Fri Oct 2, 2026 | 04:48 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sunil Kumar K , Pulmonology

बारिश के बाद और ठंड से पहले क्यों बढ़ जाता अस्थमा का खतरा? डॉक्टर से जानें कैसे करें बचाव

डॉ. सुनील कहते हैं कि सितंबर से अस्थमा का पीक सीजन शुरू होता है, जिसकी वजह पराग के कण और तापमान में गिरावट है। आइए, जानते हैं इस बीमारी के टिगर्स के बारे में और इनसे कैसे बचा जाए।
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बारिश के बाद मौसम में हल्की सी नमी घुलने लगती है और धूप के साथ आसपास बैक्टीरिया और वायरस बढ़ने लगते हैं। ऐसे में एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है और अस्थमा जैसी बीमारियों ट्रिगर कर जाती हैं। मौसम बदलने के साथ अस्थमा का खास कनेक्शन है जिसके बारे में अगर आप जान लें तो बदलते मौसम में इससे बच सकते हैं। इसके अलावा भी Dr. Koushik.N, Consultant - Pulmonologist & Sleep Medicine Specialist, Aster RV Hospital, Bangaluru ने इस बीमारी के कई कारणों के बारे में बात की और Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bangaluru ने बताया कि आप कैसे अपना बचाव कर सकते हैं।

मौसम का बदलाव अस्थमा के मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण क्यों है?

Dr. Koushik.N कहते हैं कि मानसून के बाद और सर्दियों से पहले का समय अस्थमा के मरीजों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि तापमान, नमी और हवा में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले कणों में बदलाव से सांस की संवेदनशील नलियों में जलन हो सकती है।

तो Dr. Sunil Kumar K बताते हैं कि मानसून के दौरान और उसके बाद, नमी वाली जगहों पर फफूंद (मोल्ड) पनप सकती है और धूल के कणों (डस्ट माइट्स) का असर बढ़ सकता है। जैसे-जैसे मौसम ठंडा होता है, ठंडी और सूखी हवा से कुछ लोगों की सांस की नलियां सिकुड़ सकती हैं। मौसम बदलने के दौरान वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी आम हो सकते हैं और इनसे अस्थमा अटैक आ सकता है।

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जितना कम तापमान उतना ज्यादा अस्थमा का खतरा

साल 2021 में Annals of African Medicine में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि अस्थमा (दमा) के बिगड़ने में मौसम का बड़ा हाथ होता है। सबसे अधिक मरीजों में अस्थमा की समस्या शुष्क और धूल भरा मौसम में होती है।अस्थमा के बिगड़ने और तापमान के बीच एक उल्टा संबंध है। इसका मतलब है कि तापमान जितना कम होता है अस्थमा का दौरा पड़ने का खतरा उतना ही ज्यादा होता है।

बारिश और ठंड के बीच अस्थमा के ट्रिगर्स 

Dr. Sunil Kumar K कहते हैं कि बारिश और ठंड के बीच टिगर्स की बात करें तो यह हैं-

  • फफूंद (मोल्ड)
  • घर के अंदर की गंदगी और धूल
  • धूल के कण (डस्ट माइट्स)
  • वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन

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अस्थमा के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां

Dr. Koushik.N बताते हैं कि अस्थमा वाले लोगों को उन चीजों की पहचान करनी चाहिए जिनसे उन्हें परेशानी होती है और उनसे बचने के उपाय करने चाहिए जैसे-

  • बेडरूम में हवा आने-जाने का अच्छा इंतजाम रखें और नमी, फफूंदी और पानी के रिसाव जैसी समस्याओं को ठीक करें।
  • सीलन वाली दीवार को सही करें क्योंकि ये अस्थमा को ट्रिगर करने का कारण बन सकता है।
  • बिस्तर की चादर और तकिए के कवर वगैरह नियमित रूप से धोएं और जरूरत पड़ने पर डस्ट-माइट कवर का इस्तेमाल करें।
  • सिगरेट के धुएं, अगरबत्ती, तेज खुशबू वाले परफ्यूम और सांस की नली में जलन पैदा करने वाली दूसरी चीजों के संपर्क में आने से बचें।
  • ठंड के मौसम में स्कार्फ से नाक और मुंह ढकने से सांस के जरिए अंदर जाने वाली हवा गर्म रहती है। इससे आप अस्थमा को ट्रिगर करने से रोक सकते हैं।

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डॉक्टर की सलाह: अस्थमा मैनेजमेंट प्लान

Dr. Sunil Kumar K कहते हैं कि सांस लेने में दिक्कत होने पर या अस्थमा अटैक आने पर रेस्क्यू इनहेलर का इस्तेमाल अस्थमा एक्शन प्लान के अनुसार करना चाहिए। इसके अलावा सबसे जरूरी बात यह है कि जिन लोगों को कंट्रोलर इनहेलर लेने की सलाह दी गई है, उन्हें ठीक महसूस होने पर भी इनका इस्तेमाल बताए गए तरीके से करते रहना चाहिए। अगर घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न या सांस फूलने जैसे लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो डॉक्टर से नियमित रूप से मिलना ज़रूरी है।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. सुनील कहते हैं कि सितंबर के बाद और पूरी तरह से सर्दियों के आने तक घर के बाहर पेड़ों, घास और खरपतवार के परागकण सबसे ज्यादा होते हैं, जबकि गर्मी और उमस वाला मौसम, वायु प्रदूषण या अचानक आने वाले तूफान सांस लेने में गंभीर तकलीफ पैदा कर सकते हैं। ऐसे मे जरूरी यह है कि आप अपने ट्रिगर्स प्वाइंट्स को जानें और समझें कि मौसम बदलते ही आपको यह दिक्कत क्यों होती है और इससे अपना बचाव करें. साथ ही कोशिश की करें कि अपने फेफड़ों की मजबूती बढ़ाएं। इसके लिए बॉक्स ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें और कुछ हर्बल टी का सेवन करें।

FAQ

  • अस्थमा का कोई परमानेंट इलाज है क्या?

    अस्थमा का कोई परमानेंट इलाज नहीं है। आप बस लाइफस्टाइल और इसके ट्रिगर्स को कंट्रल करके ही इस बीमारी से बच सकते हैं। इसके अलावा अस्थमा के लिए कुछ दवाएं हैं लेकिन यह नहीं कह सकते कि यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाएगी।
  • क्या नींबू का रस अस्थमा में फायदेमंद 

    नींबू में विटामिन सी होता है जिसकी चाय पीने से आपको अस्थमा में थोड़ी राहत मिल सकती है लेकिन बिना दवा के इस उपाय का कोई फायदा नहीं है।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 02, 2026 15:24 IST

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