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Balam kheera Side Effect: बालम खीरा किसे नहीं खाना चाहिए? जानें बालम खीरा खाते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए

who should not eat Balam kheera : आयुर्वेद में हर व्यक्ति की प्रकृति, स्थिति और ऋतु के अनुसार खान-पान निर्धारित किया जाता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को बालम खीरा न खाने की सलाह दी जाती है।

Who Should Not Eat Balam Kheera : बालम खीरा एक पारंपरिक और औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी है। बालम खीरा मुख्य रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में गर्मी के मौसम में खूब खाई जाती है। यह खीरे की ही एक जंगली और देसी किस्म मानी जाती है। यही कारण है कि बालम खीरा को देश के कुछ हिस्सों में जंगली खीरा, कचरी खीरा या छोटा खीरा भी कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, बालम खीरा की तासीर ठंडी होती है और प्रभाव शीतल होता है, इसलिए इसे गर्मी के मौसम में ही खाया जाता है।

बालम खीरा में कई ऐसे औषधीय गुए पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं, लेकिन आयुर्वेद में यह स्पष्ट किया गया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों, बीमारियों और शरीर की प्रकृति वाले लोगों को बालम खीरे का सेवन नहीं करना चाहिए। इस लेख में हम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से जानेंगे किन लोगों को बालम खीरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए हमने आयुर्वेदिक सेंटर माधवबाग के सीईओ और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. रोहित साने से बात की।

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1. वात प्रकृति वाले लोग- Vata Dosha Dominant

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. रोहित साने के अनुसार, बालम खीरे की तासीर ठंडी और रुक्ष (शुष्क) होती है। बालम खीरा खाने से शरीर में वात दोष बढ़ता है। वात प्रकृति के लोग जिन्हें कमजोर पाचन, गैस, कब्ज, जोड़ों में दर्द और नींद की कमी की परेशानी होती है, उन्हें बालम खीरा बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। वात प्रकृति के लोग अगर बालम खीरा खाए, तो इससे उन्हें सर्दी, जुकाम और ठंड लगना की परेशानी होती है।

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2. पाचन क्रिया की परेशानी में- digestive problem

आयुर्वेद में ‘अम दोष’ (अपचित भोजन) को बीमारियों की जड़ माना गया है। बालम खीरा भारी, ठंडा और जल्दी न पचने वाला होता है। यदि किसी व्यक्ति की पाचन क्रिया पहले से कमजोर है, तो उसे बालम खीरा बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। पाचन क्रिया से जुड़ी परेशानी में बालम खीरा खाने से कब्ज, मल त्याग की समस्या हो सकती है।

3. पीरियड्स के दौरान

आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को ठंडी और भारी चीजों को न खाने की सलाह दी जाती है। यही कारण है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को बालम खीरा खाने से परहेज करना चाहिए। बालम खीरा गर्भाशय की संकुचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इससे पीरियड्स में महिलाओं को पेट या पीठ में तेज दर्द, इनरेगुलर पीरियड्स और अनियमित ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

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4. सर्दी-जुकाम की समस्या में

बालम खीरा की तासीर ठंडी होती है। आयुर्वेद के अनुसार, ठंडी तासीर वाले फूड आइटम का सेवन करने से शरीर में कफ दोष बढ़ता है। जिन लोगों को पहले से सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या है, उन्हें बालम खीरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

5. अस्थमा और साइनस

ठंडी तासीर होने के कारण बालम खीरा शरीर में कफ दोष को बढ़ाता है। इससे श्वसन मार्ग में अवरोध और सूजन बढ़ सकती है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट का कहना है कि अस्थमा और साइनस की समस्या होने पर बालम खीरा खाने से परहेज करना चाहिए।

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6. जोड़ों के दर्द और गठिया

आयुर्वेदाचार्य का कहना है कि बालम खीरा वात दोष को बढ़ाने वाला होता है। गठिया, जोड़ों में दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस में बालम खीरा का सेवन करने से बचना चाहिए। वात दोष के कारण बालम खीरा खाने से जोड़ों की सूजन और दर्द को बढ़ा सकता है।

7. प्रेग्नेंसी के दौरान

वात दोष बढ़ाने वाला होने के कारण बालम खीरा प्रेग्नेंसी के दौरान खाने की मनाही होती है। बालम खीरा ठंडा, भारी और मूत्रवर्धक होता है, जिससे बार-बार पेशाब आ सकता है। बालम खीरा खाने से पेट में भारीपन हो सकता है या गर्भाशय में संकुचन की संभावना भी बन सकती है। यही कारण है कि प्रेग्नेंसी में बालम खीरा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करने की सलाह दी जाती है।

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बाल खारी का सेवन करने का सही तरीका

बालम खीरा कभी खाली पेट बिल्कुल न खाएं। बालम खीरा हमेशा अदरक, सेंधा नमक, काली मिर्च या जीरा पाउडर डालकर खाएं।

बारिश और ठंड के मौसम में बालम खीरा खाने से बचें। इसकी तासीर ठंडी होती है।

पके और ताजे बालम खीरे का ही सेवन करें। लंबे समय तक काटा हुआ बालम खीरा खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है।

निष्कर्ष

बालम खीरा आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है, लेकिन इसका सेवन एक सीमित मात्रा में करना चाहिए। वात, कफ बढ़ने वाले रोगों में बालम खीरे का सेवन लाभ के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आपके परिवार में किसी को बालम खीरा से किसी प्रकार की एलर्जी या कोई अन्य समस्या है, तो इसका सेवन करने से पहले आयुर्वेदाचार्य से जरूर सलाह लें।

FAQ

  • बालम खीरा कौन-कौन सी बीमारी में काम आता है?

    बालम खीरा आयुर्वेद में कई बीमारियों के उपचार में उपयोगी माना गया है। बालम खीरा का सेवन करने से गैस, अपच, एसिडिटी समेत अन्य पाचन संबंधी बीमारियां नहीं होती है। बालम खीरा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो त्वचा रोग जैसे दाद, खाज, खुजली, फुंसी को ठीक करते हैं। इसके अलावा ये ब्लड शुगर को भी मैनेज करने में मददगार माना जाता है।
  • बालम खीरा का दूसरा नाम क्या है?

    बालम खीरा को सॉसेज ट्री, कॉमन सॉसेज ट्री, झार फैनूस, किगेलिया अफ्रीकाना भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई क्षेत्रों में बालम खीरा को ‘जंगली खीरा’, ‘कचरी खीरा’ या ‘छोटा खीरा’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका स्वाद हल्का सा कसैला होता है।
  • क्या डायबिटीज में बालम खीरा खा सकते हैं?

    डायबिटीज में बालम खीरा खाना फायदेमंद होता है। इसके सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में मदद मिलती है। लेकिन, इसका सेवन कम मात्रा में ही करना चाहिए। बालम खीरा में पानी की मात्रा ज्यादा और चीनी कम होती है, जो इसे लो ग्लाइसेमिक फूड बनाता है। इसलिए डायबिटीज में बालम खीरा बिना किसी संकोच के एक सीमित मात्रा में खाया जा सकता है।

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Ashu Kumar Das

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Senior Sub Editor

जिंदगी एक सफर है और इस सफर को खूबसूरत बनाए रखने के लिए बॉडी को हेल्दी और फिट रखना बहुत जरूरी है। आशु इन्हीं बातों को फॉलो करती हैं। इन्हें स्वास्थ्य विषयों पर लिखना और अलग-अलग विषयों पर वीडियो बनाना खासा पसंद है। साथ ही इन्हें तरह-तरह की किताबें पढ़ना, सोलो ट्रैवलिंग करना और अजनबी लोगों को दोस्त बनाना बहुत पसंद है। इन्हें पत्रकारिता और लेखन में करीब 4 साल का अनुभव है। इन्होंने डिजिटल मीडिया में हेल्थ राइटर के तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। हेल्थ के अलावा आशु राजनीति लेखन में काम कर चुकी हैं।

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    Jul 21, 2025 11:24 IST

    Modified By : Ashu Kumar Das
  • Jun 22, 2025 07:26 IST

    Published By : Ashu Kumar Das

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