादा तली चीजें और ओवरईटिंग से बचना चाहिए, क्योंकि इस मौसम में पाचन कमजोर रहता है।

2. वर्षा ऋतु: अग्निमंद और पित्त प्रकोप का समय

बरसात का मौसम भी आयुर्वेद के अनुसार अग्निमंद का काल होता है। इस दौरान पाचन कमजोर होने के साथ-साथ पित्त दोष भी प्रकोपित हो जाता है। इसलिए इस मौसम में खानपान को लेकर और ज्यादा सावधानी जरूरी होती है।

डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, ''वर्षा ऋतु में बहुत ज्यादा गर्म तासीर वाली चीजों से बचना चाहिए।'' जैसे-

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is same food every season healthy

हालांकि गेहूं और जौ का सेवन इस मौसम में भी किया जा सकता है, लेकिन भोजन हल्का, ताजा और सीमित मात्रा में होना चाहिए। बासी और खुले में रखे फूड्स इस मौसम में जल्दी नुकसान करते हैं।

सितंबर के बाद: शीतल काल और तेज अग्नि

अगस्त के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है और शीतल काल की शुरुआत होती है। इस समय शरीर की अग्नि फिर से तेज होने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार, जब अग्नि मजबूत होती है, तो शरीर भारी भोजन को भी आसानी से पचा सकता है।

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि इस समय-

  • तिल
  • तेज मसाले
  • अपेक्षाकृत भारी भोजन का सेवन किया जा सकता है

इस मौसम में दही और लस्सी का उपयोग कम से कम करना चाहिए, क्योंकि शीतल काल में ये कफ और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष

हर मौसम में एक जैसा खाना सेहत के लिए सही नहीं है। आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, ''ऋतु के अनुसार आहार अपनाने से न सिर्फ पाचन बेहतर रहता है, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।'' इसलिए गर्मी, बरसात और शीतल काल में शरीर की जरूरत को समझकर खानपान में बदलाव करना ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 18, 2026 07:05 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jan 18, 2026 07:05 IST

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