छोटे बच्चों के फेफड़ों से कफ निकालने में काफी वक्त लग सकता है। दरअसल, जैसे-जैसे इंफेक्शन कम होता है, म्यूकस कम होता जाता है और सीने से घरघराहट की आवाज कम होती है। इसके अलावा Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bangalore कहते हैं कि छोटे बच्चों में जैसी ही यह समस्या हो आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इन छोटे बच्चों में छाती में कफ जमा होना गंभीर कंजेशन का रूप ले सकता है जिससे सोने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने माता-पिता के लिए कुछ सुझाव दिए हैं जो कि इस समस्या में काम आ सकते हैं।
बच्चे की छाती से बलगम कैसे निकालें?
Dr. Sunil Kumar K कहते हैं कि बच्चे की छाती में बलगम या म्यूकस अक्सर सर्दी-जुकाम, वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन या म्यूकस के ज्यादा बनने की वजह से होता है। बड़े बच्चों की तरह छोटे बच्चे खांसकर म्यूकस बाहर नहीं निकाल पाते, इसलिए उनकी छाती में जकड़न या घरघराहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है।
ज्यादातर मामलों में, जैसे-जैसे इन्फेक्शन ठीक होता है, शरीर धीरे-धीरे म्यूकस को साफ कर देता है। माता-पिता बच्चे की उम्र के हिसाब से उसे रेगुलर ब्रेस्टफीड या फॉर्मूला फीड देकर हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा डॉ. सुनील बताते हैं कि नाक बंद होने पर, सलाइन नेजल ड्रॉप्स और उसके बाद इन्फैट नेजल एस्पिरेटर से धीरे-धीरे सक्शन करने से बच्चे को आसानी से सांस लेने और दूध पीने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, Paediatrics & Child Health में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि फ्लूइड्स इंटेक बढ़ाना, नमी वाली हवा (Humidified Air) की मदद, NSAIDs, एंटीहिस्टामाइन, जिंक और विटामिन सी से भरपूर घरेलू उपायों को भी इस समस्या में बहुत कारगर नहीं माना जा सकता है।
इसे भी पढ़ें: इस 1 देसी उपचार से मैंने पाया ब्रोंकाइटिस में लगातार आती खांसी पर कंट्रोल, कंजेशन में भी आई कमी
बच्चों की छाती से जमा कफ बाहर निकालने के 3 सुरक्षित टिप्स
डॉ. सुनील कहते हैं कि माता-पिता को बच्चे की छाती के अंदर से बलगम को शारीरिक रूप से निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। खांसना शरीर का सांस की नली से बलगम साफ करने का एक प्राकृतिक तरीका है। हालांकि, आप यह टिप्स अपना सकते हैं जैसे-
- कमरे में नमी बनाए रखें इससे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी।
- बच्चे के जागने और निगरानी में रहने के दौरान उसे सीधा रखने जैसे हल्के उपाय कंजेशन से कुछ राहत दे सकते हैं।
- सुरक्षित सोने की जगह पर बच्चे को पीठ के बल सपाट लिटाएं, लेकिन ध्यान रखें कि कंजेशन के इलाज के लिए तकिए, वेज या झुके हुए सोने की व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
छोटे बच्चों को कभी भी भाप न दिलाएं
डॉ. सुनील कहते हैं कि भाप लेने से, खासकर गर्म पानी से बचना चाहिए क्योंकि इससे गंभीर रूप से जलने का खतरा हो सकता है और इससे छाती का बलगम ठीक से साफ नहीं होता है। जब तक किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल ने खास तौर पर सलाह न दी हो, तब तक बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए और न ही भाप दिलाना चाहिए। इसी तरह, एंटीबायोटिक्स ज़्यादातर वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के लिए फायदेमंद नहीं होती हैं और इनका इस्तेमाल तभी किया जाना चाहिए जब डॉक्टर ने इनकी सलाह दी हो।
डाइट में किन बातों का रखें ध्यान
डॉ. सुनील कहते हैं कि इतने छोटे बच्चों के लिए कोई खास डाइट नहीं होती हालांकि, कुछ परहेज हैं जैसे
- उन्हें सिर्फ मां का दूध दें या फॉर्मूला मिल्क। किसी भी अन्य प्रकार के दूध देने से बचें।
- बच्चों को केला खिलाने से बचें।
- ठंडी चीजें न खिलाएं।
- सूप पिलाएं, दाल का पानी दें या सब्जी की प्यूरी में घी मिलाकर इसे खिलाएं।
mian (16)
इसे भी पढ़ें: कफ को दूर करने के लिए इस तरह करें दालचीनी का इस्तेमाल, मिलेगें कई लाभ
छाती में जमा कफ के दौरान कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना बेहद जरूरी है?
डॉ. सुनील कहते हैं कि अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है या उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो रही है, तो उसे डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। माता-पिता को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए अगर उन्हें ये लक्षण दिखें:
- तेजी से या मुश्किल से सांस लेना
- सांस लेते समय पसलियों के बीच या नीचे की त्वचा का अंदर की ओर खिंचना,
- कराहना
- सांस लेने में रुक-रुक कर अंतराल होना,
- होंठ या चेहरे का नीला या ग्रे पड़ना
- असामान्य रूप से ज्यादा नींद आना,
- जगाने में मुश्किल होना या दूध पीने में बहुत ज्यादा परेशानी होना।
- गीले डायपर कम होने का मतलब डिहाइड्रेशन हो सकता है और इसके लिए भी डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
निष्कर्ष:
डॉ. सुनील कहते हैं कि बच्चे को सिगरेट के धुएं, अगरबत्ती, तेज परफ्यूम और सांस लेने में तकलीफ देने वाली दूसरी चीजों से दूर रखें। तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को बुखार होने पर तुरंत हेल्थकेयर प्रोफेशनल से बात करनी चाहिए। अगर खांसी या नाक-छाती में जमाव (कंजेशन) बना हुआ है, बढ़ रहा है, बच्चे का दूध पीना कम हो गया है, या बच्चा सामान्य से ज्यादा बीमार लग रहा है, तो उसे पीडियाट्रिशियन यानी बच्चों के डॉक्टर को दिखाना चाहिए। मकसद बलगम को जबरदस्ती बाहर निकालना नहीं है, बल्कि बच्चे की सांस की नली को आरामदेह बनाए रखना, शरीर में पानी की कमी न होने देना और बीमारी ठीक होने तक बच्चे पर बारीकी से नजर रखना है।
FAQ
छोटे बच्चों को कफ जम जाए तो क्या करें?
छोटे बच्चों को कफ जम जाए तो आपको सबसे पहले अपने डॉक्टर को दिखाना ज्यादा से ज्यादा उसे हाइड्रेटेड रखने के लिए ब्रेस्टफीड या फॉर्मूला मिल्क पिलाएं। इसके अलावा डॉक्टर के कहे अनुसार दवाओं की मदद ले सकते हैं।लगातार कफ बनने का क्या कारण है?
लगातार कफ बनने के पीछे इंफेक्शन एक बड़ा कारण बन सकता है या अस्थमा, निमोनिया और ब्रोंकाइटिस की बीमारी जिसमें लगातार कफ बनने की समस्या होती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 05, 2026 16:05 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Sunil Kumar K
-1791194501891.webp)