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चने का सत्तू गर्म होता है या ठंडा? गर्मियों में सेवन से पहले आयुर्वेदाचार्य से जानें

चने का सत्तू गर्मियों में बहुत पसंद किया जाता है और यह गर्म मौसम में शरीर को ठंडा रखने का काम करता है। चने के सत्तू का सेवन कई अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है।
चने का सत्तू गर्म होता है या ठंडा? गर्मियों में सेवन से पहले आयुर्वेदाचार्य से जानेंचने का सत्तू गर्म होता है या ठंडा? गर्मियों में सेवन से पहले आयुर्वेदाचार्य से जानें

गर्मियों का मौसम शरीर पर बुरा असर डाल सकता है, बढ़ता तापमान, लू और पसीने के कारण शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी हो जाती है, जिससे थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में चने का सत्तू का सेवन लोग ज्यादा करने लगते हैं, यह न केवल सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, बल्कि आयुर्वेद में भी इसे विशेष स्थान दिया गया है। हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, गर्मियों में चने का सत्तू न केवल हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन है, बल्कि यह शरीर को ताकत भी देता है।

चने का सत्तू गर्म होता है या ठंडा?

आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, चने का सत्तू आयुर्वेद में शीत वीर्य यानी ठंडक प्रदान करने वाला माना गया है। इसका अर्थ है कि यह शरीर के अंदर गर्मी को शांत करने में मदद करता है और शरीर को ठंडा रखने में सहायक होता है। इसके अलावा इसे लघु यानी हल्का भी कहा गया है, जो आसानी से पच जाता है और पाचन तंत्र पर भारी नहीं पड़ता।

आयुर्वेद के अनुसार, सत्तू मंद अग्नि यानी कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह हल्का भोजन होने के कारण आसानी से पच जाता है और शरीर को तुरंत एनर्जी प्रदान करता है। डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, सत्तू का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं को भी कम करता है। इसका नियमित सेवन शरीर की आंतरिक अग्नि को संतुलित रखता है।

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गर्मी और लू में सत्तू क्यों है फायदेमंद?

डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि गर्मी और लू के मौसम में शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे जलन, थकान, चक्कर और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में सत्तू का सेवन शरीर को ठंडक प्रदान करता है और पित्त को संतुलित करने में मदद करता है। सत्तू में नेचुरल रूप से मौजूद फाइबर और मिनरल्स शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में सहायक होते हैं। यही कारण है कि गांव में आज भी लोग गर्मियों में सत्तू का शरबत बड़े मजे से पीते हैं।

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सत्तू का सेवन कैसे करें?

डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि सत्तू को पानी या दूध दोनों के साथ लिया जा सकता है, लेकिन गर्मियों में पानी के साथ इसका सेवन ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। पानी के साथ लेने पर यह शरीर को ज्यादा ठंडक प्रदान करता है और हाइड्रेशन में मदद करता है। वहीं दूध के साथ सत्तू लेने से यह थोड़ा भारी हो सकता है, इसलिए इसे मौसम और शरीर की जरूरत के अनुसार लेना चाहिए।

निष्कर्ष

आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, चने का सत्तू ठंडा, हल्का और पाचन के लिए फायदेमंद है। गर्मी और लू के मौसम में इसका सेवन शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है। यह न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद कर सकता है।

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FAQ

  • क्या सत्तू पाचन के लिए अच्छा है?

    सत्तू हल्का होता है और आसानी से पच जाता है, जिस वजह से ये पाचन के लिए अच्छा माना जाता है।
  • क्या सत्तू वजन घटाने में मदद करता है?

    सत्तू में फाइबर होता है जो भूख को कंट्रोल करता है। ऐसे में ये वजन घटाने में सहायक हो सकता है।
  • क्या सत्तू रोज पी सकते हैं?

    सत्तू का सेवन गर्मियों में रोजाना सीमित मात्रा में किया जा सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 28, 2026 18:15 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 28, 2026 18:15 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma