अस्थमा और निमोनिया, दोनों ही फेफड़े की गंभीर बीमारी है। अस्थमा और निमोनिया, दोनों में ही खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन ये असल में अलग-अलग बीमारियां हैं। Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bangaluru कहते हैं अस्थमा एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है जिसमें सांस की नलियों में सूजन आ जाती है तो निमोनिया फेफड़ों के टिश्यू, खासकर हवा की थैलियों का सूजन है। इसके अलावा भी इन दोनों ही बीमारियों में काफी अंतर है, जिसके बारे में Dr. Koushik.N, Consultant - Pulmonologist & Sleep Medicine Specialist, Aster RV Hospital, Bangaluru ने भी हमें विस्तार से जानकारी दी।
अस्थमा और निमोनिया में क्या अंतर है?
अस्थमा और निमोनिया में अंतर बताते हुए डॉक्टर सुनील कहते हैं कि इन दोनों बीमारियों में सूजन की समस्या होती है लेकिन, सूजन अलग-अलग जगह होती है। इसी तरह से दोनों ही इंफेक्शन की वजह से ट्रिगर कर सकती हैं लेकिन इंफेक्शन का कारण कुछ और हो सकते हैं-
| अंतर का कारण | अस्थमा (Asthma) | निमोनिया (Pneumonia) |
| सूजन (Inflammation) का स्थान | सांस की नलियों में सूजन | फेफड़ों के टिश्यू, खासकर हवा की थैलियों (एयर सैक्स) में सूजन। |
| मुख्य कारण (Causes) | एलर्जी पैदा करने वाली चीजें, तेज वर्कआउट, एक्सरसाइज, ठंडी हवा, प्रदूषण, या संक्रमण। | बैक्टीरिया, वायरस और कभी-कभी फंगस (संक्रमण)। |
| मुख्य लक्षण (Symptoms) | घरघराहट, सीने में जकड़न, खांसी और सांस फूलना। | खांसी के साथ बुखार, कंपकंपी, कमजोरी, सीने में बेचैनी, सांस लेने में दिक्कत, और गाढ़ा, रंग बदला हुआ बलगम। |
| बुखार (Fever) | आमतौर पर बुखार नहीं आता | बुखार होना आम है और व्यक्ति काफी बीमार महसूस करता है। |
| बीमारी की गति | यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) समस्या है। | यह बहुत तेजी से अपना रूप बदल सकती है और गंभीर रूप धारण कर सकती है। |
| इलाज (Treatment) | आमतौर पर इनहेल्ड दवाओं से, जो सांस की नली की सूजन को नियंत्रित करती हैं और ऐंठन से राहत देती हैं। | कारण पर निर्भर करता है; बैक्टीरियल निमोनिया के लिए एंटीबायोटिक्स और वायरल इंफेक्शन के लिए सपोर्टिव केयर दी जाती है। |
फेफड़ों पर अस्थमा और निमोनिया का अलग-अलग प्रभाव
डॉ. कौशिक कहते हैं कि अस्थमा में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस से जुड़ी समस्या महसूस हो सकती है। निमोनिया में फेफड़ों के अंदर टिश्यूज, खासकर हवा की थैलियों (air sacs) में सूजन की समस्या हो जाती है।
अस्थमा और निमोनिया के मूल कारणों का अंतर
डॉ. सुनील बताते हैं कि अस्थमा एलर्जी पैदा करने वाली चीजों जैसे तेज वर्कआउट, एक्सरसाइज, ठंडी हवा, प्रदूषण, संक्रमण या दूसरी वजहों से शुरू हो सकती है। जबकि, निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस और कभी-कभी फंगस की वजह से हो सकता है।
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अस्थमा और निमोनिया के मुख्य लक्षणों की पहचान
आगे डॉ. कौशिक कहते हैं कि अस्थमा और निमोनिया के लक्षणों में अंतर कुछ इस तरह है कि आप इसकी गंभीरता का भी पता लगा सकते हैं जैसे
- अस्थमा में घरघराहट, सीने में जकड़न, खांसी और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- निमोनिया में खांसी के साथ बुखार, कंपकंपी, कमजोरी, सीने में बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है जिसमें कि आपको गाढ़ा बलगम आ सकता है और इसकी रंगत में भी बदलाव नजर आ सकता है।
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कैसे पहचानें कि अस्थमा हुआ है या निमोनिया?
डॉ. सुनील बताते हैं कि अस्थमा में निमोनिया में अंतर करना है तो आपको इस बात पर ध्यान देना होगा कि बुखार आ रहा है या नहीं। दरअसल, आमतौर पर अस्थमा की वजह से बुखार नहीं आता, जब तक कि उसी समय कोई और बीमारी न हो। निमोनिया में बुखार हो सकता है और व्यक्ति काफी बीमार महसूस कर सकता है। इतना ही नहीं, डॉ. कौशिक बताते हैं कि निमोनिया बहुत तेजी से अपना रूप बदल सकती है और गंभीर रूप धारण कर सकती है और गंभीर इंफेक्शन के रूप में महसूस हो सकती है।
अस्थमा और निमोनिया के इलाज में अंतर
डॉ. कौशिक कहते हैं कि अस्थमा और निमोनिया के इलाज में भी काफी अंतर होता है जैसे
- अस्थमा का इलाज आमतौर पर इनहेल्ड दवाओं से किया जाता है, जो सांस की नली की सूजन को कंट्रोल करती हैं और ब्रोंकोस्पास्म यानी सांस की नली की मांसपेशियों में ऐंठन से राहत देती हैं।
- निमोनिया का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है जैसे बैक्टीरियल निमोनिया के लिए एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ सकती है, जबकि कई वायरल इन्फेक्शन का इलाज सपोर्टिव केयर से किया जाता है। इसके अलावा व्यक्ति की स्थिति कितनी गंभीर है यह भी इलाज को तय करती है।
साल 2011 में Science Direct में प्रकाशित Emergency Medicine Secrets की यह स्टडी बताती है कि निमोनिया के मामलों में संदेहास्पद रोगजनकों के आधार पर शुरुआती दौर में ही एंटीबायोटिक उपचार शुरू करने के साथ PSI (Pneumonia Severity Index) या CURB-65 स्कोर का उपयोग एक विश्वसनीय तरीका हो सकता है जिससे इलाज में मदद मिल सकती है और मरीज की जान बच सकती है।
अस्थमा वाले व्यक्ति को निमोनिया हो सकता है
डॉ. कौशिक कहते हैं कि सबसे अहम बात यह है कि अस्थमा वाले व्यक्ति को निमोनिया भी हो सकता है, इसलिए नया बुखार, सांस लेने में ज्यादा तकलीफ या लक्षणों में कोई बड़ा बदलाव होने पर उसे सीधे अस्थमा से नहीं जोड़ना चाहिए। आपको लक्षण महसूस होते ही डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
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कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
डॉ. सुनील बताते हैं कि अगर आपको सांस लेने में तकलीफ के साथ तेज बुखार है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं क्योंकि यह तेजी से इंफेक्शन फैलने का संकेत हो सकती है। ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से तुरंत बात करनी चाहिए और इलाज करवाना चाहिए।
निष्कर्ष:
अंत में डॉ. सुनील कहते हैं कि मौसम बदलते के साथ और खासकर कि तापमान में गिरावट के साथ आपको इन दोनों ही बीमारियों को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि सर्दियों के आस-पास जब हवा प्रदूषित हो जाती है तो अस्थमा ट्रिगर कर सकती है और लंबे समय तक इंफेक्शन रहने पर यह निमोनिया का भी रूप ले सकती है। इसके अलावा कमजोर फेफड़े वाले लोग और अस्थमा और निमोनिया के पुराने मरीज इन दिनों अपना अतिरिक्त ख्याल रखें।
FAQ
अस्थमा में कौन सा फल नहीं खाना चाहिए?
अस्थमा में आपको ठंडे फलों के सेवन से बचना चाहिए जैसे केला। इसके अलावा आपको सल्फाइट से भरपूर किशमिश और छुहारा खाने से भी बचना चाहिए।निमोनिया में कौन सा फल खाना चाहिए?
निमोनिया में आपको विटामिन सी से भरपूर संतरा और मौसंबी का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा आप एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर कुछ फलों का सेवन कर सकते हैं जैसे स्ट्रॉबेरी और चेरी। इसके अलावा आप कीवी और पपीता भी खा सकते हैं।
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Oct 05, 2026 18:30 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Sunil Kumar K
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