Tue Oct 27, 2026 | 07:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Jee Sharma , Sr. Consultant – Internal Medicine

मौसम बदलते ही क्यों बढ़ने लगता है अस्थमा अटैक का खतरा? डॉक्टर ने बताए 5 बड़े ट्रिगर्स

मौसम बदलने पर ठंडी हवा, धूल, प्रदूषण और वायरल इंफेक्शन अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकते हैं। यहां डॉक्टर से जानिए, किन ट्रिगर्स से अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ता है और सांस की परेशानी से बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं।
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मौसम में थोड़ा-सा बदलाव होते ही अगर आपकी सांस फूलने लगती है, रात में खांसी बढ़ जाती है या सीने में जकड़न महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। खासकर अगर आपको अस्थमा है, तो बदलता मौसम आपकी परेशानी बढ़ा सकता है। सर्दियों की शुरुआत, सुबह-शाम की ठंडी हवा और हवा में मौजूद प्रदूषण के कारण कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। कैलाश अस्पताल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, सर्दियों की शुरुआत, तापमान में अचानक गिरावट, हवा में तेजी से बढ़ता प्रदूषण जैसे कारक अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

मौसम बदलने पर अस्थमा अटैक का खतरा क्यों बढ़ता है?

डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, अस्थमा के मरीजों की सांस की नलियां सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा सेंसिटिव होती हैं। ठंडी हवा, एलर्जी पैदा करने वाले कण और वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से इन नलियों में सूजन बढ़ सकती है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है, कई बार मौसम में बदलाव के साथ वायरल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है, जो अस्थमा के लक्षणों को गंभीर बना सकता है लेकिन डॉक्टर गोपाल जी शर्मा का ये भी कहना है कि हर मरीज में अस्थमा के ट्रिगर्स अलग-अलग हो सकते हैं।

1. ठंडी और ड्राई हवा

डॉ. गोपाल जी शर्मा बताते हैं कि सर्दियों में तापमान गिरने और ठंडी हवा के संपर्क में आने से अस्थमा के कुछ मरीजों की सांस की नलियों में सिकुड़न हो सकती है। खासकर सुबह और रात के समय ठंडी हवा में बाहर निकलने या ठंड में एक्सरसाइज करने से खांसी, घरघराहट और सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ से ढकना मददगार हो सकता है।

2. धूल के कण

डॉक्टर गोपाल जी शर्मा के अनुसार, घर की धूल, बिस्तर, गद्दे, तकिए और पर्दों में मौजूद धूल के कण कुछ लोगों में एलर्जी और अस्थमा के ट्रिगर का कारण बन सकते हैं। मौसम बदलने पर घर की सफाई करते समय उड़ने वाली धूल भी परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए नियमित रूप से सफाई करें, बिस्तर की चादरें धोएं और सफाई के दौरान धूल के संपर्क को कम करने की कोशिश करें।

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3. वायु प्रदूषण और धुआं

मौसम बदलने के दौरान हवा में प्रदूषण, धूल और धुआं अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, कचरा जलाने से पैदा होने वाला धुआं और अन्य प्रदूषक सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। प्रदूषण ज्यादा होने पर अस्थमा के मरीज बाहर की एक्टिविटीज सीमित रखें और धुएं के सीधे संपर्क से बचें।

4. फफूंद

नमी वाली जगहों पर पनपने वाली फफूंद एलर्जी के प्रति सेंसिटिव लोगों में अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकती है। घर की दीवारों, बाथरूम और अन्य नम जगहों पर फफूंद दिखाई देने पर उसे साफ कराएं और घर में नमी जमा न होने दें।

5. वायरल इंफेक्शन

मौसम बदलने पर सर्दी-जुकाम और अन्य रेस्पिरेटरी इंफेक्शन हो सकते हैं। वायरल इंफेक्शन से सांस की नलियों में सूजन बढ़ सकती है, जिससे अस्थमा के मरीजों को खांसी, घरघराहट और सांस फूलने की परेशानी ज्यादा हो सकती है। इसलिए हाथों की सफाई रखें, बीमार लोगों के निकट संपर्क से बचें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी वैक्सीनेशन कराएं।

Asthma Attack TriggersAsthma Attack Triggers

साल 2023 में Immunology and Allergy Clinics of North America जर्नल में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, तूफान, जंगल की आग, बाढ़ और ज्यादा तापमान जैसी खराब मौसम की घटनाएं अस्थमा के मरीजों की सेहत पर बहुत बुरा असर डालती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट इन खतरों के बारे में पूरी जानकारी रखें, ताकि वे समय रहते मरीजों को जागरुक कर सकें और उनके बचाव के लिए सही कदम उठा सकें।

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अस्थमा अटैक से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें?

डॉ. गोपाल जी शर्मा सलाह देते हैं कि अस्थमा को कंट्रोल रखने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित इस्तेमाल करना जरूरी है। यदि आपको इनहेलर दिया गया है, तो उसे इस्तेमाल करें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें। अपने ट्रिगर्स की पहचान करें और उनसे बचने की कोशिश करें। ठंडी हवा में बाहर निकलते समय मुंह और नाक ढकें, घर में धूल और नमी कम रखें और वायु प्रदूषण यानी एयर पॉल्यूशन ज्यादा होने पर बाहर जाने को सीमित करें।

निष्कर्ष

मौसम में बदलाव अस्थमा के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला हो सकता है, लेकिन सही सावधानियों और नियमित इलाज से इसके जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। ठंडी हवा, प्रदूषण, धूल, फफूंद और वायरल इंफेक्शन अस्थमा के ट्रिगर्स हो सकते हैं। हर व्यक्ति के ट्रिगर्स अलग होने के कारण अपने लक्षणों पर ध्यान देना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखना जरूरी है। सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने पर घरेलू उपायों के भरोसे न रहें और तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

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FAQ

  • क्या अस्थमा अपने आप ठीक हो सकता है?

    कुछ बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ अस्थमा के लक्षण कम हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है। लक्षण दोबारा भी उभर सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार निगरानी जरूरी है।
  • क्या अस्थमा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?

    नहीं, अस्थमा संक्रामक बीमारी नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। हालांकि, कुछ परिवारों में आनुवंशिक कारणों से अस्थमा होने की संभावना ज्यादा हो सकती है।
  • क्या अस्थमा के मरीजों को पालतू जानवरों से दूर रहना चाहिए?

    हर मरीज को पालतू जानवरों से दूर रहने की जरूरत नहीं होती लेकिन अगर जानवरों के बालों से एलर्जी के लक्षण बढ़ते हैं, तो उनके संपर्क को सीमित करना मददगार हो सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 27, 2026 17:29 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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