आज के समय में गर्दन में दर्द एक आम समस्या हो चुकी है। अक्सर लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल, गलत पोस्चर में बैठे रहने, अचानक गर्दन में खिंचाव, स्ट्रेस, नींद की गलत स्थिति या किसी चोट के कारण गर्दन में दर्द और अकड़न हो सकती है। ऐसे में कई लोग इससे राहत के लिए गर्म पानी की बोतल या आइस पैक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर तरह के गर्दन के दर्द में एक ही तरीका सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
गर्म और ठंडी सिकाई दोनों ही कुछ लोगों में दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इनमें सही ऑप्शन का चुनाव करना जरूरी होता है। आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV hospital, Bengaluru से जानें।
गर्दन दर्द के लिए हीट या कोल्ड थेरेपी क्या है फायदेमंद?
डॉ. अरविंद एस एन के अनुसार, हीट थेरेपी और कोल्ड थेरेपी दोनों ही गर्दन के दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन सही इलाज का चुनाव दर्द के कारण और चोट की स्थिति पर निर्भर करता है। यह समझना कि कब किसका इस्तेमाल करना है, दर्द से राहत और तेजी से ठीक होने में मदद कर सकता है।
साल 2010 में Academic Emergency Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एक्यूट गर्दन या कमर की मोच के इलाज में इबुप्रोफेन दवा के साथ 30 मिनट तक गर्म सिंकाई या ठंडी बर्फ की सिकाई करने से, दर्द में हल्का सा सुधार होता है। गर्म या ठंडी सिंकाई में से किसे चुनना है, यह मरीज की जरूरत और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
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हीट थेरेपी और कोल्ड थेरेपी में अंतर
डॉ. अरविंद बताते हैं, हीट और कोल्ड थेरेपी गर्दन दर्द में जरूरत के अनुसार फायदेमंद होती हैं। ऐसे में इनका सही इस्तेमाल करना जरूरी होता है। इसके लिए इन दोनों में अंतर समझना जरूरी है।
| ठंडी सिकाई (कोल्ड थेरेपी) | गर्म सिकाई (हीट थेरेपी) | |
| कब है फायदेमंद | चोट या दर्द की शुरुआत में। | दर्द, अकड़न और मांसपेशियों के स्ट्रेस में, खासकर लंबे समय के दर्द में। |
| सिकाई करने से क्या होता है | थोड़े समय के लिए दर्द में राहत। | मांसपेशियों को आराम दें और मूवमेंट में मददगार। |
| कैसे करें सिकाई | कपड़े में लपेटकर। | हल्की गर्माहट के साथ, कपड़े की परत रखकर। |
| सावधानी | सीधे त्वचा पर न लगाएं। | बहुत गर्म तापमान से बचें। |
डॉ. अरविंद कहते हैं, यह याद रखना जरूरी है कि यह कोई सख्त नियम नहीं है। कुछ लोगों को शुरुआती गर्दन के दर्द में भी गर्म सिकाई आराम देती है और कुछ लोगों को ठंडी सिकाई। डॉक्टर की सलाह से इन दोनों का इस्तेमाल थोड़े समय के लिए दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है।
ठंडी सिकाई कब फायदेमंद हो सकती है?
डॉ. अरविंद बताते हैं, अगर गर्दन में दर्द अचानक लगी चोट के बाद शुरुआती 24-48 घंटों के दौरान, मांसपेशियों में खिंचाव या किसी हल्के ट्रॉमा के बाद शुरू हुआ है, तो शुरुआती समय में ठंडी सिकाई राहत दे सकती है। आइस पैक से दर्द वाले हिस्से में कुछ समय के लिए दर्द कम हो सकता है। कुछ लोगों को चोट के शुरुआती दिनों में ठंडक गर्म सिकाई की तुलना में ज्यादा आराम देती है।
डॉ. अरविंद आगे बताते हैं, आइस पैक को सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए। इसका इस्तेमाल पतले तौलिये या कपड़े में लपेटकर करना सेफ रहता है। अलग-अलग मेडिकल सोर्स कुछ मिनट से लगभग 15-20 मिनट तक की ड्यूरेशन बताते हैं, इसलिए बहुत लंबे समय तक लगातार बर्फ लगाने से बचना चाहिए। आइस पैक लगाने से ब्लड वेसल्स के सिकुड़ने और नर्व एक्टिविटी के धीमे होने से सूजन और दर्द को कम करने में मदद मिलती है। यह अचानक मांसपेशियों में खिंचाव, खेल-कूद से जुड़ी चोटों या मामूली चोट के बाद फायदेमंद है।

गर्म सिकाई कब फायदेमंद हो सकती है?
डॉ. अरविंद बताती हैं, गर्म सिकाई तब फायदेमंद महसूस हो सकती है, जब गर्दन में अकड़न, मांसपेशियों का स्ट्रेस या लंबे समय से चला आ रहा दर्द हो। गर्म पानी से नहाना, हल्का गर्म पैड या गर्म पानी की बोतल शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देने, मांसपेशियों को रिलैक्स करने और गर्दन का लचीलापन बेहतर होता है।
लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करने, गलत पोस्चर में बैठने या स्ट्रेस के कारण गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। ऐसे मामलों में हल्की गर्माहट जकड़न या गर्दन की पुरानी अकड़न से कई लोगों को आराम देती है। गर्म सिकाई को भी सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि बहुत ज्यादा गर्मी से त्वचा के जलने का खतरा रहता है।
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कैसे करें गर्म और ठंडी सिकाई?
डॉ. अरविंद के अनुसार, कुछ लोगों को हीट और कोल्ड थेरेपी दोनों बारी-बारी से इस्तेमाल करने से राहत मिल सकती है। हालांकि, दोनों को लगातार या बहुत देर तक इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। जिस ऑप्शन से दर्द कम हो और गर्दन की नॉर्मल एक्टिविटी आसान लगे, उसे सीमित समय के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोल्ड थेरेपी सूजन कम करती है, जबकि हीट थेरेपी ठीक होने की प्रक्रिया और मांसपेशियों को आराम देने में मदद करती है। अगर किसी चोट के बाद गर्दन में काफी सूजन है या दर्द तेजी से बढ़ रहा है, तो सिर्फ घरेलू सिकाई पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
सिकाई के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान
डॉ. अरविंद बताते हैं, गर्दन के दर्द में सिर्फ गर्म या ठंडी सिकाई पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता है। इसके अलावा, गर्दन दर्द से राहत के लिए लाइफस्टाइल से जुड़ी अच्छी आदतों को भी अपनाना चाहिए। जैसे -
- लंबे समय तक एक ही पोजिशन या खराब पोस्चर में बैठने से बचें।
- सही पोस्चर में बैठें।
- कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में स्थिति बदलें और ब्रेक लें।
- हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग और गर्दन-कंधे की एक्सरसाइज भी की जा सकती हैं। नियमित एक्टिविटीज, सही पोस्चर, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस को नियंत्रित करना भी गर्दन के दर्द को संभालने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, इन आदतों को अपनाने से गर्दन और कंधे की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ लंबे समय तक ठीक रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
अगर गर्दन का दर्द कुछ हफ्तों में ठीक नहीं हो रहा है, लगातार बढ़ रहा है या बार-बार शुरु हो जाता है, तो मेडिकल जांच कराना जरूरी है, खासकर अगर इसके साथ हाथ या पैर में कमजोरी होने, सुन्नपन या झनझनाहट, चलने में परेशानी, तेज सिरदर्द, बुखार या चोट के बाद गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ये लक्षण ऐसी स्थितियों का संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए खास इलाज की जरूरत होती है।
सिर्फ सिकाई से हर तरह के गर्दन दर्द का इलाज नहीं किया जा सकता है। नस पर दबाव, सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य संरचनात्मक कारण की स्थिति में डॉक्टर लक्षणों के आधार पर फिजियोथेरेपी, दवाओं या आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
स्लिप्ड डिस्क, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस या नर्व कम्प्रेशन यानी तंत्रिका पर दबाव जैसी स्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं में हीट या कोल्ड थेरेपी मेडिकल केयर का ऑप्शन नहीं हैं। डॉक्टर बीमारी की पहचान के आधार पर फिजियोथेरेपी, दवाओं या आगे की जांच की आवश्यकता हो सकती है।
निष्कर्ष
गर्दन के दर्द में गर्म सिकाई और ठंडी सिकाई दोनों की अपनी जरूरत हो सकती है। अचानक लगी चोट या शुरुआती दर्द में ठंडी सिकाई कुछ लोगों को राहत दे सकती है, जबकि अकड़न और मांसपेशियों के स्ट्रेस में लिए गर्म सिकाई ज्यादा आरामदायक हो सकती है। ध्यान रहे, हर व्यक्ति और हर दर्द का कारण अलग होता है, ऐसे में हीट और कोल्ड थेरेपी को इलाज नहीं माना चाहिए।
सही समय पर सही थेरेपी का इस्तेमाल करने, लाइफस्टाइल में बदलाव और समय पर मेडिकल सलाह के साथ, गर्दन के दर्द को कम किया जा सकता है, साथ ही गर्दन की मूवमेंट को बेहतर किया जा सकता है और दर्द को बार-बार होने से रोका जा सकता है। अगर दर्द बना रहता है, बढ़ता है या उसके साथ सुन्नपन, कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से तुरंत सलाह लें।
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FAQ
गर्दन दर्द के क्या कारण हैं?
गलत पोस्चर में बैठे रहने, मांसपेशियों में खिंचाव आने, गलत तकिए का इस्तेमाल करने, उम्र बढ़ने, हड्डियों और जोड़ों के कमजोर होने, स्ट्रेस में रहने, लंबे समय तक फोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय झुके रहने से व्यक्ति को गर्दन में दर्द होने की समस्या होती है।गर्दन के दर्द के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
गर्दन दर्द की समस्या होने पर व्यक्ति को मांसपेशियों में खिंचाव होने, गर्दन में हल्की जकड़न होने, सिर घुमाने पर परेशानी होने, सिर के पीछे हल्का भारीपन होने और गर्दन में दर्द बना रहने की समस्या हो सकती है।
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Aug 19, 2026 13:39 IST
Modified By : Priyanka Sharma Aug 19, 2026 13:39 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Aravinda S N