Tue Oct 6, 2026 | 03:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sunil Kumar K , Pulmonology

ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में क्या अंतर है? डॉक्टर से जानें कौन है ज्यादा गंभीर

Bronchitis vs Asthma: ब्रोंकाइटिस और अस्थमा, दोनों ही फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी है लेकिन दोनों में अंतर बहुत है। ब्रोंकाइटिस, COPD का ही एक प्रकार है। आइए, जानते हैं डॉक्टर से दोनों में कौन ज्यादा गंभीर बीमारी है?
ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में क्या अंतर है? डॉक्टर से जानें कौन है ज्यादा गंभीर
ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में क्या अंतर है? डॉक्टर से जानें कौन है ज्यादा गंभीर

Bronchitis vs Asthma: ब्रोंकाइटिस की बीमारी जिन भी लोगों को होती है उन्हें यह रह-रहकर परेशान करती है। जैसे ही मौसम बदलता है या हवा में प्रदूषण के कण बढ़ जाते हैं तो यह बीमारी ट्रिगर कर जाती है। ऐसा ही कुछ हाल अस्थमा में भी होता है। हालांकि, इन दोनों ही बीमारियों में काफी अंतर है जिसके बारे में लोग कम जानते हैं। Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bangaluru कहते हैं कि हालांकि, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा, दोनों के कारण खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन इनमें अलग-अलग प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इस अंतर को विस्तार से समझने के लिए हमने Dr. Koushik.N, Consultant - Pulmonologist & Sleep Medicine Specialist, Aster RV Hospital, Bangaluru से भी बात की।

ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में क्या अंतर है?

ब्रोंकाइटिस और अस्थमा, दोनों के बीच सबसे अंतर है इसके कारणों का जैसे ब्रोंकाइटिस इंफेक्शन है लेकिन अस्थमा एक क्रोनिक कंडीशन है। Dr. Koushik.N कहते हैं कि एक्यूट ब्रोंकाइटिस आमतौर पर तब होता है जब श्वसनी नलिकाएं (bronchial tubes) में सूजन आ जाती है, लेकिन अस्थमा एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है जो एयरवेज (airways) को प्रभावित करती है। हम विस्तार से समझते हैं दोनों बीमारियों में होता क्या है?

तुलना के बिंदु ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) अस्थमा (Asthma)
फेफड़े में कहां सूजन होती है ब्रोंकियल ट्यूब में सूजन की समस्या होती है। सांस की नलियों में लंबे समय तक सूजन रहती है।
कारण धूम्रपान और फेफड़ों को परेशान करने वाले अन्य पदार्थों जैसे पराग के कण और प्रदूषण एलर्जी, एक्सरसाइज, ठंडी हवा, प्रदूषण या श्वसन संक्रमण के कारण
लक्षण सीने में घरघराहट, रात में खांसी, सांस लेने में तकलीफ सीटी जैसी आवाज के साथ रात के समय या सुबह-सुबह सांस लेने में दिक्कत
इलाज एंटीबायोटिक्स से इलाज किया जाता है ब्रोंकोडाइलेटर दवाएं और इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स से

ब्रोंकाइटिस में क्या होता है?

Dr. Koushik.N कहते हैं कि ब्रोंकाइटिस तब होता है जब ब्रोंकियल ट्यूब में सूजन आ जाती है और यह समस्या अक्सर किसी इंफेक्शन की वजह से होती है। इसमें ब्रोंकियल ट्यूब में बलगम जमा होने लगता है और हवा आना जाना मुश्किल हो जाता है जिस वजह से लोग कंजेशन से परेशान हो जाते हैं। ब्रोंकाइटिस भी दो प्रकार के होते हैं

  • एक्यूट ब्रोंकाइटिस जो अक्सर सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे वायरस की वजह से होता है और यह जल्दी ठीक हो जाता है।
  • क्रोनिक ब्रोंकाइटिस महीनों तक रहती है। ऐसा अक्सर स्मोकिंग या लंबे समय तक हवा प्रदूषण के संपर्क में रहने से होता है इसलिए इसे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) का ही एक रूप माना जाता है।

अस्थमा में क्या होता है?

डॉ. सुनील कहते हैं कि अस्थमा की बीमारी में सांस की नलियों में सूजन लंबे समय तक बनी रहती हैं। दरअसल, यह वह नलियां हैं जो आपके फेफड़ों तक हवा पहुंचाती हैं और वहां से बाहर निकालती हैं। ऐसा होने पर सांस लेने में मुश्किल होती है और जब मरीज सांस लेता है तो सीटी जैसी आवाज आती है।

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कारणों का अंतर

डॉ. कौशिक कहते हैं कि अस्थमा की बीमारी किसी एलर्जी, एक्सरसाइज, ठंडी हवा, प्रदूषण या श्वसन संक्रमण के कारण ट्रिगर कर सकती है तो ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का एक प्रकार है। इसमें आमतौर पर लंबे समय तक बलगम वाली खांसी होती है और यह धूम्रपान और फेफड़ों को परेशान करने वाले अन्य पदार्थों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से जुड़ा हुआ है।

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लक्षणों का अंतर

डॉ. सुनील कहते हैं कि अस्थमा में सीटी जैसी आवाज के साथ रात के समय या सुबह-सुबह सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। लगातार सीने में जकड़न के साथ परेशान करने वाली खांसी हो सकती है तो ब्रोंकाइटिस में कंजेशन की वजह से सीने घरघराहट, रात में खांसी, सांस लेने में तकलीफ और एक्सरसाइज के बाद कई सारी समस्याएं हो सकती है।

इलाज का अंतर

डॉ. सुनील कहते हैं कि अगर किसी को एक्यूट ब्रोंकाइटिस है एंटीबायोटिक्स के साथ डाइट में ज्यादा से ज्यादा गर्मी चीजों को शामिल करके जल्दी ठीक हो सकता है। जबकि, बात क्रोनिक ब्रोंकाइटिस की करें तो इसमें सांस की नली को खोलने के लिए इनहेल्ड ब्रोंकोडायलेटर का इस्तेमाल करना और कभी-कभी पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन या ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।

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बात अस्थमा के इलाज की करें तो ब्रोंकोडाइलेटर दवाएं सांस लेने में अचानक होने वाली तकलीफ या दौरे के दौरान तुरंत राहत प्रदान करती हैं। इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स वायुमार्ग की सूजन को कम करके भविष्य में होने वाले दौरों को रोकते हैं। इसके अलावा आपको ट्रिगर्स को कंट्रोल करने की जरूरत है जैसे पराग, धूल के कण, धुआं या ठंडी हवा जैसे व्यक्तिगत ट्रिगर्स।

Bronchitis Vs Asthma: ज्यादा गंभीर बीमारी कौन सी है?

डॉ. सुनील कहते हैं कि अस्थमा और ब्रोंकाइटिस, दोनों ही गंभीर समस्या है लेकिन अस्थमा ज्यादा गंभीर है क्योंकि ये अचानक से ट्रिगर होने के साथ ही गंभीर रूप ले सकती है जिसमें कि आपको मेडिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।

The Journal of Family Practice में प्रकाशित यह शोध बताती है कि एक्यूट ब्रोंकाइटिस के रोगियों में बाद में अस्थमा (asthma) होने की दर में दस गुना वृद्धि देखी गई। यहां तक कि एंटीबायोटिक्स के उपयोग के बावजूद 30% रोगियों को ठीक न होने वाली खांसी के कारण दोबारा डॉक्टर के पास जाना पड़ा।

निष्कर्ष:

अंत में दोनों ही डॉक्टर का सुझाव है कि मौसम बदलते ही आपको इन दोनों ही बीमारियों के टिगर्स को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। आपको अपनी लाइफस्टाइल को सही करने के साथ डाइट में विटामिन सी से भरपूर फूड्स को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा आपको एंटी इंफ्लेमेटरी फूड्स को खाना चाहिए जो कि फेफड़ों की सूजन कम करने के साथ इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करता है।

FAQ

  • अस्थमा के मरीज को क्या नहीं खाना चाहिए?

    अस्थमा के मरीज को प्रोसेस्ड फूड्स, फ्रोजन फूड और आर्टिफिशियल स्वीटनर वाली चीजों के सेवन से बचना चाहिए। यह अस्थमा के लक्षणों से बढ़ा सकते हैं।
  • ब्रोंकाइटिस में कौन सा फल खाना चाहिए

    ब्रोंकाइटिस में आपको विटामिन सी से भरपूर फूड्स को खाना चाहिए। इसके अलावा आप एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर सेब खा सकते हैं।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 06, 2026 14:07 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Sunil Kumar K