Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vikash Goyal , Cardiologist

सुबह उठते ही धड़कन तेज क्यों हो जाती है? जानें इसके 5 कारण और कब इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

सुबह नींद से जागते ही दिल की धड़कन तेज महसूस होना कई कारणों से हो सकता है। यहां डॉक्टर से जानिए ऐसा क्यों होता है, कब यह सामान्य है और किन लक्षणों के साथ तेज धड़कन किसी बीमारी का संकेत हो सकती है।

आंख खुलते ही अगर आपको अपने दिल की धड़कन सामान्य से ज्यादा तेज महसूस होती है, तो ऐसा महसूस होना अचानक चिंता पैदा कर सकता है। कई लोगों को लगता है कि नींद से उठते ही दिल का तेज धड़कना सीधे तौर पर किसी हार्ट की बीमारी का संकेत है लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल के अनुसार, सोने और जागने के बीच शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। सुबह जागने के समय शरीर धीरे-धीरे एक्टिव मोड में आता है और हार्मोनल तथा नर्वस सिस्टम में बदलाव होने लगते हैं। इसी दौरान कुछ लोगों को दिल की धड़कन तेज या कभी-कभी अनियमित महसूस हो सकती है। अगर यह कुछ देर में अपने आप सामान्य हो जाए और इसके साथ कोई दूसरा लक्षण न हो, तो हर स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं होती।

सुबह उठते ही धड़कन तेज क्यों हो जाती है?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार, कई बार तनाव, शरीर में पानी की कमी या नींद से जागने के दौरान शरीर में होने वाले सामान्य बदलाव इसकी वजह हो सकते हैं। हालांकि, बार-बार होने वाली या लंबे समय तक बनी रहने वाली तेज धड़कन को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। हार्ट पैल्पिटेशन यानी दिल की धड़कन तेज, फड़फड़ाती या अनियमित महसूस होना कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है।

1. सुबह उठते समय शरीर का स्ट्रेस रिएक्शन

नींद से जागने के दौरान शरीर में हार्मोन और नर्वस सिस्टम की एक्टिविटी बदलती है। अगर आप अचानक जागते हैं, किसी चिंता या तनाव में हैं या सुबह उठते ही किसी परेशानी के बारे में सोचने लगते हैं, तो शरीर का 'फाइट या फ्लाइट' रिस्पॉन्स एक्टिव हो सकता है। इससे कुछ समय के लिए हार्ट रेट बढ़ सकता है और धड़कन तेज महसूस हो सकती है।

2. शरीर में पानी की कमी

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि रात में कई घंटे तक पानी नहीं पीने के कारण सुबह हल्का डिहाइड्रेशन हो सकता है। शरीर में पानी की कमी होने पर हार्ट को शरीर में ब्लड पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, जिससे धड़कन तेज महसूस हो सकती है। इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी हार्ट रिद्म को प्रभावित कर सकता है।

3. हार्ट रिद्म में गड़बड़ी यानी एरिथमिया

कभी-कभी तेज धड़कन किसी असामान्य हार्ट रिद्म की वजह से भी हो सकती है। एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी समस्याओं में दिल बहुत तेज या अनियमित तरीके से धड़क सकता है। अगर धड़कन बार-बार तेज होती है, अचानक शुरू होकर लंबे समय तक रहती है या इसके साथ चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण आते हैं, तो इसकी जांच जरूरी है।

इसे भी पढ़ें: 200 साल पहले डॉक्टर कान लगाकर सुनते थे दिल की धड़कन, फिर स्टेथोस्कोप कैसे बना? इसके पीछे है रोचक कहानी

National Heart, Lung and Blood Institute में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia) एक गंभीर समस्या है, जिसमें दिल बहुत तेज, बहुत धीमा या अनियमित रूप से धड़क सकता है। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या जानलेवा कार्डियक अरेस्ट जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।

4. नींद पूरी न होना या खराब स्लीप क्वालिटी

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार, कम नींद, बार-बार नींद टूटना या लगातार तनाव शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सुबह उठते समय दिल की धड़कन सामान्य से तेज महसूस हो सकती है। अगर इसके साथ दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन या बेचैनी रहती है, तो अपनी नींद की क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए।

Heart Rate High After Waking Up

5. एनीमिया या थायराइड की समस्या

खून की कमी यानी एनीमिया और थायराइड का ज्यादा एक्टिव होना भी हार्ट रेट बढ़ा सकता है। इसके अलावा कम ब्लड शुगर, बुखार और कुछ दवाएं भी धड़कन तेज कर सकती हैं। अगर समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट और अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: एक्सरसाइज के बाद कितनी जल्दी सामान्य होता है हार्ट रेट? जानें इससे हार्ट हेल्थ के बारे में क्या पता चलता है

साल 2002 में Journal of Hypertension में प्रकाशित पेपर के अनुसार, सुबह उठने के बाद की जाने वाली फिजिकल एक्टिविटी सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में होने वाले उछाल (morning surge) को प्रभावित करती है। इस रिसर्च में पाया गया कि जागने के बाद एक्टिविटी जितनी ज्यादा होगी, ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन में उतना ही बड़ा उछाल आएगा और यह असर उन मरीजों में और ज्यादा देखा गया जिनका क्लीनिक ब्लड प्रेशर पहले से ज्यादा था। इसलिए, 24-घंटे के ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग रिपोर्ट्स की जांच करते समय डॉक्टरों को मरीज की सुबह की फिजिकल एक्टिविटी को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।

कब तेज धड़कन को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

अगर सुबह धड़कन तेज होने के साथ सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, तेज चक्कर, बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना हो, तो इसे सामान्य मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए और तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। अगर धड़कन कुछ सेकंड के लिए कभी-कभार तेज होती है और कोई दूसरा चिंताजनक लक्षण नहीं है, तो यह हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, बढ़ रही है या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रही है, तो कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

निष्कर्ष

सुबह उठते ही दिल की धड़कन तेज होना कई बार डिहाइड्रेशन, तनाव, कैफीन या नींद की कमी जैसी सामान्य वजहों से हो सकता है लेकिन बार-बार होने वाली तेज या अनियमित धड़कन को केवल तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर या बेहोशी के साथ ऐसा हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या खाली पेट रहने से सुबह धड़कन तेज हो सकती है?

    कुछ लोगों में लंबे समय तक खाना न खाने या ब्लड शुगर में बदलाव के कारण धड़कन तेज महसूस हो सकती है।
  • धड़कन तेज हो तो कौन-सी जांच कराई जा सकती है?

    लक्षणों के आधार पर डॉक्टर ECG, ब्लड टेस्ट, थायराइड जांच या कुछ मामलों में लंबे समय तक हार्ट रिद्म रिकॉर्ड करने वाली मॉनिटरिंग की सलाह दे सकते हैं।

Read Next

क्या लंबे समय तक खाली पेट रहने से बढ़ सकती है अल्सर की समस्या? डॉक्टर से जानें सच

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 30, 2026 15:42 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Vikash Goyal

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content