Fri Sep 11, 2026 | 09:13 PM IST

Medically Reviewed by Dr Ujjawal Kumar , Senior Consultant - Cardiology at the Sarvodaya Hospital, Faridabad

देर रात तक जागने का दिल पर पड़ सकता है बुरा असर, डॉक्टर से समझें कनेक्शन

जो लोग रात को देर तक जागते हैं, उन्हें सिर्फ मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं ही नहीं होती, बल्कि हार्ट पर भी असर पड़ सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने देर रात सोने और हार्ट हेल्थ से जुड़े नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया है।

आजकल रात में देर तक जागना बहुत आम हो गया है। कभी ऑफिस का काम पूरा करना होता है, कभी मोबाइल पर स्क्रॉल करते-करते समय निकल जाता है और कई बार वेब सीरीज या फिल्म देखते हुए रात काफी बीत जाती है। अगर यह रोजाना की आदत बन जाती है, तो समस्या हो सकती है, क्योंकि रात की नींद का हार्ट की सेहत के साथ गहरा कनेक्शन होता है। इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant - Cardiology, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।

उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि आप रोजाना पर्याप्त नींद ले रहे हैं या नहीं। अगर लोगों की रोजाना नींद पूरी नहीं हो रही या वे रात को बार-बार जाग रहे हैं, तो उन्हें हार्ट से जुड़ी समस्याएं होने का रिस्क बढ़ सकता है।

देर रात सोने से हार्ट पर क्या असर पड़ सकता है?

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “सोने के दौरान शरीर का पूरा सिस्टम आराम और रिकवरी मोड में चला जाता है। नींद आने पर सामान्य तौर पर हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर कम हो जाते है, जिससे हार्ट और ब्लड वेसल्स को आराम मिलता है। अगर कोई रात में रोजाना कई घंटों तक जागता है, तो शरीर यह नेचुरल रिकवरी नहीं कर पाता। और लंबे समय तक खराब या कम नींद के कारण हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।”

रिसर्च क्या कहती है?

Frontiers in Cardiovascular Medicine के मुताबिक, स्लीप हार्ट हेल्थ स्टडी में 4,576 लोगों ने हिस्सा लिया था। इसमें 2065 पुरुष और 2511 महिलाएं थी। इनके चार ग्रुप्स बांटे गए, जिसमें से एक ग्रुप को रात 10 बजे या उससे पहले, दूसरे ग्रुप को 10 से 11 बजे, तीसरे ग्रुप को 11 से 12 बजे और चौथे ग्रुप को 12 बजे के बाद सोने को कहा गया। इस दौरान उनके सोने और हार्ट से जुड़ी समस्याओं को चेक किया गया।

रात 10 से 11 बजे के बीच सोने वाले लोगों के मुकाबले 12 के बजे के बाद और 11 से 12 बजे के बीच सोने वाले लोगों में हार्ट अटैक के मामलों की दर ज्यादा देखी गई।

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देर रात जागने से हार्ट पर असर

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं कि लोग देर रात तक जागने के कई कारण हो सकते हैं। कई लोग देर रात में खाना खाते है, चाय-कॉफी या दूसरे कैफीन ड्रिंक्स लेते हैं और फिजिकल एक्टिविटी कम करते हैं। कई लोग देर रात तक मोबाइल देखते हैं और अगर यह रूटीन लंबा चलता है, तो वजन बढ़ना, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इससे हार्ट से जुड़ी बीमारियां बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है।

हार्ट को हेल्दी रखने के तरीके

Dr. Ujjawal Kumar सलाह देते हैं कि लोगों को लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए।

  • रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
  • 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें।
  • सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें।
  • रात में बहुत ज्यादा चाय या कॉफी लेने से बचें।
  • सोने से ठीक पहले भारी खाना खाने की आदत न रखें।
  • दिन में रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करें।
  • बेडरूम को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
  • छुट्टी वाले दिन भी स्लीप शेड्यूल रोजाना की तरह रखें।

डॉक्टर की सलाह कब लें?

Dr. Ujjawal Kumar सलाह देते हैं कि अगर रात में सोने में परेशानी होती है या रात में बार-बार नींद टूटती है, तो इसे लाइफस्टाइल की समस्या मानकर टालना सही नहीं है। जो लोग रोज खर्राटे लेते हैं और सोते समय सांस रुकने जैसी समस्या होती है। सुबह उठने पर सिरदर्द या बहुत ज्यादा थकान रहती है, दिनभर नींद आती है या पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट से जुड़ी बीमारियां हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

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निष्कर्ष
हालांकि, देर रात तक जागना और देर से सोना हर व्यक्ति में सीधे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का कारण नहीं बनती, लेकिन अगर नींद पूरी नहीं होती, तो ब्लड प्रेशर और हार्ट पर असर पड़ सकता है। इसलिए हार्ट को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना समय पर सोएं और अपनी नींद पूरी करें।

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FAQ

  • क्या हफ्ते भर देर रात तक जागने के बाद वीकेंड पर ज्यादा सोकर दिल के नुकसान की भरपाई की जा सकती है?

    वीकेंड पर देर तक सोने को सोशल जेटलैग कहा जाता है। नींद के समय में बार-बार इस तरह का बड़ा बदलाव करने से ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर अनियंत्रित होता है, जिससे दिल पर अचानक तनाव और बढ़ जाता है।
  •  देर रात तक फोन या लैपटॉप की ब्लू लाइट देखने से दिल पर क्या असर पड़ता है?

    ब्लू लाइट दिमाग में नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का बनना तुरंत रोक देती है। मेलाटोनिन पॉवरफुल एंटीऑक्सीडेंट है, जो दिल की नसों को सुरक्षित रखता है। इसकी कमी से दिल की नसों में सूजन और सख्तपन आने लगता है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Sep 11, 2026 20:16 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Sep 11, 2026 20:16 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar

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