Fri Sep 11, 2026 | 05:58 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

पुरानी कब्ज से राहत के लिए इसबगोल लें या त्रिफला? जानें आयुर्वेदाचार्य से

कब्ज की समस्या में इसबगोल और त्रिफला काफी फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे में जो लोग लंबे समय से कब्ज से परेशान हैं उनके लिए इनमें से किसी एक को चुनना मुश्किल हो जाता है। आइए जानते हैं इसबगोल या त्रिफला क्या ज्यादा असरदार होता है?

कब्ज एक आम समस्या है, जिसमें मल त्याग करने में परेशानी, मल का सख्त होना या कई दिनों तक पेट ठीक तरह से साफ न होना शामिल है। बदलती लाइफस्टाइल, कम पानी पीना, डाइट में फाइबर की कमी और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कब्ज होनाना काफी आम है। कब्ज से राहत के लिए लोग अक्सर इसबगोल या त्रिफला का इसतेमाल करते हैं। हालांकि, लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इन दोनों में कब्ज से राहत पाने के लिए किसे चुनें?

हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, "इसबगोल और त्रिफला दोनों का उद्देश्य और काम करने का तरीका अलग हो सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए इसबगोल बेहतर हो सकता है, तो किसी दूसरे के लिए त्रिफला।" आइए इस लेख की मदद से समझते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और कब्ज के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

कब्ज में इसबगोल या त्रिफला क्या है बेहतर?

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि इसबगोल और त्रिफला दोनों ही कब्ज में असरदार हो सकते हैं, लेकिन इनमें से क्या बेहतर है आप इनके बीच के अंतर की मदद से समझ सकते हैं:

तुलना  इसबगोल त्रिफला
क्या है?  प्लांटागो ओवाटा पौधे के बीजों की भूसी तीन फलों: हरड़, बहेड़ा और आंवला का मिश्रण
कब्ज में कैसे काम करता है?  मल को नरम बनाने में मदद करता है। पाचन को बेहतर और त्याग त्याग को आसान बनाता है।
फाइबर   घुलनशील फाइबर का अच्छा सोर्स फाइबर के साथ प्लांट बेस्ड कंपाउंड
किस तरह के कब्ज में उपयोगी?  सख्त मल और कम फाइबर वाली डाइट के कारण होने वाली परेशानी पाचन से जुड़ी समस्याओं के साथ होने वाली कब्ज में
असर  आमतौर पर मल को भारी और मुलायम बनाना पाचन और पेट साफ करना

कब्ज होने पर किसे इसबगोल लेना चाहिए?

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि अगर कब्ज में मल सख्त और सूखा रहता है, मल त्याग करने में जोर लगाना पड़ता है या डाइट में फाइबर की कमी है तो इसबगोल एक उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसबगोल की भूसी में मौजूद घुलनशील फाइबर पानी सोखकर पेट साफ होने में मदद करने के लिए मल की मात्रा बढ़ाता है और उसे नरम बनाने में मदद कर सकता है।

कब्ज में इसबगोल खाने का एक बड़ा फायदा ये है कि यह पेट साफ करने की तेज दवा की तरह आंतों पर जोर नहीं डालता है, बल्कि नेचुरल फाइबर की तरह धीरे-धीरे काम करता है। यही कारण है कि कब्ज होने पर ज्यादातर लोग सबसे पहले इसी को लेना पसंद करते हैं।

Journal of Ayurveda and Integrative Medicine के अनुसार, ईसबगोल में पानी सोखने के सोखने वाले गुण होते हैं और यह एक चिकना पदार्थ छोड़ता है। इससे आंतों की सामग्री और मल का आकार बढ़ता है, जिससे मल आसानी से बाहर निकल जाता है।

कब्ज होने पर किसे त्रिफला लेना चाहिए?

त्रिफला आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली एक औषधि है, जो हरड़, बहेड़ा और आंवला को मिलाकर तैयार किया जाता है। आयुर्वेद में इसे पाचन और मल त्याग को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

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अगर कब्ज होने के साथ अपच, पेट में भारीपन या पाचन से जुड़ी समस्याएं भी रहती हैं तो डॉक्टर व्यक्ति की प्रकृति और लक्षणों को देखकर त्रिफला लेने की सलाह दे सकते हैं।

साल 2025 में Journal of Functional Foods में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, हल्की कब्ज में त्रिफला का इस्तेमाल आंतों की सुरक्षात्मक परत को मजबूत करने और एंटी-ऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित होता है।

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इसबगोल और त्रिफला खाने का सही तरीका 

कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए इसबगोल और त्रिफला दोनों का इस्तेमाल सही तरह से होना जरूरी है।

इसबगोल का इस्तेमाल

इसे आमतौर पर पानी के साथ लिया जाता है और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। इसबगोल की भूसी को पानी या दूध में मिलाकर तुरंत पीना चाहिए और उसेक बाद भी पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए। इसे आप दिन के किसी भी समय ले सकते हैं, क्योंकि इसका असर नियमित लेने से ही होता है।

त्रिफला का इस्तेमाल

इसका सेवन पाउडर, टैबलेट या अन्य रूपों में किया जाता है। इसकी मात्रा और समय व्यक्ति की जरूरत, किस रूप में ले रहे हैं और आयुर्वेदाचार्य की सलाह के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए, बिना सलाह के लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में लेने से बचना चाहिए।

ध्यान रखें, अगर आप कोई नियमित दवा लेते हैं तो इसबगोल को दूसरी दवाओं को लेने के कुछ समय बाद की लें, क्योंकि फाइबर कुछ दवाओं के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है।

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किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • इसबगोल लेते समय पानी की कमी न होने दें, क्योंकि पानी की कमी के कारण गले या आंतों में समस्या बढ़ सकती है। कुछ लोगों को शुरुआत में गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
  • अगर आपको निगलने में परेशानी है, आंतों में रुकावट की समस्या है या तेज पेट दर्द और उल्टी हो रही है तो खुद से इसबगोल लेने से बचना चाहिए।
  • त्रिफला से कुछ लोगों में पेट दर्द, ढीला मल या दस्त जैसी समस्या हो सकती है, खासकर ज्यादा मात्रा में लेने पर।
  • प्रेग्नेंट महिला, ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली माएं, गंभीर बीमारी या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को त्रिफला लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • अगर कब्ज लगातार बना हुआ है, मल में खून आता है, अचानक वजन कम हो रहा है, तेज पेट दर्द है या बाउल मूवमेंट में अचानक बड़ा बदलाव आया है तो घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें।

निष्कर्ष

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि कब्ज के लिए इसबगोल या त्रिफला में क्या बेहतर है? इसका जवाब व्यक्ति के लक्षमों पर निर्भर करता है। सख्त मल और फाइबर की कमी के कारण होने वाली कब्ज की समस्या में इसबगोल प्रभावी हो सकता है। वहीं त्रिफला का इस्तेमाल आयुर्वेद में पाचन और मल त्याग को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए, जरूरी है कि व्यक्ति कब्ज में अपनी जरूरत के अनुसार सही उपचार चुनें और इनके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी, फाइबर से भरपूर भोजन, मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर अपनी स्थिति के अनुसार इसबगोल या त्रिफला चुनने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर हो सकता है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या त्रिफला और इसबगोल को एक साथ लिया जा सकता है?

    हां, त्रिफला और इसबगोल को एक साथ लिया जा सकता है और यह सुरक्षित हो सकता है। यह कॉम्बिनेशन कब्ज से राहत पाने और पेट की सफाई के लिए असरदार हो सकता है।
  • रात में ऐसा क्या खाएं जिससे सुबह पेट साफ हो जाए?

    सुबह पेट साफ करने के लिए आप रात में फाइबर और पानी से भरपूर हल्का भोजन कर सकते हैं। इसके अलावा, गुनगुना पानी पीना, हल्का दलिया, थोड़ा पपीता, इसबगोल या त्रिफला भी खा सकते हैं। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 10, 2026 21:08 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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