Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

मौसम बदलने पर आपको भी होता है सिर दर्द? डॉक्टर से जानें कारण और बचाव के उपाय

बदलते मौसम या बारिश में सिरदर्द आम है, खासकर माइग्रेन पीड़ितों के लिए, जिसका कारण हवा का दबाव, तापमान और नमी में बदलाव हो सकता है। सिरदर्द से राहत के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने और पर्याप्त पानी पीने जैसी आदतों को अपनाएं।

बदलते मौसम या बारिश के मौसम में कई बार लोगों को सिरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके कारण लोगों को कई तरह की परेशानियां होती हैं, खासकर जिन लोगों को पहले से माइग्रेन या बार-बार सिरदर्द की समस्या बनी रहती है, उनको मौसम में होने वाले बदलाव ज्यादा महसूस होते हैं। कभी बारिश से पहले, कभी बारिश के दौरान और कभी मौसम बदलने के बाद सिर भारी लग सकता है या सिरदर्द हो सकता है। हर व्यक्ति में इसका कारण एक जैसा नहीं होता है। ऐसे में आइए Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें बदलते मौसम में सिरदर्द के कारणों के बारे में।

बारिश या बदलते मौसम में सिरदर्द क्यों होता है?

डॉ. पूजा के अनुसार, कुछ लोगों को बारिश या मौसम बदलने पर सिरदर्द हो सकता है, क्योंकि हवा के दबाव, तापमान और नमी में बदलाव शरीर पर असर डाल सकते हैं और सिर के आस-पास की ब्लड वेसल्स, नसों और दबाव के प्रति सेंसिटिव टिश्यूज को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, ठंडी हवा, तेज हवाएं, तेज रोशनी या रूटीन में बदलाव भी उन लोगों में सिरदर्द शुरू कर सकते हैं, जो मौसम के प्रति सेंसिटिव होते हैं।

माइग्रेन के मरीजों को होती है ज्यादा परेशानी

डॉ. पूजा कहते हैं, मौसम में बदलाव उन लोगों में खासतौर पर महसूस हो सकता है, जिन्हें पहले से माइग्रेन है, क्योंकि माइग्रेन से पीड़ित लोग अपने आस-पास के बदलावों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो सकते हैं। बारिश या तूफान भी इनडायरेक्ट रूप से खराब नींद, डिहाइड्रेशन, खाना न खाने, फिजिकल एक्टिविटीज कम होने या कैफीन के सेवन में बदलाव के जरिए सिरदर्द का कारण बन सकते हैं, जिससे मौसम से जुड़े हर सिरदर्द का एक ही कारण पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

माइग्रेन सिर्फ नॉर्मल सिरदर्द नहीं है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति कई तरह के बाहरी बदलावों के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकता है। तेज रोशनी, तेज आवाज, नींद में बदलाव या कुछ अन्य परिस्थितियां भी कुछ लोगों में माइग्रेन को बढ़ा सकती हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि बारिश हर माइग्रेन मरीज में सिरदर्द का कारण बने। हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं।

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साल 2024 में Current Pain and Headache Reports में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, मौसम और माइग्रेन के बीच कोई सीधा और साफ संबंध नहीं है, इसलिए मरीजों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मौसम के अलावा अन्य कारण (ट्रिगर्स) भी माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, जिन माइग्रेन के मरीजों को मौसम के बदलाव से परेशानी होती है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे माइग्रेन को बढ़ाने वाले अन्य कारणों को कंट्रोल करें, जैसे कि उन चीजों से बचें जिन्हें वे खुद नियंत्रित कर सकते हैं। मौसम में माइग्रेन के शुरुआती लक्षण (प्रोड्रोमल सिम्पटम्स) महसूस होने पर, जो उनके लिए ट्रिगर हो सकते हैं, पहले से ही इलाज शुरू कर सकते हैं।

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ठंडी हवा और तेज हवा भी बढ़ा सकती है परेशानी

डॉ. पूजा कहती हैं, बारिश के साथ कई बार ठंडी हवा या तेज हवा चलने लगती है। कुछ सेंसिटिव लोगों में ठंडी हवा सिरदर्द की परेशानी को बढ़ा सकती है। तेज हवा के कारण बाहर के वातावरण में अचानक बदलाव महसूस हो सकता है।

बारिश के मौसम में रोशनी की स्थिति भी बदलती रहती है। जिन लोगों को रोशनी से सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या होती है, उनके लिए ऐसे बदलाव परेशानी का कारण बन सकते हैं।

सिर्फ मौसम ही जिम्मेदार नहीं होता है

डॉ. पूजा कहती है, बारिश के दौरान सिरदर्द होने के पीछे सिर्फ मौसम को जिम्मेदार मानना ठीक नहीं है। अगर आप देखते हैं कि बारिश से पहले या उसके दौरान या मौसम में बदलाव बार-बार सिरदर्द होता है, तो मौसम, नींद, खाने-पीने, कैफीन के सेवन और अन्य लक्षणों की एक नॉर्मल डायरी रखने से आपके व्यक्तिगत ट्रिगर्स (सिरदर्द शुरू करने वाली वजहों) का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

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बारिश या मौसम में बदलाव से सिरदर्द से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. पूजा का कहना है, सिरदर्द की समस्या से राहत के लिए अपनी लाइफस्टाइल को नियमित रखना जरूरी है। ऐसा करने से सिरदर्द के कारण होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। इसके लिए हेल्दी आदतों को अपनाएं। जैसे -

  • पर्याप्त पानी पीना और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
  • समय पर खाना खाएं।
  • नींद का नियमित समय बनाए रखें।
  • स्ट्रेस को नियंत्रित करने की कोशिश करें। इससे सिरदर्द कम हो सकता है।
  • अपनी जरूरत के अनुसार नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटीज करें।
  • की कोशिश करना फायदेमंद हो सकता है।
  • अगर आपको पता है कि तेज रोशनी, ठंडी हवा या किसी खास मौसम में परेशानी बढ़ती है, तो उस परिस्थिति से बचने की कोशिश करना फायदेमंद हो सकता है।

ध्यान रहे, बार-बार होने वाले, गंभीर या नए सिरदर्द की मेडिकल जांच तुरंत करवानी चाहिए। खासकर, अगर वे अचानक और बहुत दर्दनाक हों या उनके साथ कमजोरी, कंफ्यूजन, बेहोशी, देखने में परेशानी, बुखार, बार-बार उल्टी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण हों।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

डॉ. पूजा बताती हैं, बार-बार होने वाला, बहुत तेज सिरदर्द सिर्फ मौसम की वजह से मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर सिरदर्द आपके नॉर्मल लाइफस्टाइल को प्रभावित कर रहा है या बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच और सही सलाह लेना बेहतर है। अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज शुरू हो या इसके साथ कमजोरी, भ्रम, बेहोशी, दिखाई देने में परेशानी, बोलने में परेशानी, बुखार या बार-बार उल्टी आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

बारिश या मौसम में बदलाव कुछ लोगों में सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है। हवा के दबाव, तापमान और नमी में बदलाव के साथ ठंडी हवा, तेज हवा और रोशनी में बदलाव भी सेंसिटिव लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। माइग्रेन से पीड़ित लोगों में मौसम से जुड़ी सेंसिटिविटी ज्यादा महसूस हो सकती है। फिर भी हर व्यक्ति के सिरदर्द का कारण अलग हो सकता है। इसलिए मौसम के साथ नींद, खाना, पानी, स्ट्रेस और कैफीन जैसी लाइफस्टाइल की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

लगातार सिरदर्द होने पर खुद से कारण तय करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। मौसम बदलने पर बार-बार सिरदर्द होने की स्थिति में लक्षणों को नजरअंदाज न करें। अपनी लाइफस्टाइल और लक्षणों का रिकॉर्ड रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • सिरदर्द होने के मुख्य कारण क्या हैं?

    स्ट्रेस, नींद की कमी, शरीर में पानी की कमी, मोबाइल या लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल करने, आंखों पर जोर पड़ने और भूखा रहने के कारण सिरदर्द की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, पहले से माइग्रेन जैसी समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी सिरदर्द बना रहता है।
  • सिरदर्द के क्या लक्षण हैं?

    सिरदर्द की समस्या होने पर सिर या चेहरे के हिस्से में दर्द, दबाव. चुभन महसूस होने, जकड़न होने, कमजोरी, बोलने में परेशानी और कई बार चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 23, 2026 23:39 IST

    Modified By : Priyanka Sharma
  • Aug 23, 2026 23:39 IST

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