Sat Oct 17, 2026 | 03:58 PM IST

Medically Reviewed by Archana Singhal , Counsellor & Family Therapist

ब्रेकअप के बाद शराब का सहारा क्यों लेने लगते हैं कुछ लोग? जानें मेंटल हेल्थ पर इसका असर

हाल ही में भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने बताया कि डिवोर्स के बाद शराब की लत के चलते उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ा। क्या सच में शराब पीने से स्ट्रेस कम होता है और इसका मेंटल हेल्थ पर क्या असर होता है? जानने के लिए पढ़ें यह लेख।
ब्रेकअप के बाद शराब का सहारा क्यों लेने लगते हैं कुछ लोग? जानें मेंटल हेल्थ पर इसका असरब्रेकअप के बाद शराब का सहारा क्यों लेने लगते हैं कुछ लोग? जानें मेंटल हेल्थ पर इसका असर

भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शराब की लत, ब्रेकअप और एंग्जायटी जैसे मुद्दों के बारे में बात करके एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ब्रेकअप या डिवोर्स के बाद अकेलेपन और भविष्य की चिंता से बचने के लिए शराब पीना सही है? क्या शराब की लत मेंटल स्ट्रेस को और ज्यादा बढ़ा सकती है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने माइंडवेल काउंसलर की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से बात की। उन्होंने बताया कि हालांकि, शुरुआत में शराब पीना लोगों को राहत देने वाला लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक शराब पीने से इसका असर मूड, नींद, व्यवहार और मेंटल हेल्थ पर पड़ सकता है।

ब्रेकअप के बाद शराब पीने का मन क्यों करता है?

हाल में हुए एक इंटरव्यू में युजवेंद्र चहल ने भी बताया कि डिवोर्स होने के बाद वह खुद को संभाल नहीं पाया और शराब की लत लग गई। शराब की लत और एंग्जायटी की समस्या के चलते उसे शारीरिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन 26 दिन के रिहैब से उन्होंने शराब की लत से छुटकारा पा लिया। 

Archana Singhal कहती हैं, “दरअसल, रिश्ता टूटने पर व्यक्ति को अकेलापन, दुख, गुस्सा, अस्वीकृति और आगे की जिंदगी को लेकर चिंता हो सकती है। जो लोग इन इमोशंस को संभाल नहीं पाते, वे इससे बचने के लिए शराब का सहारा ले सकते हैं। अगर किसी को ब्रेकअप से पहले एंग्जायटी या डिप्रेशन की परेशानी होती है, तो मुश्किल समय में उनका मन शराब पीने का कर सकता है।" 

क्या शराब पीने से दुख और तनाव कम होता है?

Archana Singhal ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि शराब पीने से मन हल्का हो गया, लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है। शराब का असर कम होते ही बेचैनी, उदासी और नींद से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में कई बार शराब की लत दुख और स्ट्रेस को और ज्यादा बढ़ा सकती है। मैं लोगों को सलाह दूंगी कि अगर रिश्ते टूटने पर स्ट्रेस या एंग्जायटी हो रही है, तो शराब के बजाय व्यक्ति को एक्सपर्ट से मिलना चाहिए। मरीज की कंडीशन को देखते हुए उन्हें थेरेपी की सलाह दी जा सकती है, जिससे उनका स्ट्रेस या एंग्जायटी कम हो सकती है।”

क्या शराब पीने से डिप्रेशन और एंग्जायटी बढ़ सकते हैं?

Mental Health Foundation के मुताबिक, अल्कोहल एक डिप्रेसेंट है, जो दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को बिगाड़ देता है। इससे व्यक्ति के बिहेवियर, इमोशंस और सोचने की शक्ति प्रभावित हो सकती है।

  • शुरुआत में शराब पीने से व्यक्ति को तनावमुक्त महसूस होता है, क्योंकि यह दिमाग के उस हिस्से पर असर डालती है, जो झिझक को कंट्रोल करता है।
  • शराब का असर खत्म होने पर दिमाग में केमिकल बदलावों के कारण गुस्सा, उदासी और चिंता जैसे नेगेटिव भावनाएं आने लगती है।
  • यह दिमाग के सोचने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है, जिस वजह से लोगों को अपनी भावनाएं और व्यवहार समझ ही नहीं आता।
  • लंबे समय तक शराब पीने से दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर कम होने लगते है, जबकि एंग्जायटी और डिप्रेशन से बचने के लिए इसका सही लेवल होना बहुत जरूरी है।
  • जैसे-जैसे न्यूरोट्रांसमीटर कम होने लगते हैं, तो डिप्रेशन से जुड़े लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

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Archana Singhal का कहना है, “ज्यादा शराब पीने से नींद का साइकिल और क्वालिटी दोनों पर असर पड़ता है और नींद पूरी न होने का असर मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। जिन लोगों को शराब की लत लग जाती है, उनका दिमाग सोचने-समझने और फैसले लेने की स्थिति में नहीं होता। लगातार पर्याप्त नींद न लेने, बिना वजह गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन और सोचने-समझने की शक्ति कम होने से व्यक्ति क्लिनिकल डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।”

शराब की लत पहचानने के तरीके

Archana Singhal ने कहा कि हर व्यक्ति में शराब पीने का पैटर्न एक जैसा नहीं होता। फिर भी कुछ लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। अगर ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो इन्हें टालने के बजाय एक्सपर्ट से मदद लेना फायदेमंद हो सकता है।

  • दुख, अकेलापन या तनाव होते ही शराब पीने का मन करना।
  • पहले के मुकाबले ज्यादा मात्रा में शराब पीना।
  • शराब कम करने या छोड़ने की कोशिश करना, लेकिन ऐसा न कर पाना।
  • शराब पीने के कारण नींद, काम या रिश्तों पर असर पड़ना।
  • नुकसान होने के बावजूद शराब पीते रहना।

शराब की लत छुड़ाने का तरीका

Archana Singhal कहती हैं, “जो लोग नियमित या अत्यधिक मात्रा में शराब पीते हैं, उन्हें अचानक शराब बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि विथड्रॉल सिंड्रोम गंभीर और खतरनाक हो सकते हैं। दरअसल, शराब की लत या निर्भरता एक हेल्थ से जुड़ी समस्या है, इसलिए उन्हें सपोर्ट और सही इलाज की जरूरत होती है। कुछ लोग डिप्रेशन की दवाएं लेने के साथ शराब भी पीने लगते हैं। शराब डिप्रेशन को और बढ़ा सकती है तथा दवाओं के साइड-इफेक्ट्स को ज्यादा गंभीर कर सकती है। इसके लिए एक्सपर्ट की मदद लेना सबसे जरूरी है। व्यक्ति की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए रिहैब की सलाह दी जा सकती है।”

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निष्कर्ष
रिश्ता टूटने के दुख को भुलाने के लिए शराब पीना कोई समाधान नहीं है। ऐसे समय में अपनी भावनाओं को समझना और स्वीकार करना जरूरी है और अपने इमोशंस को किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य साझा किए जा सकते हैं। इसके अलावा, खुद को शांत रखने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा भी लिया जा सकता है। स्ट्रेस को कम करने के लिए रेगुलर फिजिकल एक्टिविटीज करना और खुद को व्यस्त रखना जरूरी है।

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FAQ

  • ब्रेकअप के बाद शराब पीने से पूर्व पार्टनर को बार-बार कॉल/मैसेज करने की इच्छा क्यों प्रबल होती है?

    शराब दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को सुन्न कर देती है, जो हमारे फैसले लेने की क्षमता और आत्म-नियंत्रण को संभालता है। तर्क क्षमता कम होते ही दिमाग में दबा हुआ भावनात्मक दर्द हावी हो जाता है, जिससे व्यक्ति बिना परिणाम सोचे कॉल या मैसेज कर बैठता है।
  • इमोशनल हैंगओवर क्या है और यह सामान्य हैंगओवर से कैसे अलग है?

    नॉर्मल हैंगओवर में सिर्फ सिरदर्द और मतली होती है, जबकि इमोशनल हैंगओवर में शराब का नशा उतरने के बाद बुहत ज्यादा पछतावा, खुद से नफरत, गहरी उदासी और मानसिक थकावट महसूस होती है। यह दिमाग के डिप्रेशन में लेकर जा सकती है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 17, 2026 14:07 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Archana Singhal