Tue Oct 13, 2026 | 02:31 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

छोटी-सी बात पर स्ट्रेस लेते ही कांपने लगता है शरीर? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें इसकी वजह

तनाव के दौरान दिमाग शरीर को खतरे के लिए तैयार करता है और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ सकते हैं। इससे हाथ-पैर कांपना, दिल की धड़कन तेज होना और पसीना आना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
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क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि किसी ने छोटी-सी बात कह दी और आपका शरीर कांपने लगा? कभी ऑफिस में बॉस की डांट सुनकर हाथ कांपने लगते हैं, तो कभी किसी बहस या अचानक आई परेशानी के कारण दिल तेजी से धड़कने लगता है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, अक्सर लोग शरीर में होने वाली इस कंपकंपी को कमजोरी समझ लेते हैं या सोचते हैं कि वे मानसिक रूप से मजबूत नहीं हैं लेकिन तनाव के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों का संबंध हमारे नर्वस सिस्टम से भी हो सकता है।

जब हम डर, चिंता या दबाव महसूस करते हैं, तो शरीर खुद को उस स्थिति का सामना करने के लिए तैयार करने लगता है। इस दौरान कुछ हार्मोन का लेवल बढ़ता है, जिससे दिल की धड़कन तेज होने, पसीना आने और मसल्स में कंपन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि, हर बार शरीर कांपने की वजह तनाव ही हो, यह जरूरी नहीं है। ब्लड शुगर कम होना, थायरॉइड से जुड़ी परेशानी, ज्यादा चाय-कॉफी पीना, नींद की कमी और कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी कंपकंपी का कारण बन सकती हैं।

तनाव में शरीर कांपने की वजह क्या है?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, जब व्यक्ति तनाव या डर महसूस करता है, तो शरीर का नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है। इस दौरान शरीर खतरे का सामना करने या उससे बचने के लिए तैयार होता है। इसे शरीर का 'फाइट या फ्लाइट' रिएक्शन कहा जाता है। इस प्रोसेस में एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का लेवल बढ़ सकता है, जिससे दिल की धड़कन तेज होना, सांसों में बदलाव, पसीना आना और मसल्स में तनाव जैसे रिएक्शन हो सकते हैं।

इसी दौरान हाथों, पैरों या पूरे शरीर में कंपन महसूस हो सकता है। आमतौर पर तनाव कम होने पर ये लक्षण भी धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर तनाव के प्रति अलग तरह से रिएक्ट करता है। कुछ लोगों में यह रिएक्शन ज्यादा साफ नजर आ सकते हैं।

  • कई बार व्यक्ति को लगता है कि वह मानसिक रूप से ठीक है, लेकिन उसका शरीर तनाव के लक्षण दिखाने लगता है।
  • हालांकि, शरीर कांपने का मतलब हमेशा तनाव या चिंता की समस्या होना नहीं है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसके दूसरे कारणों की भी जांच जरूरी है।
  • तनाव के अलावा कई शारीरिक समस्याओं के कारण भी हाथ-पैर या पूरे शरीर में कंपन हो सकता है। लंबे समय तक भूखे रहने या ब्लड शुगर कम होने पर कंपकंपी, पसीना और कमजोरी महसूस हो सकती है।
  • इसके अलावा, ज्यादा चाय-कॉफी पीने, नींद की कमी और कुछ दवाओं के प्रभाव से भी कंपन बढ़ सकता है।
  • थायराइड हार्मोन का लेवल बढ़ने पर भी हाथ कांपने, दिल की धड़कन तेज होने और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में भी कंपन होता है। इसलिए केवल स्ट्रेस को इसकी वजह मानकर खुद से इलाज शुरू करना सही नहीं है।

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स्ट्रेस में शरीर कांपे तो क्या करें?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी सलाह देते हैं कि अगर तनाव के दौरान शरीर कांपने लगे, तो सबसे पहले बैठकर खुद को शांत करने की कोशिश करें। धीरे-धीरे और आराम से सांस लें और सांस लेने की स्पीड को नॉर्मल रखने पर ध्यान दें और आस-पास की किसी शांत चीज पर फोकस करें।

इसके साथ नियमित समय से पूरी नींद लें, समय पर भोजन करें और कैफीन का सेवन सीमित रखें। रोजाना हल्की फिजिकल एक्टिविटी और तनाव कम करने वाली आदतें भी मददगार हो सकती हैं। हालांकि, अगर डायबिटीज है और कंपकंपी के साथ पसीना, चक्कर या कमजोरी महसूस हो रही है, तो ब्लड शुगर की जांच करना जरूरी है। लक्षण गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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साल 2025 में Journal of Neural Transmission में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, कंपकंपी (एसेंशियल ट्रेमर) के मरीजों में मानसिक और तनाव संबंधी परेशानियां आम हैं। हालांकि सीधे तौर पर तनाव या मानसिक विकारों का कंपकंपी की गंभीरता से संबंध नहीं पाया गया, लेकिन अनिद्रा यानी नींद न आने का कंपकंपी और रोजाना के कामों की कठिनाइयों से गहरा संबंध देखा गया। इसका मतलब यह है कि नींद की कमी और कंपकंपी के पीछे कोई साझा शारीरिक कारण हो सकता है। इसलिए, ऐसे मरीजों के इलाज में नींद की क्वालिटी सुधारने पर ध्यान देना बेहद जरूरी है ताकि उन्हें राहत मिल सके और उनका जीवन बेहतर हो सके।

शरीर में कंपन महसूस होने पर कब डॉक्टर से संपर्क करें?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी सलाह देते हैं कि अगर छोटी-छोटी बातों पर तनाव होते ही शरीर बार-बार कांपने लगता है, तो डॉक्टर से सलाह लें। खासकर तब, जब कंपन तनाव खत्म होने के बाद भी बना रहे, आराम की स्थिति में हो या समय के साथ बढ़ता जाए। डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार जांच करके संभावित कारण का पता लगा सकते हैं। अगर शरीर कांपने के साथ अचानक बोलने में परेशानी, चेहरे या हाथ-पैर में कमजोरी, बेहोशी, सीने में दर्द या सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो, तो बिना देरी के इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाएं।

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निष्कर्ष

छोटी-सी बात पर स्ट्रेस लेते ही शरीर कांपना कई बार नर्वस सिस्टम का नॉर्मल रिएक्शन हो सकता है। तनाव के दौरान एड्रेनालिन का लेवल बढ़ने से मसल्स में कंपन और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं लेकिन बार-बार होने वाली कंपकंपी के पीछे ब्लड शुगर में कमी, थायराइड की समस्या, दवाओं का प्रभाव या न्यूरोलॉजिकल कारण भी हो सकते हैं। इसलिए अगर यह समस्या लगातार हो रही है या रोजाना के कामों को प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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FAQ

  • क्या एंग्जायटी के कारण हाथों में कंपकंपी होती है?

    एंग्जायटी के दौरान शरीर का तनाव रिएक्शन सिस्टम एक्टिव हो सकता है, जिससे हाथ कांपना, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
  • क्या घबराहट के कारण पैरों में कमजोरी महसूस होती है?

    घबराहट के दौरान सांस लेने के तरीके में बदलाव और मसल्स में तनाव के कारण पैरों में कमजोरी या अस्थिरता महसूस हो सकती है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 13, 2026 12:16 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti