Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

कब्ज के ल‍िए इसबगोल या त्रिफला, क्या है ज्‍यादा असरदार?

कब्‍ज एक पाचन समस्‍या है ज‍िसमें मल त्‍याग करने की प्रक्र‍िया मुश्‍क‍िल हो जाती है। कई लोग कब्‍ज में त्र‍िफला को असरदार मानते हैं, तो कुछ कहते हैं क‍ि कब्‍ज में इसबगोल खाना चाह‍िए। वैसे तो दोनों ही पाचन के ल‍िए फायदेमंद होते हैं, लेक‍िन इनमें से कब्‍ज के ल‍िए क्‍या बेहतर है, आइए एक्‍सपर्ट से जानते हैं।

अगर कोई व्‍यक्‍त‍ि हफ्ते में तीन बार से कम मल त्‍याग करता है और उसे मल त्‍याग के दौरान ज्‍यादा जोर लगाना पड़ता है, तो यह माना जाता है क‍ि उसे कब्‍ज है। मेरे दादाजी को कब्‍ज की श‍िकायत थी। उन्‍हें मल त्‍याग करने में काफी परेशानी होती थी। वह खाने के भी शौकीन थे, कुछ भी खाने के बाद उन्‍हें पेट में मरोड़ होने लगती और जब मल त्‍याग करने की कोश‍िश करते तो असफल होते थे। मेरे दादाजी को हर समय पेट भारी महसूस होता था, उन्‍हें लगता था जैसे फ्रेश होने के बाद भी पेट पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है। तब मेरी दादी ने उन्‍हें एक चूर्ण बनाकर द‍िया ज‍िसमें सौंफ, अजवाइन, त्र‍िफला जैसी प्राकृत‍िक सामग्र‍ियां थींं।

कब्‍ज का इलाज जानने से पहले यह समझ लेते हैं क‍ि आख‍िर कब्‍ज होता क्‍यों है? जब शरीर में पानी या फाइबर की कमी होती है, तो कब्‍ज हो सकता है। मल रोककर रखने की आदत, कुछ खास दवाओं का सेवन जैसे एंटीडि‍प्रेसेंट, हार्मोनल असंतुल‍न के कारण भी कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है। कई लोग कब्‍ज को दूर करने के ल‍िए घरेलू नुस्‍खों का प्रयोग करते हैं, कोई अजवाइन खाता है, तो कोई त्र‍िफला या इसबगोल, लेक‍िन कब्‍ज को दूर करने के ल‍िए सबसे अच्‍छी चीज क्‍या है? इस सवाल का जवाब हम आगे एक्‍सपर्ट से जानेंगे क‍ि कब्‍ज में इसबगोल ज्‍यादा असरदार है या त्र‍िफला?

त्र‍िफला से कब्‍ज बढ़ सकता है- Triphala Can Cause Constipation

isaabgol-vs-tripahala-which-is-better-for-constipation

Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana ने बताया क‍ि त्र‍िफला (Triphala) में मौजूद आंवला, हरड़ और बहेड़ा तीनों ही एस्ट्रिंजेंट (Astringents) हैं। इनके कारण कब्‍ज की समस्‍या होती है। लोगों को लगता है क‍ि कब्‍ज के ल‍िए त्र‍िफला का सेवन करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि इससे पेट साफ हो जाता है, लेक‍िन यह एक तरह का म‍िथ है। कब्‍ज में त्र‍िफला का सेवन नहीं करना चाह‍िए। त्र‍िफला को अगर हाई डोज में लेंगे, तो कब्‍ज हो जाएगा। Dr. Shrey ने बताया क‍ि उन्‍होंने कई ऐसे मरीज देखे हैं, जो रोज त्र‍िफला का सेवन करते हैं और फ‍िर भी कब्‍ज की समस्‍या दूर नहीं होती। त्र‍िफला लेने से वात दोष बढ़ जाता है और कब्‍ज की समस्‍या होती है। त्र‍िफला एक रसायन है, यह डायब‍िटीज, त्‍वचा रोग, चर्म रोग, समय से पहले एज‍िंग जैसी समस्‍याओं में काम करता है।

यह भी पढ़ें- पेट की गैस के लिए रामबाण हैं ये 5 ड्रिंक्स, सोने से पहले बस एक गिलास और पाचन रहेगा दुरुस्त

कब्‍ज में इसबगोल है फायदेमंद- Consume Isabgol In Constipation

अश्वगोल एक पौधा है ज‍िससे इसबगोल शब्‍द आया। यह आंतों में जाकर कब्‍ज को दूर करता है। डायर‍िया में भी इसबगोल असरदार है। इसबगोल (Isabgol Or Psyllium Husk) एक वॉटर सॉल्‍यूबल फाइबर है जो पानी सोखकर मल को भारी और नर्म बनाता है ताक‍ि मल त्‍याग में आसानी हो।

न‍िष्‍कर्ष:

इसबगोल एक तरह का फाइबर है ज‍िससे कब्‍ज की समस्‍या दूर होती है और दूसरी ओर त्र‍िफला एक तरह का एस्ट्रिंजेंट है ज‍िससे कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है इसल‍िए त्र‍िफला का सेवन न करें। इसबगोल कब्‍ज और डायर‍िया दोनोंं में फायदेमंद है।

इस लेख को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के साथ शेयर करें। सेहत से जुड़ी अन्‍य जानकारी के ल‍िए ओनलीमायहेल्‍थ के साथ जुड़े रहें।

Read Next

दूध में मिलावट का डर? मखाना मिल्क है सेहत के लिए वरदान; आयुर्वेदाचार्य से जानें बनाने की विधि

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Feb 23, 2026 11:03 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 23, 2026 11:03 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 23, 2026 11:03 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 23, 2026 11:03 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content