Thu Nov 5, 2026 | 03:38 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

ठंडी हवा लगते ही अस्थमा के मरीजों की सांस क्यों फूलने लगती है? डॉक्टर से समझें कारण और बचाव के उपाय

सुबह की ठंडी हवा के कारण अस्थमा रोगियों को बाहर निकलते ही सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कई बार सुबह की सैर करते समय अस्थमा मरीज सीने में जकड़न महसूस करने लगते हैं। ठंड में ऐसी परेशानी क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है? जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
ठंडी हवा लगते ही अस्थमा के मरीजों की सांस क्यों फूलने लगती है? डॉक्टर से समझें कारण और बचाव के उपायठंडी हवा लगते ही अस्थमा के मरीजों की सांस क्यों फूलने लगती है? डॉक्टर से समझें कारण और बचाव के उपाय

सुबह-सुबह बाहर निकलते ही ठंडी हवा में कुछ लोगों को सैर करना अच्छा लगता है, तो अस्थमा या सांस से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह आफत बन सकती है। ठंडी हवा के साथ 400 पार AQI अस्थमा के मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है। ऐसे में लोग सवाल करते हैं कि ठंडा मौसम होने पर अस्थमा के मरीजों को परेशानी क्यों होने लगती है? क्या ठंडी हवा सांस की नलियों पर असर डालती है? यह जानने के लिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Specialist and Sleep Expert, Founder, MedFirst, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि अस्थमा रोगियों की सांस की नलियां बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है और जब ठंडी हवा नाक के अंदर जाती है, तो ये सिकुड़ जाती है। इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

ठंडी हवा से सांस लेने में परेशानी होने के कारण

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “सांस लेते समय हवा नाक और सांस की नलियों के जरिए फेफड़ों तक पहुंचती है। आमतौर पर नाक हवा को शरीर के अनुसार गर्म और नमी वाली बना देती है, लेकिन जब हवा ठंडी होती है, तो नाक की नलियों को इसे गर्म और नमी करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अस्थमा या सांस से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की सांस की नलियां कुछ ज्यादा सेंसेटिव होती है, तो ऐसे में जैसे ही ठंडी हवा अंदर जाती है, तो उनमें जलन या सिकुड़न हो सकती है। इसका असर सांस लेने की प्रक्रिया पर पड़ता है और खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न जैसी परेशानी महसूस हो सकती है।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, ठंड या मौसम में बदलाव अस्थमा मरीजों के लक्षणों को ज्यादा बढ़ा सकता है और इस वजह से ठंडी हवा के कारण कई लोगों को अस्थमा अटैक होने का रिस्क भी बढ़ सकता है।

ठंडी हवा में सैर करने पर अस्थमा के मरीजों के लक्षण क्यों बढ़ सकते हैं?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया कि अस्थमा में फेफड़ों की सांस से जुड़ी नलियों में सूजन रहती है। ये नलियां ठंड में सिकुड़ जाती हैं, जिससे हवा का फेफड़ों तक आना-जाना मुश्किल हो जाता है। जब अस्थमा से पीड़ित मरीज तेज चलते हुए ठंडी हवा में सांस लेते हैं, तो सांस लेने की स्पीड बढ़ जाती है और ज्यादा ठंडी हवा सांस की नलियों में पहुंचने लगती है। इस मौसम में हवा की क्वालिटी भी खराब है और AQI 400 से पार जा चुका है, जो कई मरीजों में अस्थमा को ट्रिगर कर सकता है। इसके बाद मरीज को लंबे समय तक सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट, लगातार खांसी या सीने में भारीपन महसूस हो सकता है।

ठंडी हवा में अस्थमा के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

National Heart, Lung, and Blood Institute के अनुसार, मौसम में बदलाव और बढ़ता प्रदूषण अस्थमा के मरीजों के फेफड़ों और सांस की नलियों में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। इसलिए बदलते मौसम में लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा कि अगर ठंडी हवा में सांस लेने के बाद बार-बार सांस फूलने लगती है, तो इसे सामान्य मौसमी परेशानी मानकर छोड़ना सही नहीं है। अस्थमा के मरीजों को खासतौर पर इन लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत है।

  • सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज यानी घरघराहट होना
  • लगातार खांसी आना, खासतौर पर रात में या सुबह जल्दी
  • सीने में जकड़न या भारीपन महसूस होना
  • नॉर्मल फिजिकल एक्टिविटी करते समय सांस लेने में परेशानी होना
  • रात में खांसी या सांस की परेशानी के कारण नींद खुलना

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अस्थमा के मरीज ठंडी हवा से कैसे बचें?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj का कहना है कि ठंड के मौसम में अस्थमा के मरीजों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • बहुत ठंडी हवा में बाहर जाने पर नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढककर रखें। इससे अंदर जाने वाली हवा को कुछ हद तक गर्म और नम करने में मदद मिल सकती है।
  • अगर ठंडी हवा ज्यादा है, तो अचानक तेज चलना, दौड़ना या खुले में एक्सरसाइज करना परेशानी बढ़ा सकता है।
  • फिजिकल एक्टिविटी करने से पहले धीरे-धीरे वार्म-अप करें। अगर ठंडी हवा और खराब AQI हो, तो जरूरत पड़ने पर घर के अंदर एक्सरसाइज करें।
  • अस्थमा के मरीजों को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर रेगुलर लेने चाहिए। ठंडी हवा में अस्थमा के मरीज इनहेलर अपने पास ही रखें।
  • ठंडी हवा के साथ-साथ धूल, धुआं, खराब AQI और एलर्जी वाली चीजें अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकती है। इसलिए ट्रिगर्स से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
  • अगर मरीज को खांसी, घरघराहट या सांस फूलने की परेशानी बार-बार होने लगे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

डॉक्टर की सलाह

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj सलाह देते हैं कि अगर किसी को सांस लेने में दिक्कत होती है, अपना वाक्य पूरा न कर पा रहे हैं और होंठ नीले पड़ने लगे, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। हालांकि, इस बात का भी ध्यान रखें कि ठंडी हवा के कारण सांस फूलना हर बार अस्थमा का संकेत नहीं होता। कई बार इसका कारण सांस से जुड़ी अन्य समस्याएं या हार्ट से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए समय पर चेकअप कराना जरूरी है।

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निष्कर्ष
बदलते मौसम में ठंडी हवा अस्थमा के मरीजों को परेशानी दे सकती है। इससे मरीज को खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति पर ठंड का असर एक जैसा नहीं होता। इसलिए अगर किसी भी तरह की परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार बदलते मौसम में लक्षणों को इग्नोर करने पर सांस से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

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FAQ

  • क्या अस्थमा के मरीजों को सर्दियों की शुरुआत में फ्लू का टीका लगवाना चाहिए?

    सर्दियों में इन्फ्लुएंजा वायरस सांस नलियों की भीतरी झिल्ली को नष्ट कर देता है, जिससे साधारण फ्लू भी अस्थमा के मरीजों में जानलेवा निमोनिया या गंभीर अस्थमा अटैक का रूप ले सकता है। 
  • सर्दियों में कफ सिरप पीने से सांस का दौरा रुक सकता है?

    साधारण कफ सिरप सांस नलियों को नहीं खोल सकते, बल्कि कुछ सेडेटिव सिरप सांस लेने की गति को धीमा कर स्थिति बिगाड़ सकते हैं। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 05, 2026 14:23 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj