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सोने से कितनी देर पहले फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें

आजकल लोग फोन से एडिक्टेड रहते हैं। हमारा स्क्रीन टाइम धीमे-धीमे बढ़ता जा रहा है और इसकी वजह से हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत भी खराब हो रही है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि सोने से कितनी देर पहले फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 
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सोने से कितनी देर पहले फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें


हम लोग फोन से ज्यादा एडिक्टेड हो गए हैं। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक मोबाइल फोन हमारे साथ रहता है। इसी वजह हम कभी शांत नहीं रह पाते और हमेशा एंग्जायटी के शिकार रहते हैं। लगातार फोन का इस्तेमाल जहां हमारी मानसिक सेहत को प्रभावित करती है वहीं इससे हमारा पाचन तंत्र खराब होने के साथ हम तमाम प्रकार की दिक्कतों के भी शिकार होने लगते हैं। इसके अलावा हमें अहसास भी नहीं है कि रोज हम मोबाइल की वजह से किन समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम कम से कम सोने से पहले फोन को खुद से दूर करें। इसलिए हमने एक्सपर्ट से बात की और जाना कि सोने से कितनी देर पहले फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? साथ ही हम जानेंगे कैसे फोन का इस्तेमाल कम करें (how to stop phone addiction) और इसके क्या नुकसान (mobile addiction side effects) हैं। जानते हैं इन तमाम चीजों के बारे में विस्तार से।

सोने से कितनी देर पहले फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए-How many hours to avoid phone before sleep 

Dr. Prashant Makhija, Consultant Neurologist at Wockhardt Hospitals, Mumbai Central बताते हैं कि आज के डिजिटल युग में, मोबाइल फोन हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। हालांकि, सोने के समय से बहुत करीब अपने फोन का उपयोग करने से आपकी नींद की गुणवत्ता पर काफी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बेहतर नींद और समग्र स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए बिस्तर पर जाने से कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे पहले अपने फोन का उपयोग करना बंद कर दें।

बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदेह

इसे लेकर हमने Dr. RASHMI B V, MBBS, DNB, SENIOR CONSULTANT, DEPT. Of PEDIATRICS AND NEONATOLOGY, MAZUMDAR SHAW MEDICAL CENTRE, NH Health City से बात की जो बताती हैं कि बच्चों के लिए मोबाइल की आदत सबसे ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है। भले ही यह पढ़ने के लिए ही क्यों न हो टीवी या कंप्यूटर डेस्कटॉप पर प्रतिदिन 1 घंटे से ज्यादा उन्हें बैठने न दें। आउटडोर गतिविधियां, खेल, कराटे, संगीत, नृत्य, पेंटिंग, ड्राइंग, बागवानी आदि शौक बच्चे के स्कूल के बाद के घंटों में व्यस्त रखने में मदद कर सकते हैं। मोबाइल छोटे बच्चों के लिए भी नुकसानदेह है। एक बार लत लगने के बाद उनमें बोलने में देरी और बहुत आक्रामक व्यवहार देखा जा सकता है। मोबाइल पर गेम खेलने की लत वाले स्कूल जाने वाले बच्चे अति सक्रिय और अलग-थलग हो जाते हैं। ऐसे बच्चों में नींद न आना, आंखों में तनाव और सिरदर्द आम समस्याएं हो सकती हैं।

दूसरी ओर किशोरों में FOMO कॉम्प्लेक्स होता है, यानी कुछ छूट जाने का डर, जिससे आत्मसम्मान में कमी, चिंता और अवसाद होता है। इसलिए वे सोशल मीडिया पर एक आभासी जीवन दिखाने में लिप्त हो जाते हैं और जीवन के बारे में अवास्तविक अपेक्षाएं विकसित कर लेते हैं। मोबाइल की लत न केवल उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित करती है, बल्कि वे अपने प्रोफेशमल लाइफ और ध्यान केंद्रित करने में भी असमर्थ महसूस कर सकते हैं। युवाओं के साथ साइबरबुलिंग और धोखाधड़ी भी बढ़ रही है। इसलिए माता-पिता को इन बातों का ध्यान रखते हुए बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए।

mobile addiction side effects

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सोने से पहले फोन का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहिए?

इस सलाह के पीछे मुख्य कारण फोन स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट है। यह ब्लू लाइट मेलाटोनिन के उत्पादन को दबाता है। मेलाटोनिन एक हार्मोन जो आपके नींद और जागने के चक्र को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब मेलाटोनिन का स्तर कम होता है, तो सोना मुश्किल हो जाता है और आपको जो नींद आती है वह हल्की और कम आराम देने वाली हो सकती है। सोने से पहले अत्यधिक स्क्रीन टाइम मस्तिष्क को उत्तेजित कर सकता है और नींद की प्राकृतिक शुरुआत में देरी कर सकता है। यहां तक कि सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करना या ईमेल का जवाब देना भी आपके दिमाग को सक्रिय रख सकता है, जिससे आराम करना मुश्किल हो जाता है।

सोने से पहले फोन का इस्तेमाल करने के नुकासन

सेल फोन की लत, नींद कम करता लेकिन मानसिक थकान बढ़ाता है। सोने से पहले अपने सेल फोन का उपयोग करने से अनिद्रा की संभावना बढ़ जाती है। तेज रोशनी नींद की गुणवत्ता को कम कर सकती है। स्मार्टफोन के इस्तेमाल से नींद आने में लगने वाला समय बढ़ सकता है। कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं जैसे संज्ञानात्मक क्षमता में बदलाव, मूड स्विंग्स और मानसिक थकान।

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लंबे समय में, सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहने से आपकी नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिल सकता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ सकती है। अपने फोन का उपयोग करने के बजाय, इस आदत को सोने से पहले शांत करने वाली दिनचर्या से बदलने की कोशिश करें

  • -जैसे कि किताब पढ़ना
  • - ध्यान लगाना
  • -गहरी सांस लेने का अभ्यास करना।

इसके अलावा, अगर आपको इसका इस्तेमाल करना ही है, तो शाम को अपने फोन पर ‘नाइट मोड’ चालू करने पर विचार करें, ताकि ब्लू लाइट का जोखिम कम हो। तो मोबाइल से जुड़ी अपनी आदतों में बदलाव करें और सोने से पहले मोबाइल के इस्तेमाल से पूरी तरह से बचें।

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